
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के सहयोगी दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन सकी है. ऐसे में एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान बुधवार को दोपहर में पार्टी सांसदों के साथ बैठक करेंगे. इस बैठक में तय होगा कि एलजेपी बिहार में एनडीए के सहयोगी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरेगी या फिर अकेले किस्मत आजमाएगी.
चिराग पासवान की अध्यक्षता में 7 सितंबर को एलजेपी की संसदीय बोर्ड की बैठक हुई थी, जिसमें 143 सीटों पर जेडीयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारने पर ऐलान किया गया था, लेकिन पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को इस पर अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया था. ऐसे में चिराग पासवान आज यानी बुधवार को दिल्ली में बैठक करेंगे. हालांकि, रामविलास पासवान और पशुपति पारस बीमार होने के चलते इस बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे जबकि महबूब कैसर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे.
बता दें कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद कहा था बीजेपी और एलजेपी बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे. इस पर चिराग पासवान ने कहा था कि बीजेपी को नीतीश कुमार पर भरोसा है और उन्हें बीजेपी पर विश्वास है. इसके बावजूद उन्होंने नीतीश कुमार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था.
एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान बिहार की नीतीश सरकार को लेकर हमलावर हैं. बैठक से पहले चिराग पासवान ने नीतीश को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया. चिराग ने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार अगर गंभीर थी, तो समुदाय के उन सभी लोगों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देनी चाहिए थी, जो उनके 15 साल के शासन के दौरान मारे गए. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों के परिजन को सरकारी नौकरी देने का नीतीश का फैसला और कुछ नहीं, बल्कि चुनावी घोषणा है.
एलजेपी नेता चिराग पासवान ने कहा, 'एससी या एसटी समाज का कहना कि इसके पूर्व 3 डिसमिल जमीन देने का वादा भी नीतीश सरकार ने किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ. इससे एससी या एसटी समाज को निराशा प्राप्त हुई थी.' उन्होंने कहा कि एससी या एसटी ही नहीं बल्कि किसी वर्ग के व्यक्ति की हत्या न हो, इस दिशा में भी कठोर कदम उठाने की जरूरत है.