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TMC का डैमेज कंट्रोल, पार्टी में बने रहेंगे शुभेंदु अधिकारी, बीजेपी में जाने की थीं अटकलें

कोलकाता में टीएमसी के नेता और सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात हुई. दोनों नेताओं की मुलाकात प्रशांत किशोर के दखल के बाद हुई.

शुभेंदु अधिकारी ( फाइल फोटो) शुभेंदु अधिकारी ( फाइल फोटो)
इंद्रजीत कुंडू
  • कोलकाता,
  • 01 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:55 PM IST
  • टीएमसी में बने रहेंगे शुभेंदु अधिकारी
  • मंत्री पद से दे चुके हैं इस्तीफा
  • बीजेपी में जाने की थी अटकलें

पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस को राहत मिली है. हाल ही में मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले शुभेंदु अधिकारी को मनाने में पार्टी सफल रही है. उन्होंने पार्टी में बने रहने का फैसला लिया है. टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी टीएमसी में बने रहेंगे. सभी विवाद सुलझा लिए गए हैं. बता दें कि शुभेंदु अधिकारी के मंत्री पद से इस्तीफे देने के बाद उनकी बीजेपी में जाने की अटकलें लग रही थीं.

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इससे पहले कोलकाता में टीएमसी के नेता और सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात हुई. दोनों नेताओं की मुलाकात प्रशांत किशोर के दखल के बाद हुई. बता दें कि प्रशांत किशोर पार्टी के सलाहाकार हैं. बैठक में सौगत रॉय और सुदीप बंदोपाध्याय भी शामिल थे. ये बैठक करीब दो घंटे तक चली. 

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सौगत रॉय ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी बीजेपी में नहीं जा रहे हैं. प्रशांत किशोर, सुदीप बंदोपाध्याय और अभिषेक बनर्जी के साथ उनकी आज बैठक हुई और चीजों को सुलझा लिया गया है. वो टीएमसी के साथ हैं और हम ममता बनर्जी को फिर से जिताने के लिए मिलकर काम करेंगे.

बता दें कि शुभेंदु अधिकारी ने बीते शुक्रवार को पर्यटन मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था. वह पहले ही हुगली रिवर ब्रिज कमीशन (HRBC) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके थे. शुभेंदु अधिकारी के टीएमसी छोड़कर बीजेपी में जाने की अटकलें तेज थीं. मंत्री पद छोड़ने के बाद वह बतौर विधायक ममता की पार्टी के साथ बने रहेंगे.

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शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को मंत्री पद छोड़ने से पहले गुरुवार को हुगली रिवर ब्रिज कमीशन के अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया था. सांसद के तौर पर लो-प्रोफाइल रहे शुभेंदु अधिकारी अपने सांगठनिक कौशल की वजह से टीएमसी में एक वैकल्पिक पावर सेंटर के तौर पर उभरे. दो बार सांसद रहे शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम आंदोलन के दौरान सुर्खियों में आए थे.


 

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