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कोर वोट बैंक ने बनाई दूरी, मिडिल क्लास का मोहभंग... प्रीति चौधरी ने बताए AAP की हार के 10 बड़े फैक्टर्स

दिल्ली में बीजेपी को ना केवल शानदार जीत मिली है बल्कि अब तक बीजेपी का वोट पाने का रिकॉर्ड भी नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने तोड़ दिया है. जहां 46 फीसदी वोट अबकी बीजेपी को मिला है. जबकि 1993 में बीजेपी 42.8% वोट मिला था.

आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल
प्रीति चौधरी
  • नई दिल्ली,
  • 08 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 10:47 PM IST

दिल्ली में लगातार तीसरी बार स्पष्ट जनादेश की सरकार आई लेकिन 27 साल बाद कमल खिला है. ऐतिहासिक जीत मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि दिल्ली में आडंबर, अराजकता और अहंकार की हार हुई है.27 साल तक अभेद्य रहे दिल्ली के किले पर कमल का झंडा फहरा दिया. 

BJP ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 26 में से 16 किले ढहा दिए हैं. इनमें अरविंद केजरीवाल की नई दिल्ली विधानसभा सीट भी शामिल है. इन 26 सीटों पर AAP लगातार 3 विधानसभा चुनावों से जीत रही थी. दिल्ली में अब तक बीजेपी का वोट पाने का रिकॉर्ड भी नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने तोड़ दिया है. जहां 46 फीसदी वोट अबकी बीजेपी को मिला है. जबकि 1993 में बीजेपी 42.8% वोट मिला था. वोट परसेंट ही नहीं स्ट्राइक रेट के हिसाब से भी नरेंद्र मोदी की गारंटी पर दिल्ली में बीजेपी की अब तक की सबसे ब़ड़ी जीत है.

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चुनाव परिणामों को लेकर इंडिया टुडे की एग्जिक्यूटिव एडिटर प्रीति चौधरी के क्या takeaways हैं, आइए एक-एक कर जानते हैं.    
- अरविंद केजरीवाल का नैतिकतावादी इमेज पर डेंट
- मिडिल क्लास का केजरीवाल से मोहभंग हो गया है.
- दूसरा कार्यकाल निराशाजनक रहा जबकि पहले कार्यकाल के दौरान वादों के आधार पर मतदाताओं के पास गए थे.
- पार्टी के कोर वोट बैंक ने बनाई दूरी जिसकी वजह से संगम विहार, मालवीय नगर, ग्रेटर कैलाश जैसी सुरक्षित सीटें खो दीं.
- सही तरीके से कार्य नहीं होने की वजह से AAP द्वारा संचालित एमसीडी पर लोगों का गुस्सा, जिस पर अभी आम आदमी पार्टी काबिज है.
-  कांग्रेस ने जीतने के लिए नहीं बल्कि आप की हार सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक रूप से लड़ाई लड़ी.
- मैदान आसान नहीं था - केजरीवाल को दबाव में मुकाबला करना पड़ा.
- बीजेपी ने एक सुसंगत और मजबूत चुनावी अभियान चलाया.
- वैचारिक अनिश्चितता अल्पसंख्यक मतदाताओं को ठीक से नहीं समझ आई.
- दिल्ली में अपनी स्थिति मजबूत करने की बजाय विस्तार को प्राथमिकता दी.

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जनता ही जनार्दन

 इस चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने समाज के लगभग सभी वर्गों के लिए कुछ ना कुछ ऐलान जरूर किए थे, लेकिन वो भी पार्टी के काम नहीं आए. बीजेपी ने शीशमहल, यमुना, प्रदूषण और शराब घोटाले जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और साथ में ये भी वादा किया कि केजरीवाल सरकार द्वारा चलाई जा रही कोई भी जनकल्याणकारी योजना बंद नहीं होगी. कुल मिलाकर चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया कि जनता ही जनार्दन है.

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