Advertisement

बंगाल: शाह के बाद ममता बनर्जी की नजर आदिवासी समुदाय पर, बांकुड़ा में डाला डेरा

पश्चिम बंगाल में कमल खिलाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस महीने के शुरू में ही दो दिवसीय बंगाल दौरे की शुरुआत आदिवासियों के गढ़ बांकुड़ा जिले से की थी. शाह के दौरे के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी आदिवासियों को साधने के लिए बांकुड़ा पहुंची हुई हैं. ऐसे में देखना है कि आदिवासी समुदाय किस पर अपना भरोसा जताता है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 24 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:51 AM IST
  • पश्चिम बंगाल में टीएमसी और बीजेपी में घमासान
  • बंगाल के आदिवासी वोटरों को साधने में जुटे दल
  • ममता बनर्जी चार दिन के बांकुड़ा दौरे पर पहुंची हैं

पश्चिम बंगाल में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. बंगाल के आदिवासी समुदाय पर बीजेपी और टीएमसी दोनों की नजर है. बंगाल में कमल खिलाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस महीने के शुरू में ही दो दिवसीय बंगाल दौरे की शुरुआत आदिवासियों के गढ़ बांकुड़ा जिले से की थी. शाह के दौरे के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी आदिवासियों को साधने के लिए बांकुड़ा पहुंची हुई हैं. .

Advertisement

सोमवार को बांकुड़ा के खत्रा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आदिवासी वोटरों को टीएमसी के पाले में लाने के लिए कई वादे किए और बड़ी घोषणाएं की हैं. ममता ने इस दौरान बिरसा मुंडा की जयंती (15 नवंबर) पर अगले साल से राज्य में सरकारी छुट्टी का ऐलान कर सियासी समीकरण साधने का दांव चला है. यही नहीं ममता ने अमित शाह की बांकुड़ा यात्रा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक आदिवासी के घर उनका भोजन करना सिर्फ चुनावी स्टंट था. 

देखें: आजतक LIVE TV 

ममता बनर्जी ने कहा कि समाज के विशिष्ट लोगों का सम्मान और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों का विकास उनकी सरकार दिल से करती है. उन्होंने कहा कि बांकुड़ा में 32 हजार प्रवासी मजदूरों को काम मिला. आदिवासी परिवारों से वादा किया कि जिनके पास घर नहीं है उन्हें पक्के मकान दिए जाएंगे. बंगाल में सरकार बनते ही मुफ्त राशन की अवधि को भी आगे बढ़ाएंगे. हम आदिवासी लोगों का बेहतर तरीके से ख्याल रख रहे हैं. 

Advertisement

बता दें कि अमित शाह हाल ही में दो दिनों के बंगाल दौरे पर आए थे. अपने दौरे की शुरुआत बांकुड़ा के चतुरडीही गांव से करते हुए शाह ने आदिवासी विभीषण हांसदा के घर में खाना भी खाया था. साथ ही उन्होंने बंगाल में अपने दौरे के दौरान आदिवासियों का बड़ा चेहरा रहे बिरसा मुंडा की मूर्ति का शिलान्यास किया था. 

बंगाल में आदिवासी वोटर की भूमिका

बिरसा मुंडा को पश्चिम बंगाल में आदिवासी समुदाय के लोग भगवान की तरह पूजते है. यही वजह है कि अमित शाह से लेकर ममता बनर्जी तक ने बिरसा मुंडा के जरिए बंगाल के आदिवासी समाज को साधने का दांव चला है. इस तरह से बीजेपी और टीएमसी दोनों की नजर आदिवासी समुदाय के वोट बैंक पर है, जो कुल आबादी का लगभग 11 फीसदी है. बंगाल चुनाव में जीत हासिल करने के लिए दलित, आदिवासी, अनुसूचित जाति, जनजातियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है. 

बता दें कि आदिवासी क्षेत्र में 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी का प्रदर्शन टीएमसी से काफी बेहतर रहा था. टीएमसी को जंगलमहल और नॉर्थ बंगाल में राजनीतिक तौर पर काफी नुकसान हुआ था. इस इलाके में आदिवासियों की संख्या ज्‍यादा है. पश्चिमी और उत्‍तर बंगाल में आदिवासियों ने बीजेपी के समर्थन में जमकर वोट किया था. 

Advertisement

पश्चिम बंगाल में सुरक्षित 10 सीटों में से महज 4 सीटें ही टीएमसी जीत सकी थी, जबकि छह सीटें बीजेपी के खाते में गई थीं. लोकसभा चुनाव के परिणाम से ही स्पष्ट हो गया था कि साल 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला होगा. एक दशक पहले जो बीजेपी राज्य की राजनीति में हाशिए पर थी वो अब नंबर दो की पार्टी बन गई है और अब एन नंबर की पार्टी बनना चाहती है. वहीं, अब ममता बनर्जी भी आदिवासियों के बीच पहुंचकर अपने सियासी समीकरण को मजबूत करने में जुट गई हैं. ऐसे में देखना है कि इस बार के चुनाव में आदिवासियों का दिल कौन जीत पाता है. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement