कोविड -19 महामारी के दौर में सरकार द्वारा गरीबों को राहत देने के लिए हर माह दिये जाने वाला पांच किलो गेहूं अब सड़ा-गला मिलेगा. रक्सौल के रेलवे माल गोदाम का नजारा देखकर साफ हो रहा है कि किस तरह सरकार की इस योजना को ग्रहण लगाया जा रहा है. दरअसल रेलवे माल गोदाम पर रखी 24.3 टन की गेहूं की रैक जो एफसीआई में भेजी जाएगी, वो बारिश में भीग रही है. इस मामले में जवाब देने वाला कोई नहीं है. (रिपोर्टः गणेश शंकर)
गरीबों को मिलता है पांच किलो गेहूं
सरकार द्वारा गरीब परिवारों को हर माह पांच किलो गेहूं दिया जाता है, जो देश के विभिन्न राज्यों से लाकर रक्सौल रेलवे माल गोदाम पर एकत्र किया गया है. रेलवे माल गोदाम से ये गेहूं एफसीआई पहुंचेगा, जहां से विभिन्न डीलरों के पास जाएगा, जहां से गरीब परिवारों के लिए इसकी सप्लाई होगी.
ठेकेदार की लापरवाही
बिहार में लगातार बारिश हो रही है, इस बीच 24.3 टन गेहूं की एक रैक रक्सौल रेलवे माल गोदाम लाई गई है. बारिश से बचाव की व्यवस्था न होने के कारण ये गेहूं भीग गया है. वहीं ठेकेदार द्वारा भी इस भीगे गेहूं को तेजी से सरकारी बोरों में भरवाकर गंतव्य की ओर पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया है. बोरों में भरा भीगा गेहूं कब तक सुरक्षित रहेगा. वहीं जो गेहूं खराब हो गया है, उसे भी ठेकेदार द्वारा अलग नहीं कराया जा रहा, बल्कि बोरों में भरवाया जा रहा है.
ये बोले जिम्मेदार
जब इस मामले में रक्सौल स्टेशन मास्टर अनिल कुमार व स्टेशन अधीक्षक माल गोदाम प्रबोध कुमार से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि रेलवे द्वारा माल के लिए जगह दी गई है. ढुलाई की जवाबदेही ठेकेदार की है.
प्रशासन का कहना है कि अचानक वर्षा हुई तो इसमें हम क्या कर सकते हैं. वहीं सच्चाई ये है कि रेलवे माल गोदाम की छत कई जगह टूटी हुई है, जिसकी वजह से गोदाम में रखा कोई सामान सुरक्षित नहीं रह सकता.