
बिहार में चुनावी बिसात बिछ चुकी है. तीन चरणों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण में 7 नवंबर को जिन विधानसभा सीटों के लिए मतदान होना है, उन सीटों की सूची में मुजफ्फरपुर जिले की औराई विधानसभा सीट भी है. औराई विधानसभा सीट राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के कब्जे में है. यह वही सीट है, जिसका प्रतिनिधित्व हिंदी के नामचीन साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी भी कर चुके हैं.
रामवृक्ष बेनीपुरी इस सीट से साल 1957 से 1962 तक औराई सीट से ही विधायक रहे थे. फिलहाल इस सीट पर आरजेडी का कब्जा है. आरजेडी ने 2015 के चुनाव में सुरेंद्र कुमार को चुनाव मैदान में उतारा था. आरजेडी उम्मीदवार सुरेंद्र कुमार ने अपने प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राम सूरत राय को हराया था. आरजेडी उम्मीदवार सुरेंद्र को 66 हजार 958 वोट मिले थे. वहीं, बीजेपी के राम सूरत को 56 हजार 133 वोट मिले थे. तब 15 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे थे.
आरजेडी ने अपने विधायक सुरेंद्र कुमार का टिकट काटकर यह सीट माले को दे दी थी. सुरेंद्र कुमार बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं. बीजेपी ने इस बार भी राम सूरत को ही टिकट दिया है. प्लूरल्स पार्टी ने इस सीट से रितेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट के लिए 7 नवंबर को हुए मतदान में 55.64 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था.
2010 में हारी थी आरजेडी
साल 2010 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के सुरेंद्र कुमार को शिकस्त झेलनी पड़ी थी. तब सुरेंद्र को भाजपा के राम सूरत राय ने करीब 12 हजार वोट से हराया था. तब राम सूरत को 38 हजार 422 वोट मिले थे. वहीं, सुरेंद्र 26 हजार 681 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे. औराई विधानसभा सीट से कांग्रेस के मथुरा प्रसाद सिंह विधायक चुने गए थे.
गणेश ने लगाया था जीत का छक्का
1957 में रामवृक्ष बेनीपुरी, तो 1962 में बतौर निर्दलीय पांडव राय विधायक बने. पांडव राय के बाद उनके बेटे गणेश प्रसाद यादव साल 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए थे. गणेश प्रसाद यादव ने बिहार विधानसभा में औराई विधानसभा क्षेत्र का छह बार प्रतिनिधित्व किया. गणेश प्रसाद का विजय रथ साल 2005 के चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अर्जुन राय ने रोका.
कड़े मुकाबले की उम्मीद
साल 2010 के चुनाव में यह सीट जेडीयू की गठबंधन सहयोगी भाजपा के खाते में आई. भाजपा ने राम सूरत राय को टिकट दिया और वे चुनाव जीतने में भी सफल रहे. हालांकि, 2015 के चुनाव में उन्हें आरजेडी के प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार से मात खानी पड़ी. इस दफे इस सीट पर कड़े मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही है. जनता के मन में क्या है, यह तो 10 नवंबर को मतगणना के बाद ही पता चल पाएगा.