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महाराष्ट्र चुनाव में असर डालेगा मराठा आरक्षण का मुद्दा? मनोज जरांगे से मिले दलित और मुस्लिम लीडर्स

सूबे की घनसावंगी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व 2009 से सीनियर NCP(SP) नेता और पूर्व राज्य मंत्री राजेश टोपे कर रहे हैं. 20 नवंबर को होने वाले चुनावों में उनका मुकाबला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के हिकमत उधान से होगा. टोपे ने 2019 के चुनावों में 1,600 वोटों के मामूली अंतर से जीत हासिल की थी.

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aajtak.in
  • छत्रपति संभाजीनगर,
  • 31 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 8:11 PM IST

महाराष्ट्र (Maharashtra) में चुनावी माहौल अपने सबाब पर है और सभी पार्टियां अपना दम-खम दिखाने की पूरी कोशिश कर रही हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सूबे की घनसावंगी विधानसभा सीट पर ओबीसी वोटर्स अहम भूमिका में हैं, जिसमें अंतरवाली सरती भी शामिल है, जो मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा आरक्षण आंदोलन का केंद्र है. घनसावंगी जालना जिले का हिस्सा है, जो राज्य के मराठवाड़ा इलाके में है. इस इलाके में आरक्षण आंदोलन के प्रभाव ने बीजेपी को खत्म कर दिया और महा विकास अघाड़ी ने आठ में से सात लोकसभा सीटें जीत लीं. 

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घनसावंगी सीट का प्रतिनिधित्व 2009 से सीनियर एनसीपी (SP) नेता और पूर्व राज्य मंत्री राजेश टोपे कर रहे हैं. 20 नवंबर को होने वाले चुनावों में उनका मुकाबला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के हिकमत उधान से होगा. टोपे ने 2019 के चुनावों में 1,600 वोटों के मामूली अंतर से जीत हासिल की थी.

'मैंने मनोज जरांगे से बात की...'

एजेंसी के मुताबिक, टोपे ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्र में कोई भी मुद्दा मेरे लिए नया नहीं है. मैंने हर वर्ग के लिए काम किया है, मैंने जरांगे से बात नहीं की है. मैं बस अपना काम करता रहता हूं. महा विकास अघाड़ी के लिए अनुकूल माहौल है. 

सीनियर पत्रकार रवि मुंडे कहते हैं कि बागी सतीश घाडगे (जो बीजेपी के साथ थे) और शिवाजीराव चोथे (जो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के साथ थे) की मौजूदगी से मराठा वोटों का विभाजन हो सकता है.

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मुंडे ने कहा, "घनसावंगी निर्वाचन क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग के वोट महत्वपूर्ण होंगे. चुनावों के संबंध में जरांगे द्वारा लिए गए फैसले भी एक कारक होंगे. मराठा आरक्षण आंदोलन में उनकी मदद के लिए अन्य समुदाय टोपे से नाराज हैं."

पूर्व घनसावंगी 'नगराध्यक्ष' राजेंद्र देशमुख ने बताया कि एनसीपी में विभाजन (पिछले साल जुलाई में अजित पवार के शिंदे सरकार में शामिल होने के बाद) की वजह से टोपे की संभावनाओं को भी झटका लगेगा. उन्होंने कहा कि अगर जरांगे उम्मीदवार नहीं भी उतारते हैं, तो भी मराठा वोट बंट सकते हैं और कुछ उधान को भी मिल सकते हैं.

यह भी पढ़ें: 'मराठा विरोधी हैं फडणवीस, सरकार में उनकी मर्जी के बगैर कुछ नहीं होता', मनोज जरांगे का डिप्टी CM पर बड़ा आरोप

दलित और मुस्लिम नेताओं की जरांगे से मुलाकात

कई दलित और मुस्लिम नेताओं ने गुरुवार को जालना के अंतरवाली सरती में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे से मुलाकात की और 20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए "न्यूनतम साझा कार्यक्रम" तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा की. इस मौके पर एक सभा को संबोधित करते हुए जरांगे ने दलितों और मुसलमानों से उनके द्वारा समर्थित उम्मीदवारों का समर्थन करने को कहा और मराठों से भी दलित और मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए ऐसा ही करने को कहा.

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जरांगे ने कहा, "स्थापित सत्ता को चुनौती देने और हमारे समुदायों के खिलाफ काम करने वालों को हराने के लिए हमारी एकता की जरूरत है."

इस्लामिक विद्वान सज्जाद नोमानी ने बीजेपी पर "देश को धार्मिक आधार पर बांटने" का आरोप लगाया और कहा कि वोटों के बंटवारे से बचने के लिए एकजुट मोर्चा जरूरी है. उन्होंने कहा कि हमने चुनावों के लिए एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम जारी करने का फैसला किया है. हमारी एकता न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है.

उनके रुख का समर्थन करते हुए दलित नेता राजरत्न अंबेडकर और आनंदराज अंबेडकर ने भी कहा कि "जड़ जमाई हुई सत्ता" को उखाड़ फेंकने के लिए एकता जरूरत है.

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