
बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं. ममता बनर्जी ने फिर जीत का परचम लहरा दिया है. जीत भी ऐसी मिली है कि साफ हो गया है कि बंगाल की धरती पर ममता का दबदबा है और चुनाव के समय भी सिर्फ वहीं 'खेला' कर रही थीं. खेला होबे का नारा जरूर बीजेपी को चुनौती देने के लिए दिया गया, लेकिन असल में सारा खेल ममता बनर्जी ने पहले ही सेट कर दिया था. पहले से एक ऐसी सधी हुई रणनीति तैयार थी जिसमें बीजेपी फंसती गई और देखते ही देखते तृणमूल ने फिर अपनी सरकार बना ली.
राहुल गांधी वाली 'गलती' पीएम मोदी ने कर दी
बीजेपी की इस करारी हार के कई कारण हो सकते हैं. आंकड़े बताते हैं कि सभी मुसलमानों ने ममता को वोट दिया था, ये भी पता चला है कि हिंदुओं का भी सारा वोट बीजेपी को नहीं मिला. लेकिन ये तो चुनावी समीकरण हैं जो हर चरण के साथ बदलते गए और ममता बनर्जी की स्थिति मजबूत हो गई. सवाल तो ये है कि बीजेपी ने क्या गलती कर दी? 200 पार का सपना देखने वाली पार्टी 100 से नीचे से कैसे आ गई? जवाब काफी सरल है. बंगाल के चुनाव में बीजेपी के सबसे बड़े स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी चूक कर दी. ये एक ऐसी चूक है जो लंबे टाइम से लगातार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी करते आ रहे हैं- किसी बड़े नेता पर निजी हमले करने वाली गलती.
बंगाल चुनाव में बीजेपी के प्रचार पर एक नजर डालिए और समझ आ जाएगा कि उनके लिए सारा खेल कहा बिगड़ गया. आप किसी नेता को एक बार अपने निशाने पर ले सकते हैं, दो बार ले सकते हैं, लेकिन पूरे भाषण में सिर्फ उन्हीं पर अपना फोकस रखना एक बड़ी गलती है. बीजेपी ने यहीं किया और ममता की लहर ने उन्हें साफ कर दिया.
जब-जब राहुल गांधी का निजी हमला, पीएम मोदी को फायदा
अब पीएम मोदी के लिए ये राहुल गांधी वाली गलती इसलिए है क्योंकि अभी तक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भी ये नहीं समझ पाएं हैं कि मोदी पर सीधा हमला करना कई मामलों में उनकी पार्टी के लिए ही घातक साबित होता है. 2019 के लोकसभा चुनाव का ही उदाहरण ले लीजिए, राहुल गांधी ने लगातार बोला- चौकीदार चोर है. हर रैली में इस नारे का इस्तेमाल किया, वहां खड़ी भीड़ से यहीं बुलवाया. लेकिन असर क्या हुआ, भारत का एक बड़ा तबका नाराज हुआ, उन्हें लगा कि बीजेपी गलती कर सकती है, लेकिन सीधे मोदी को चोर कहना ठीक नहीं है. ऐसे में राहुल ने जितनी बार चोर बोला, उतनी ही बार मोदी और बीजेपी के पक्ष में माहौल बनता रहा और कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ गई.
2019 से थोड़ा आगे बढ़े तो दिल्ली का विधानसभा चुनाव याद आता है. वहां पर वैसे तो दोनों बीजेपी और कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ, लेकिन राहुल गांधी ने अपना अंदाज नहीं बदला. चुनाव विधानसभा का था लेकिन निशाना सिर्फ मोदी पर था. एक रैली में तो राहुल कह गए- 6 महीने बाद देश के युवा रोजगार को लेकर मोदी को डंडे से मारेंगे.' देश के प्रधानमंत्री को लेकर ये बयान दिया गया. अजीब लग सकता है लेकिन हैरानी नहीं, राहुल गांधी ने मोदी विरोध को ही अपनी राजनीति बना लिया है.
