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एक महीने में PM मोदी का तीसरा दौरा... विदर्भ में छिपा है महाराष्ट्र जीतने का ये फॉर्मूला

पीएम मोदी एक महीने के भीतर तीसरी बार महाराष्ट्र जा रहे हैं. पीएम विदर्भ रीजन के वर्धा से कई योजनाओं की शुरुआत करेंगे. पीएम का यह विदर्भ दौरा महाराष्ट्र चुनाव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पिछले चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन ने लीड ली थी लेकिन हालिया चुनाव में विपक्षी महा विकास अघाड़ी को अपरहैंड मिला था.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फाइल फोटो) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फाइल फोटो)
बिकेश तिवारी
  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:13 AM IST

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान भी नहीं हुआ है कि सूबे में सियासी तापमान बढ़ने लगा है. सत्ताधारी गठबंधन महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी में शामिल दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान चल रही है तो एक लड़ाई लोकसभा चुनाव के नैरेटिव को आगे बढ़ाने और काटने की भी चल रही है. नैरेटिव की इस लड़ाई का अखाड़ा बन गया है विदर्भ.

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महा विकास अघाड़ी (एमवीए) जहां विदर्भ में लोकसभा चुनाव नतीजों का ट्रेंड आगे लेकर जाने की कोशिश में है तो वहीं महायुति ने भी इस रीजन में अब अपने सबसे बड़े चेहरे को उतार दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक महीने के भीतर तीसरी बार महाराष्ट्र पहुंच रहे हैं. पीएम वर्धा और अमरावती में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे. पीएम वर्धा से आचार्य चाणक्य कौशल विकास योजना और अहिल्याबाई होल्कर महिला स्टार्टअप स्कीम की शुरुआत करने वाले हैं. वर्धा भी विदर्भ रीजन में ही आता है.

पीएम मोदी के बाद गृह मंत्री अमित शाह के विदर्भ दौरे का भी कार्यक्रम है. शाह नागपुर में बीजेपी के पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करेंगे. विदर्भ रीजन में बीजेपी के एक के बाद एक, दो शीर्ष नेताओं के दौरे और पार्टी की सक्रियता ने विपक्षी गठबंधन के कान खड़े कर दिए हैं. सवाल है कि पहले पीएम मोदी और फिर अमित शाह, बीजेपी चुनाव कार्यक्रम के ऐलान से पहले ही अपने बड़े नेताओं को विदर्भ में क्यों उतार रही है?

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लोकसभा चुनाव का ट्रेंड

बीजेपी के शीर्ष नेताओं के ताबड़तोड़ दौरों के पीछे लोकसभा चुनाव के ट्रेंड को भी एक बड़ी वजह बताया जा रहा है. विदर्भ रीजन में विधानसभा की 62 सीटें हैं. बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन को 2019 के विधानसभा चुनावों में 42 सीटों पर जीत मिली थी. तब विपक्षी महा विकास अघाड़ी के उम्मीदवार 15 सीटों पर विजयी रहे थे. लेकिन विधानसभा के लिहाज से हालिया लोकसभा चुनाव के नतीजे देखें तो बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन की लीड घटकर 22 विधानसभा सीटों तक रह गई थी. विपक्षी गठबंधन ने 35 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की थी.

गठबंधनों का बदला गणित

बीजेपी की चुनाव कार्यक्रम के ऐलान से पहले ही सक्रियता बढ़ाने के पीछे एक वजह गठबंधनों का बदला गणित भी है. पार्टी ने 2019 का चुनाव शिवसेना के साथ मिलकर लड़ा था. हालिया लोकसभा चुनाव में भी शिवसेना के साथ पार्टी का गठबंधन रहा लेकिन एकनाथ शिंदे की पार्टी. उद्धव ठाकरे के साथ ना होने से होने वाले नुकसान की भरपाई शिंदे और अजित पवार की पार्टी से करने का प्लान लोकसभा चुनाव में करीब-करीब फेल ही साबित हुआ.

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ऐसे में पार्टी इस झटके से उबर विधानसभा चुनाव में किसी भी मोर्चे पर कोई ढील नहीं छोड़ना चाहती और शायद यही वजह है कि पार्टी एक तरफ जहां पीएम मोदी को मैदान में उतार जनता के बीच माहौल बनाने की कोशिश में जुट गई है तो दूसरी तरफ अमित शाह जैसे कुशल संगठनकर्ता और रणनीतिकार को मोर्चे पर लाकर संगठन के पेच कसने में भी.  

विदर्भ ही सत्ता का निर्धारक

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों का भी मजबूत स्थान रहा है. सरकार चाहे जिसकी भी बने, उसकी धुरी इन दोनों पार्टियों में से ही कोई न कोई रहा है. महाराष्ट्र के सियासी ट्रेंड में एक तथ्य यह भी है कि ये दोनों ही दल पैन महाराष्ट्र समान पकड़ नहीं रखते और एक खास बेल्ट तक सीमित रहे हैं.

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शिवसेना मुंबई-ठाणे रीजन में मजबूत रही है तो वहीं एनसीपी का गढ़ पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा जैसे इलाके रहे हैं. सूबे की सत्ता पर कौन सी पार्टी काबिज होगी, इसका निर्णय विदर्भ के मतदाताओं का रुख ही करता है. इस रीजन में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होता आया है.

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विदर्भ प्रतिष्ठा से जुड़ा

बीजेपी के लिए विदर्भ किस तरह से प्रतिष्ठा से जुड़ा रीजन है, इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि जिस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहरा नाता है, उसका मुख्यालय नागपुर भी इसी रीजन में है. महाराष्ट्र में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे, पूर्व मुख्यमंत्री और शिंदे सरकार में डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस से लेकर पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तक, पार्टी के कई बड़े चेहरे इसी रीजन से आते हैं. महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले भी विदर्भ रीजन से ही आते हैं. ऐसे में अगर पार्टी इस रीजन में हार गई तो उससे किरकिरी होगी.

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