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ताहिर हुसैन की अर्जी पर बंटे SC के दो जज, जमानत पर अब 3 जजों की बेंच करेगी सुनवाई

Tahir Hussain Bail: ताहिर हुसैन की अंतरिम जमानत पर फैसला करने के लिए तीन सदस्यीय नई पीठ गठित होगा. इस पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना करेंगे. बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) ने ताहिर हुसैन को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मुस्तफाबाद सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है.

दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने खंडित फैसला सुनाया. (PTI Photo) दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने खंडित फैसला सुनाया. (PTI Photo)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 4:26 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को AAP के पूर्व पार्षद और दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन द्वारा विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका पर खंडित फैसला सुनाया. न्यायमूर्ति पंकज मिथल ने ताहिर हुसैन की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि अंतरिम जमानत का कोई मामला नहीं बनता है, जबकि न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा किया जा सकता है. इस तरह ताहिर हुसैन की अंतरिम जमानत पर फैसला करने के लिए तीन सदस्यीय नई पीठ गठित होगा. इस पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना करेंगे.

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बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) ने ताहिर हुसैन को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मुस्तफाबाद सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है. बता दें कि 24 फरवरी, 2020 को उत्तरपूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 53 लोग मारे गए और कई घायल हो गए. ताहिर हुसैन दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े एक मामले में आरोपी है. रविंदर कुमार ने 26 फरवरी, 2020 को दयालपुर पुलिस स्टेशन में अपने बेटे अंकित शर्मा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. अंकित का शव दंगा प्रभावित इलाके में खजूरी खास नाले से बरामद किया गया था. पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर चोट के 51 निशान मिले थे. 

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जस्टिस अमानुल्लाह का फैसला

जस्टिस अमानुल्लाह ने अपने फैसले में कहा, 'मैंने ताहिर हुसैन पर लगे आरोपों को देखा है, इसमें कोई शक नहीं कि वे गंभीर हैं. लेकिन फिलहाल ये सिर्फ आरोप हैं. उन्हें अन्य मामलों में जमानत मिल गई है. उनकी हिरासत की अवधि और अन्य मामलों में मिली जमानत को ध्यान में रखकर, मेरी राय है कि उन्हें अंतरिम जमानत दी जा सकती है.' जस्टिस अमानुल्लाह ने अपने फैसले में ताहिर हुसैन को 4 फरवरी तक अंतरिम जमानत दी और इसी दिन शाम को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने को कहा.

जस्टिस पंकज मिथल का फैसला

जस्टिस पंकज मिथल ने कहा, 'अंतरिम जमानत देने के लिए चुनाव लड़ने का अधिकार एक आधार के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है, यह तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है. यदि ऐसी याचिका उठाई जाती है तो पार्टी को नामांकन दाखिल करने की इजाजत होती है, लेकिन चुनाव लड़ने की नहीं. मौजूदा मामले में भी यही किया गया है. यदि चुनाव लड़ने के लिए अंतरिम जमानत की अनुमति दी जाती है तो इससे पैंडोरा बॉक्स खुल जाएगा. चूंकि देश में पूरे साल चुनाव होते हैं, इसलिए प्रत्येक विचाराधीन आरोपी यह दलील लेकर आएगा कि वह चुनाव में भाग लेना चाहता है और उसे इसकी अनुमति दी जानी चाहिए. इसलिए मेरा व्यक्तिगत मत है कि इस मामले में आरोपी को अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती है.' 

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जस्टिस मिथल ने कहा, 'याचिकाकर्ता अंतरिम जमानत मिलने के बाद इलाके में बैठक करेगा और मतदाताओं से घर-घर जाकर मुलाकात करेगा. गौरतलब है कि घटना एक ही इलाके में हुई थी और गवाह भी एक ही इलाके के हैं. यदि आरोपी को उस इलाके में स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति दी जाती है तो गवाहों के साथ छेड़छाड़ की संभावना अधिक होती है. इस मामले में आरोपपत्र भी दायर किया गया है, जिसमें अपराध को अंजाम देने में याचिकाकर्ता की भूमिका को काफी हद तक उजागर किया गया है. यह स्पष्ट है कि आरोप न केवल गंभीर हैं बल्कि आरोपी के कार्यालय/घर का इस्तेमाल अपराध को अंजाम देने के लिए किया गया था.' सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- 'चूंकि मामले में बंटा हुआ फैसला आया है, इसलिए निर्णय के लिए तीन न्यायाधीशों की बड़ी पीठ का गठन किया जाएगा.'

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