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AAP के निशाने पर प्रवेश वर्मा क्यों हैं? क्या वाकई पूर्व सीएम के बेटे पर दांव लगा सकती है बीजेपी

आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. आम आदमी पार्टी की रडार पर प्रवेश वर्मा ही क्यों हैं और क्या बीजेपी वाकई दिल्ली में उनके चेहरे पर दांव लगा सकती है?

(Photo: India Today) (Photo: India Today)
बिकेश तिवारी
  • नई दिल्ली,
  • 26 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

दिल्ली की चुनावी लड़ाई अब कैश पर आ गई है. सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने चुनाव बाद सत्ता में आने पर महिला सम्मान योजना के तहत महिलाओं को 2100 रुपये देने का वादा किया है. आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर इस योजना के लिए फॉर्म भी भरवा रहे हैं. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व सांसद और नई दिल्ली सीट से संभावित उम्मीदवार प्रवेश वर्मा आम आदमी पार्टी के निशाने पर आ गए हैं. आम आदमी पार्टी के नेताओं ने प्रवेश वर्मा पर कैश बांटने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

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प्रवेश वर्मा पर महिलाओं के लाडली योजना के कार्ड बनाकर 1100 रुपये देने का आरोप लगा है. प्रवेश वर्मा ने पलटवार करते हुए अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को इससे सीखने की नसीहत देते हुए दो टूक कह दिया है कि अभी आचार संहिता नहीं लगी है. हम मदद करते रहेंगे. हमारे पास आया कोई भी निराश नहीं लौटेगा. आम आदमी पार्टी और प्रवेश वर्मा के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच सवाल ये भी उठ रहा है कि पूर्व सांसद आखिर सत्ताधारी दल के निशाने पर क्यों आ गए हैं?

AAP के निशाने पर प्रवेश वर्मा क्यों?

दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी से लेकर सांसद बांसुरी स्वराज तक, बीजेपी के कई नेता अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के खिलाफ हमलावर हैं. लेकिन आम आदमी पार्टी की रडार पर सिर्फ प्रवेश वर्मा नजर आ रहे हैं. इसके पीछे भी आम आदमी पार्टी की अपनी रणनीति, अपना गणित वजह बताया जा रहा है.

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दरअसल, यह तय माना जा रहा है कि बीजेपी किसी नेता को चेहरा बनाने की जगह कई राज्यों में सफल साबित हुए सामूहिक नेतृत्व के फॉर्मूले के साथ दिल्ली चुनाव में जाएगी. बीजेपी की रणनीति चुनाव को लोकल लीडरशिप की जगह सेंट्रल लीडरशिप, खासकर पीएम मोदी के चेहरे के इर्द-गिर्द केंद्रित रखने की होगी. दिल्ली में पार्टी के पास अरविंद केजरीवाल के कद का नेता नहीं होना भी इसके पीछे एक वजह बताई जा रही है.

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दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी की कोशिश है कि चुनाव लोकलाइज रहे. सत्ताधारी दल के नेता भी शायद यह समझ रहे हैं कि चुनावी लड़ाई केजरीवाल बनाम मोदी हुई तो सत्ता की राह मुश्किल हो सकती है. यही वजह है कि खुद पूर्व सीएम केजरीवाल ने भी विपक्षी बीजेपी को अपना चेहरा बताने की चुनौती दी थी. बीजेपी चेहरा घोषित करने से परहेज करेगी, इस तरह के संकेत थे ही कि प्रवेश वर्मा की ओर से लाडली योजना का कार्ड बनाकर महिलाओं को नकद राशि दिए जाने का मामला आ गया.

प्रवेश वर्मा के पिता साहिब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पूर्व सीएम के बेटे प्रवेश जाट चेहरा हैं और उनके नई दिल्ली विधानसभा सीट से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ने की चर्चा है. प्रवेश वर्मा खुद यह कह चुके हैं कि पार्टी नेतृत्व ने उनसे नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी करने के लिए कहा है. आम आदमी पार्टी के लिए प्रवेश वर्मा को निशाने पर लेने के लिए इतनी वजह भी काफी है कि वह उसके सबसे बड़े नेता के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं.

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प्रवेश वर्मा पर दांव लगा सकती है बीजेपी?

बीजेपी दिल्ली चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करके मैदान में उतरेगी, इसके आसार ना के बराबर ही हैं. अरविंद केजरीवाल और उनकी अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी प्रवेश वर्मा को बीजेपी का सीएम फेस बता रही है. ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या वाकई बीजेपी प्रवेश वर्मा पर दांव लगा सकती है? कुछ लोग इस तरह की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर रहे हैं तो कहा ये भी जा रहा है कि बीजेपी है, कुछ भी कर सकती है.

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प्रवेश वर्मा युवा चेहरा हैं और बीजेपी की इमेज ऐसी पार्टी की है जो भविष्य पर नजर रखकर चलती है. साहिब सिंह वर्मा की सियासी विरासत भी प्रवेश की दावेदारी के पक्ष में जाती है और एक से दूसरे राज्य का वोट गणित साधने की पार्टी की रणनीति में भी वह फिट बैठते हैं. प्रवेश वर्मा जाट समाज से आते हैं और अगर बीजेपी उनको सीएम फेस या सत्ता में आने पर सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करती है तो इसका हरियाणा, राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश तक पर पड़ेगा.

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जाट वोटर पिछले कुछ समय से बीजेपी से नाराज बताए जा रहे हैं. दिल्ली की सत्ता से 26 साल लंबा वनवास समाप्त कराने की कोशिश में जुटी बीजेपी जाट पॉलिटिक्स पर फोकस कर चल रही है और यही वजह है कि आम आदमी पार्टी की सरकार के ताकतवर मंत्री रहे कैलाश गहलोत जैसे जाट नेताओं को पार्टी में शामिल कराया गया.

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प्रवेश के चेहरे के जरिये जाट समाज को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश भी बीजेपी कर सकती है. दिल्ली की ही बात करें तो जाट समाज की आबादी करीब 10 फीसदी है और आठ सीटें ऐसी हैं, जहां जीत और हार तय करने में जाट मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. जाट समाज की आबादी बाहरी दिल्ली, खासकर दिल्ली देहात में अधिक है. जाट पॉलिटिक्स के साथ ही फायरब्रांड हिंदूवादी नेता की इमेज के साथ प्रवेश हिंदुत्व की राजनीति के सांचे में भी फिट बैठते हैं. देखना होगा कि सियासत में सरप्राइज करती आई बीजेपी क्या दिल्ली में भी प्रवेश को आगे कर सप्राइज करेगी?

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