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आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर चुनाव आयोग के रडार पर महाराष्ट्र सरकार, EC ने बिठाई जांच

आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के लिए महाराष्ट्र सरकार चुनाव आयोग की जांच के घेरे में है. 15 अक्टूबर को दोपहर 3.30 बजे विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी वेबसाइट पर करीब 200 सरकारी प्रस्ताव, नियुक्तियां और निविदाएं जारी कीं थी.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
ऋत्विक भालेकर
  • मुंबई,
  • 17 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 10:39 AM IST

महाराष्ट्र सरकार पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगा है.15 अक्टूबर को जब चुनाव आयोग ने चुनावी कार्यक्रम की घोषणा की तो उसन दिन भी राज्य सरकार ने  कई फैसले लिए जिनमें से 200 से अधिक सरकारी निर्णयों में से कई आचार संहिता लागू होने के बाद जारी किए गए

आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर महाराष्ट्र सरकार अब चुनाव आयोग की जांच के घेरे में है. 15 अक्टूबर को दोपहर 3.30 बजे विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी वेबसाइट पर करीब 200 सरकारी प्रस्ताव, नियुक्तियां और निविदाएं जारी कीं.

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राज्य सरकार ने की आयोग की अनेदखी

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से सरकार को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी सरकारी निर्णय, आदेश और निविदा को प्रकाशित न करने का आदेश दिया गया था. हालांकि राज्य सरकार ने आयोग के आदेश की अनदेखी की और मंगलवार रात और बुधवार सुबह के बाद कई निर्णय प्रकाशित किए.

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जब चुनाव आयोग ने इसे लेकर चिंता जाहिर की तो सरकार ने जल्दबाजी में अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए कई निर्णयों को हटा दिया. मुख्य निर्वाचन अधिकारी चोकालिंगम ने कहा कि हम अपलोड किए गए सरकारी प्रस्तावों के समय की जांच करेंगे और जांच करेंगे कि क्या इससे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है.

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उन्होंने कहा यदि कोई भी गड़बड़ी पाई जाती है तो तो हम किसी को नहीं बख्शेंगे. यदि हमें कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो हम कानूनी तंत्र के भीतर इसकी जांच करेंगे.

AAP ने की शिकायत

इसे लेकर पुणे के आम आदमी पार्टी के विजय कुंभार ने चुनाव आयोग को शिकायत की है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर देखा गया है कि 15 अक्टूबर के 100 से अधिक सरकारी प्रस्ताव और 16 अक्टूबर के कई प्रस्ताव गायब हैं. पहले, वेबसाइट पर 349 सरकारी प्रस्ताव दिख रहे थे लेकिन अब यह संख्या घटकर 247 हो गई है. इन प्रस्तावों के गायब होने के पीछे के कारणों की जांच करना महत्वपूर्ण है. 

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उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों को वेबसाइट से हटाना गलत काम करने की स्वीकृति माना जा सकता है और चुनाव आचार संहिता लागू होने के समय जारी किए गए ये प्रस्ताव जनता को गुमराह करने के इरादे से प्रकाशित किए गए प्रतीत होते हैं.

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