
लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में मिली हार के बाद बीजेपी राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सामूहिक नेतृत्व की रणनीति अपना रही है. पार्टी की राज्य नेतृत्व ने एक चुनाव प्रबंधन समिति को फिर से जीवंत किया है जिसमें चार नेता मुख्य जिम्मेदारियों को संभालेंगे. सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनावों में उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले के साथ अब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे चुनाव प्रबंधन का नेतृत्व करेंगे.
अगले हफ्ते चुनाव प्रबंधन समिति की घोषणा की जाएगी, जिसमें 20 स्टार प्रचारक शामिल होंगे. रावसाहेब दानवे को मुख्य समन्वयक बनाया जाएगा, जबकि नितिन गडकरी मुख्य चेहरा होंगे जो विपक्ष द्वारा बनाए गए कथानक का मुकाबला करेंगे. चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि नितिन गडकरी हमारे पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं जो महाराष्ट्र और नागपुर का राष्ट्रीय राजधानी में प्रतिनिधित्व करते हैं. वे हमेशा हमारी कोर टीम और राज्य मामलों की निगरानी करने वाले संसदीय बोर्ड का हिस्सा रहे हैं. गडकरी को महाराष्ट्र की जनता से बहुत प्यार है और उन्होंने हमेशा राज्य में अपनी काबिलियत साबित की है. उन्हें चुनाव अभियान समिति में शामिल करना कोई नई बात नहीं है.
हाल ही के लोकसभा चुनाव में नितिन गडकरी ने नागपुर सीट से चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस के विवेक ठाकरे के खिलाफ लगभग 25 रैलियां की थीं. उन्होंने लगातार तीसरी बार अपनी सीट 1,37,000 वोटों के अंतर से जीती थी.
हालांकि, हाल के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को विदर्भ क्षेत्र में बड़ा झटका लगा है. बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में विदर्भ की 10 में से सिर्फ 2 सीटें जीतीं, जबकि 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 10 में से 9 सीटें जीती थीं और कांग्रेस ने सिर्फ चंद्रपुर सीट हासिल कर सकी थी. इसी तरह बीजेपी को विधानसभा चुनाव में भी विदर्भ में नुकसान उठाना पड़ा है. यहां की कुल 62 सीटों में से 2014 में बीजेपी ने 40 से ज्यादा सीटों जीती थी जबकि 2019 में वो खिसकर 29 सीटों पर आ गई और पार्टी का प्रदर्शन विदर्भ में कमजोर होता चला गया. इसलिए पार्टी के मुख्य समूह का मानना है कि गडकरी विदर्भ में पार्टी की चुनावी स्थिति को पुनर्स्थापित कर सकते हैं.
इस बीच एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि यह बीजेपी का आंतरिक मामला है कि किसे नेतृत्व सौंपना है. हम आंतरिक लोकतंत्र में विश्वास करते हैं और अपनी पार्टी गठबंधन में इस सिद्धांत का पालन करते हैं. साथ ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए कई नेता बाहर से आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि शायद अब केंद्रीय नेतृत्व को राज्य नेतृत्व पर अब भरोसा नहीं रह गया है इसलिए बाहर से नेता बुलाए जा रहे हैं.
चुनाव विशेषज्ञ और शोधकर्ता अभिजीत ब्रह्मंथकर ने बताया कि ऐसा लग रहा है कि पार्टी के आंतरिक खेमे में नाराजगी है कि जब पार्टी सत्ता में थी, तब पुराने और वफादार चेहरों को महत्व नहीं दिया गया. अब जब चुनावी मुकाबला करने के लिए नई रणनीति बनाई जा रही है, तो इन चेहरों को नई जिम्मेदारियां और पद दिए जा रहे हैं.