
महाराष्ट्र में मुस्लिम आरक्षण को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक विवाद के बीच, कांग्रेस नेता और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि इस मुद्दे को महा विकास अघाड़ी (MVA) के सरकार बनने के बाद हल किया जाएगा. उन्होंने तेलंगाना में मुस्लिम आरक्षण को एक उदाहरण के रूप में पेश करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी है कि वह गरीब और जरूरतमंदों को न्याय दिलाए.
रेड्डी का यह बयान महाराष्ट्र चुनाव में मुस्लिम आरक्षण को लेकर बढ़ते विवाद के बीच आया है, जहां भाजपा नेता मुस्लिम आरक्षण के खिलाफ खड़े हैं, जिसे 2021 में रद्द कर दिया गया था.
क्या बोले रेवंत रेड्डी...
रेवंत रेड्डी ने कहा, 'महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद हम इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे. तेलंगाना में पहले 5 प्रतिशत आरक्षण था, लेकिन यह 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन कर गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया.' उन्होंने कहा, 'तेलंगाना में हमने 11,000 शिक्षकों की भर्ती की, जिसमें से 720 मुस्लिमों को आरक्षण के तहत नियुक्त किया गया. जो गरीब हैं और जिन्हें जरूरत है, उनके लिए न्याय करना कांग्रेस की जिम्मेदारी है.'
अमित शाह ने लगाया ये आरोप
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में महाराष्ट्र में एक चुनावी रैली में आरोप लगाया था कि मुस्लिम स्कॉलर्स के एक समूह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की थी और राज्य में मुस्लिमों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग की थी. शाह का दावा था कि कांग्रेस ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है.
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शाह ने कहा, "अगर मुसलमानों को आरक्षण दिया जाता है, तो SC, ST और OBC के आरक्षण को घटाना पड़ेगा. राहुल बाबा, न सिर्फ आप, बल्कि आपकी चार पीढ़ियाँ भी एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण में कटौती नहीं कर सकतीं और उसे मुसलमानों को दे सकतीं."
हालांकि, महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने शाह के इस दावे को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, "हम (MVA) चुनावी मुद्दों पर लड़ाई लड़ रहे हैं और हिंदू-मुसलमान के झूठे नैरेटिव में नहीं फंसेंगे." बता दें कि महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए 20 नवंबर को वोटिंग होनी है. नतीजे 23 नवंबर को आएंगे.