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Buxar: कथकौली मैदान पर हारे थे भारतीय राजा, अंग्रेजों ने चार राज्यों पर कर लिया था कब्जा

पुष्पेंद्र पांडेय
  • 30 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 3:44 PM IST
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हिंदुस्तान का इतिहास वैसे तो अपने जहन में कई घटनाओं को समेटे हुए है. लेकिन उनमें से बक्सर के कथकौली मैदान में 1764 में हुआ पहला युद्ध बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. कहा जाता है कि इस युद्ध ने भारतीय भूगोल को बदल दिया. इस हार के बाद भारतीय राजाओं को भी समझ आ गया था, कि एकता में कितनी शक्ति है. (इनपुट- पुष्पेंद्र पांडे)

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ये बात है 17वीं शताब्दी की, जब देश में क्लाइव की हड़प नीति चल रही थी और मुगल कमजोर पड़ चुके थे. देश छोटे छोटे राजाओं के सहारे आगे बढ़ रहा था. अंग्रेजी सत्ता लॉर्ड क्लाइव की हड़प नीति के सहारे भारत मे अपने पैर जमाने के लिये आतुर थी. ऐसे में भारतीय राजाओं के सामने परिस्थितियों तब और गंभीर हो गई, जब प्लासी के युद्ध में मीर जाफर को कारारी हाल मिली. 

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इस हार के बाद भारतीय राजाओं को समझ आ गया, कि अंग्रेजी हुकूमत से टकराने के लिए एकता बेहद जरूरी है.  इसके बाद अवध के नवाब शुजाउदौला, बंगाल के नवाब मीर कासिम तथा मुगल सम्राट साह आलम ने अंग्रेजी हुकूमत को हराने के लिए
हाथ मिला लिया. 

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इतिहासकार गोबिंद नाथ पांडे ने बताया कि ये लिखा नहीं गया, लेकिन अगर गौर से देखें तो कथकौली का युद्ध हिंदुस्तान को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी दिलाने के लिए पहला स्वतंत्रता संग्राम था, जिसमें जनता नहीं थी लेकिन दमनकारी अंग्रेजी हुकूमत से जनता को बचाने के लिए भारत के राजा एक साथ पहली बार किसी विदेशी ताकत से लोहा लेने के लिये एकजुट हुए. युद्ध तय था, लेकिन तैयारी करनी बाकी थी. 

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मुगल तोपें, अवध की अश्व शक्ति और बंगाल सेना मिल गईं. तीनों राज्यों को मिलाकर 40 हजार सैनिक, 140 तोपें, 1600 हाथी और घोड़ों की शक्ति एकजुट हुई. वहीं दूसरी तरफ लार्ड क्लाइव का सबसे तेज तर्रार सेना नायक मेजर हेक्टर मुनरो इन भारतीय राजाओ को रोकने के लिए 7 हजार 720 सेना और 30 तोपों के साथ तेजी से बढ़ते हुए बिहार में बक्सर जिले के कथकौली मैदान पहुंच गया. इधर तीनों राजाओ की सेना मुगल सेनापति मिर्जा नजीब खां बलूच के नेतृत्व में बक्सर पहुंच गईं और 22 अक्टूबर 1764 के दिन कथकौली के मैदान में भीषण युद्ध आरम्भ हो गया.

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इतिहासकर गोविंद बताते हैं कि ये युद्ध तीन दिनों तक चला. तीनों राजाओं की सेना बड़ी थी, तोपों की संख्या भी अंग्रेजों से ज्यादा थी, लेकिन हाथियों ने काम बिगाड़ दिया. तोपों के करण हाथी बिदक गए और तीनों राजाओं की हार हो गई. इस हार ने हिंदुस्तान के भविष्य पर अंग्रेजी हुकूमत का ठप्पा लगा दिया. अंग्रेजों ने एक ही बार मे हिंदुस्तान के नक्शे को बदल कर बिहार, उड़ीसा, झारखंड, बंगाल के साथ ही बांग्लादेश भी हासिल कर लिया. इतिहास के पन्नो में बक्सर की जंग भारत का भूगोल बदल देती है.

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तीनों राजाओं को मिली करारी हार के बाद अंग्रेजी हुकूमत का अब कोई विरोध करने वाला नहीं रहा. ऐसे में ये कहा जा सकता है कि बक्सर के कथकौली में मिली हार के बाद हिंदुस्तान ने गुलामी की तरफ कदम बढ़ा दिए थे.

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