फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस की जांच अब सीबीआई के हवाले हो गई है. इस मामले में सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है. इस साल के आखिर में बिहार में चुनाव से पहले सभी दल इसपर जमकर बयानबाजी भी कर रहे हैं. कोई धरना दे रहा है तो कोई न्याय की मांग के लिए महाराष्ट्र के नेताओं और पुलिस के खिलाफ कोर्ट जा रहा है. आखिर बिहार चुनाव में सुशांत का केस राजनीतिक दलों के लिए इतना जरूरी क्यों हो गया है?
बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत मूलरूप से बिहार से थे. बॉलीवुड में सफल अभिनेता थे और ऐसे में बिहार के युवा उन्हें रोल मॉडल के रूप में देखते थे. सुशांत केस में मुंबई पुलिस की जांच की धीमी रफ्तार को लेकर बिहार के लोगों में रोष है और बिहार के बेटे को न्याय दिलाने की मांग तेज हुई.
इसलिए बिहार में सभी दल इस मामले में न्याय की आवाज उठाकर सियासी रूप से खुद को जोड़ने की कोशिश में हैं. पहले आरजेडी ने सीबीआई जांच की मांग उठाई, फिर सीबीआई जांच की सिफारिश कर नीतीश सरकार भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. अब जाकर इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है.
अगर राजनीतिक तौर पर देखें तो सुशांत राजपूत बिरादरी से आते थे, मतलब राज्य की साढे पांच फीसदी आबादी सीधे-सीधे इसी बहाने कनेक्ट हो जाएगी. यही कारण है कि बाढ़ और कोरोना संकट के बीच भी बिहार चुनाव में सुशांत केस इतना अहम हो गया है. तेजस्वी यादव भी जोर शोर से सुशांत केस को लेकर बयान दे रहे हैं.
इसके अलावा सुशांत सिंह राजपूत केस को लेकर पार्टियों के जोर देने के पीछे कारण युवा वोटर भी है. बिहार में युवा वोटरों की आबादी अच्छी खासी है. सुशांत युवाओं में काफी लोकप्रिय भी थे. राज्य में 18 से 29 साल के एज ग्रुप के ही 24 प्रतिशत वोटर हैं.
बिहार में कई धड़े सुशांत केस को लेकर अलग राय भी रखते हैं. बिहार में इस वक्त बाढ़ और कोरोना संकट के कारण बिहार सरकार की काफी किरकिरी हुई है, ऐसे में नीतीश सरकार की ओर से भी इस मोर्चे पर अधिक जोर लगाया जा रहा है. अब देखना होगा कि युवा वोटरों को रिझा पाने में कौन सी पार्टी सफल रहती है.