
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के सातवें चरण की वोटिंग शुरू हो गई है. इस फेज में 36 सीटों पर मतदान होना था, लेकिन कोरोना के चलते जंगीपुर व शमशेरगंज सीटों पर एक-एक प्रत्याशी के निधन हो जाने के चलते अब 34 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. यहां कुल 268 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें 37 महिलाएं शामिल हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर सीट पर मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय सहित कई दिग्गज नेताओं की साख दांव पर लगी है. ममता के मंत्रियों सहित बीजेपी और लेफ्ट के हाई प्रोफाइल नेताओं की किस्मत का फैसला मतदाता करेंगे.
बंगाल के सातवें चरण में जिन 34 सीटों पर मतदान हो रहा है, वे 5 जिलों में फैली हुई हैं. इनमें दक्षिण दिनापुर और मालदा जिले की 6-6, मुर्शिदाबाद की 9, कोलकाता की 4 और बर्दवान की 9 विधानसभा सीटें शामिल हैं. 2016 के चुनावी नतीजों को देखते हैं तो उनमें से सिर्फ 12 सीट टीएमसी के पास है जबकि बाकी 22 सीटें संयुक्त मोर्चा (कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन) के कब्जे में हैं. इस तरह से यह चरण कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ममता की सीट पर इस बार घमासान
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर की सीटों पर सभी की निगाहें लगी हुई है. यह सीट ममता की परंपरागत सीट रही है, वो यहीं से जीतकर बंगाल की सत्ता की कमान 10 साल से संभाल रही हैं. हालांकि, इस बार ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट को छोड़कर नंदीग्राम से चुनावी मैदान में उतरी हैं. ऐसे में उन्होंने अपनी पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल सोवनदेब चट्टोपाध्याय को भवानीपुर से उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी ने अभिनेता से नेता बने रुद्रनील घोष को इस सीट से खड़ा किया है. इस तरह से ममता की इस सीट पर कौन सियासी बाजी मारेगा?
दो स्टार आमने-सामने
पश्चिमी बर्दवान जिला में आसनसोल के इंडस्ट्रियल बेल्ट क्षेत्र अर्थात शिल्पांचल की आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट पर इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस के बीच दिलचस्प मुकाबला है. बीजेपी के टिकट पर मशहूर फैशन डिजाइनर अग्निमित्रा पाल चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रही हैं तो टीएमसी से अभिनेत्री सायोनी घोष ताल ठोंक रही है. इस तरह से दो स्टार के बीच आमने-सामने की लड़ाई, लेकिन माकपा ने प्रशांत घोष को मैदान में उतारकर त्रिकोणीय बना दिया है.
कोलकाता पोर्ट और बालीगंज में त्रिकोणीय लड़ाई
कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट पर काफी रोचक मुकाबला है. यहां ममता के मंत्री और शहर के महापौर रहे फरहाद हकीम के सामने बीजेपी से अवध किशोर गुप्ता और कांग्रेस के मोहम्मद मुख्तार किस्मत आजमा रहे हैं. इस तरह कोलकोता पोर्ट सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है. हालांकि, 10 साल से टीएमसी का कब्जा है.
बल्लीगंज विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल बेहद महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों में से एक है. इस विधानसभा सीट से मौजूदा टीएमसी विधायक सुब्रत मुखर्जी एक बार फिर से चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रही है, जिनके सामने बीजेपी से लोकनाथ चटर्जी मैदान और लेफ्ट से डॉ फवाद हलीम ताल ठोक रहे हैं.
अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिड़ी
बेलूरघाट विधानसभा सीट पर सभी की निगाहें लगी हुई है. इस सीट पर जाने-माने अर्थशास्त्री अशोक कुमार लाहिड़ी बीजेपी के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं, जिनके खिलाफ टीएमसी से शेखर दास गुप्ता और लेफ्ट गठबंधन के तहत आरएसपी से सुचेता बिश्वास मैदान में है. 2016 में आरएसपी से बिस्वनाथ चौधरी ने बहुत मामूली वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार पार्टी ने अपने मौजूदा विधायक का टिकट काट दिया है.
पांडेश्वर विधानसभा सीट पर सभी की नजर है, क्योंकि आसनसोल के पूर्व मेयर जीतेंद्र तिवारी टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनावी मैदान में उतरे हैं. इस सीट पर टीएमसी अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए नरेंद्रनाथ चक्रबर्ती को उतारा है जबकि लेफ्ट ने सुभाष बाउरी को उतारा है. 2016 में जीतेंद्र तिवारी ने टीएमसी से जीत दर्ज की थी, लेकिन अब वो बीजेपी के कमल खिलाने की कवायद में है.
आइशी घोष बचा पाएंगी माकपा का किला
पश्चिम बर्धवान जिले की जमुरिया सीट से जेएनयू की छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष को माकपा के टिकट पर चुनावी समर में किस्मत आजमा रही है, जिनके खिलाफ बीजेपी से तपश रॉय और टीएमसी से बर्धमान हरेराम सिंह ताल ठोक रहे हैं. 2016 में सीपीएम से जहांनारा खान ने जीत दर्ज की थी. ऐसे में देखना है कि लेफ्ट अपना किला बचा पाएगा?
इसके अलावा माकपा के आभास राय चौधरी और कांग्रेस के मइनुल हक और आबू हेना जैसे नेताओं की किस्मत का फैसला भी इसी सातवें चरण में होना है. मालदा, चंचल, हरिश्चंद्रपुर, लालगोला, मुर्शिदाबाद और फरक्का सीट पर भी लोगों नजर लगी हुई है. ऐसे में देखना है कि सातवें चरण में उतरे दिग्गजों में कौन अपनी साख बचाता है और कौन गवांता है.