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औरंगाबाद: बिहार का चित्तौड़गढ़ जहां क्षत्रियों का हर क्षेत्र में प्रभुत्व

क्षत्रियों की समुदाय यहां प्रभुत्वशाली भूमिका है जिसका खेती, व्यापार और राजनीति समेत कई क्षेत्रों में दबदबा देखा जा सकता है.

औरंगाबाद बिहार का नक्सल प्रभावित जिला औरंगाबाद बिहार का नक्सल प्रभावित जिला
aajtak.in
  • औरंगाबाद,
  • 25 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:11 PM IST
  • क्षत्रियों के प्रभुत्व की वजह से बिहार का चित्तौड़गढ़ कहलाता है औरंगाबाद
  • कांग्रेस के गढ़ में दो बार से जीत रही भाजपा
  • औरंगबाद जिले की अर्थव्वयस्था खेती पर आधारित

बिहार का औरंगाबाद जिला झारखंड से लगा हुआ है. यह जिला देश के नक्सल प्रभावित इलाके रेड कॉरिडोर में आता है. यहां का सूर्य मंदिर काफी प्रसिद्ध है जहां दूसरे राज्यों से भी लोग दर्शन करने आते हैं. औरंगाबाद 1972 में गया जिले से अलग होकर एक स्वतंत्र जिला बना था. 

बिहार का चित्तौड़गढ़ है औरंगाबाद
क्षत्रियों की बहुलता होने की वजह से औरंगाबाद को 'बिहार का चितौड़गढ़' भी कहा जाता है. क्षत्रियों की समुदाय यहां प्रभुत्वशाली भूमिका है जिसका खेती, व्यापार और राजनीति समेत कई क्षेत्रों में दबदबा देखा जा सकता है. यही वजह है कि राजनीतिक दल इसी समुदाय के उम्मीदवारों को टिकट देते हैं. इसलिए यहां से जीतने वाले अधिकांश सांसद क्षत्रिय जाति से ही होते हैं.  

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खेती और छोटे उद्योगों पर निर्भर जिला
औरंगबाद जिले की अर्थव्वयस्था कृषि पर आधारित है. यहां की मुख्य फसलें चावल, गेहूं, चना, मसूर और दलहन हैं. यहां पर खेती के अलावा बिजली उत्पादन (एनटीपीसी, नबीनगर) और सीमेंट उत्पादन (श्रीमेंट) भी होता है. यहां पर इसके अलावा कालीन, कंबल और ब्रासवेयर का भी उत्पादन होता है जो स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी साधन है. 

औरंगाबाद का सामाजिक तानाबाना
2011 की जनगणना के अनुसार औरंगाबाद जिले की आबादी करीब 25.40 लाख है. इसमें पुरुषों की संख्या लगभग 13.99 लाख और महिलाएं करीब 12.22 लाख हैं. औरंगाबाद में प्रति 1000 पुरुषों के पीछे 916 महिलाएं हैं. जिले में साक्षरता की दर 72.77 फीसदी है जो बिहार के दूसरे राज्यों के मुकाबले बेहतर है. जिले में करीब 94.78 फीसदी लोग हिंदीभाषी हैं तो 5.17 फीसदी लोगों की पहली भाषा उर्दू है. औरंगाबाद में लगभग 90.20 फीसदी हिंदू धर्म की मानने वाली है और करीब 9.34 लोग इस्लाम धर्म का पालन करते हैं. 

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औरंगाबाद की राजनीतिक तस्वीर
औरंगाबाद जिले में औरंगाबाद लोकसभा सीट आती है. यहां से आठ बार कांग्रेस को जीत मिली है. तीन बार जनता दल, दो बार जनता पार्टी और एक बार जेडीयू जीती है. पिछली दो बार ये यहां से भाजपा जीत रही है. औरंगाबाद में पांच विधानसभा सीटें आती हैं. औरंगाबाद, गोह, कुटुंबा, ओबरा, रफीगंज सीटें हैं. इनमें से दो सीटें कांग्रेस के पास हैं तो भाजपा, आरजेडी और जेडीयू के खाते में एक-एक सीट आई थीं. 

औरंगाबाद की प्रमुख शख्सियतें
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और सात बार के लोक सभा सदस्य सत्येंद्र नारायण सिन्हा औरंगाबाद से ही हैं. औरंगाबाद का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी अहम योगदान रहा है. चंपारण सत्याग्रह के आंदोलनकारी और आधुनिक बिहार के निर्माताओं में शामिल अनुग्रह नारायण सिन्हा भी यहीं से हैं. वह बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री भी रहे.

जिले के प्रमुख अधिकारी
औरंगाबाद जिले के डीएम की ई-मेल आईडी dm-aurangabad.bih@nic.in है. उनसे मोबाइल नंबर 9473191261 और टेलीफोन नंबर 06186-223167 पर भी संपर्क किया जा सकता है. जिले के एसपी की ई-मेल आईडी sp-aurangabad-bih@nic.in है. उनसे मोबाइल नंबर 9431822974 और टेलीफोन नंबर 06186-222200 पर भी संपर्क किया जा सकता है.
 

 

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