पीएम मोदी ने सिर्फ ममता को चुनावी मुद्दा बनाया?
राहुल की इस राजनीति पर बीजेपी ने कई बार चुटकी ली है, खुद मोदी ने इसका चुनाव के दौरान काफी फायदा उठाया है. लेकिन बंगाल चुनाव में सब उल्टा पड़ गया. राहुल गांधी वाला स्टाइल पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने अपनाया और 'दीदी' पर खूब हमले किए. ये हमले भी इतने तीखे थे कि किसी कट्टर टीएमसी समर्थक को आग बबूला कर जाएं. जरा इस स्टाइल के कुछ सबूत दिखा देते हैं.
सबूत नंबर 1- कोच बिहार में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा- दीदी आपका गुस्सा, आपनी वाणी देख तो एक बच्चा भी कह सकता है कि आप चुनाव हार गई हैं. हालत ये हो गई है कि आपको खुद ही कहना पड़ता है कि आप नंदीग्राम जीत रही हैं. लेकिन जब से आपने नंदीग्राम में खेला किया है, पूरा देश मान चुका है कि ये चुनाव तो आपके हाथ से निकल लिया. भगवान से पूछने की कोई जरूरत नहीं.
सबूत नंबर 2- बंगाल के बारासात में सीधे ममता बनर्जी पर हमला करते हुए पीएम कह गए- दीदी ने कभी एक बार भी कहा कि वो हिंसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगी. दीदी को तो बस हर कीमत पर सत्ता में आना है. अब वो तो अपने समर्थकों को भड़का रही हैं. कोई भी मुख्यमंत्री ऐसी भाषा कैसे बोल सकता है. वो यहां पर हिंसा और अशांति फैलाना चाहती हैं. दीदी आपकी साजिश जनता समझ चुकी है.
सबूत नंबर 3- कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में ममता पर तंज कसते हुए पीएम ने बोला था- मैं दीदी को बरसों से जानता हूं. आज वो पुरानी वाली दीदी नहीं रह गई हैं. उनका खुद पर कोई बस नहीं. उनका रिमोट कंट्रोल तो किसी और के हाथ में है. आपको दीदी के रूप चुना लेकिन आप भतीजे की बुआ बन रह गईं. उसी का लालाच पूरा करने में रहीं.
अब ये तो बस कुछ उदाहरण हैं जहां पर चुनावी मुद्दों को छोड़ सीधे ममता बनर्जी पर निशाना साधा गया, वो लिस्ट तो काफी लंबी है जहां पर बीजेपी के तमाम नेताओं ने सिर्फ ममता के खिलाफ बोला और उन्हें ही सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की. 2014 में राहुल गांधी के लिए पीएम मोदी का शहजादा बोलना कनेक्ट कर गया, बाद में 'राहुल बाबा' भी खूब ट्रेंड किया, लेकिन ममता के लिए 'दीदी...ओ दीदी' बोलना उल्टा पड़ गया. टीएमसी ने तो इसे मुद्दा बनाया ही, साथ ही साथ महिलाओं का भी अपमान बता दिया. नतीजा ये रहा कि बड़ी संख्या में महिला वोटरों ने दीदी को वोट कर दिया.
'दीदी' की लोकप्रियता को कम आंक गए मोदी
यहां पर समझने वाली बात ये है कि ममता बनर्जी एक मजबूत स्थानीय नेता हैं, दो बार एक राज्य की सीएम रह चुकी हैं और तीसरी बार भी बनने जा रही हैं. उनके लिए कहा जाता है कि वे जमीन से जुड़ी हुई नेता हैं. उन्हें हर कोई 'फाइटर' के रूप में जानता है. ऐसे में उनको लेकर निजी हमला करना उनकी लोकप्रियता का मजाक बनाने जैसा है, और जब-जब ऐसा होता है बंगाल की जनता दीदी के पीछे मजबूती से खड़ी हो जाती है और वो लहर हर विरोधी को धूल चटाने के लिए काफी रहती है. इस बार बीजेपी के साथ भी यहीं खेला हुआ है.