
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बनते और बिगड़ते समीकरण के बीच एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर सख्त तेवर अख्तियार किए हुए हैं. एनडीए के सहयोगी दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन सकी है. एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान पार्टी नेताओं के साथ एक के बाद एक बैठक कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं लिया जा सका है कि एलजेपी बिहार में एनडीए के साथ रहेगी या नहीं. ऐसे में सवाल उठता है कि जेडीयू पर क्या प्रेशर पॉलिटिक्स बनाए रखने के लिए चिराग तेवर दिखा रहे हैं?
एलजेपी की नई दिल्ली में बुधवार को बुलाई बिहार संसदीय बोर्ड की बैठक में चिराग पासवान ने 143 विधान सभा सीट पर प्रत्याशियों की सूची बनाकर जल्द केंद्रीय संसदीय बोर्ड को देनी की बात कही है. बैठक में एलजेपी के सभी सांसदों ने चिराग पासवान को पार्टी के गठबंधन पर फैसले, और आगे के सभी निर्णयों के लिए अधिकृत किया है. एलजेपी का यह प्रस्ताव पहली बार नहीं पास हुआ है बल्कि पिछले तीन बैठकों से इस पर मुहर लग रही है, लेकिन अमल नहीं किया जा रहा है.
चिराग पासवान न तो पार्टी के प्रस्ताव पर किसी तरह का कोई कदम बढ़ाते नजर नहीं आ रहे हैं और न ही एनडीए से अलग होने का फैसला ले पा रहे हैं. यही नहीं, वो न तो नीतीश कुमार के खिलाफ अपना तेवर नरम कर रहे हैं. चिराग पासवान जेडीयू को लेकर पहले की तरह सख्त तेवर अख्तियार किए हुए हैं. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के दौरान चिराग ने उनसे कहा कि बिहार में बीजेपी को बड़े भाई की भूमिका निभानी चाहिए, उनका सीधा संकेत था कि बीजेपी को जेडीयू से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए.
एलजेपी की बिहार संसदीय बोर्ड की बैठक में पार्टी ने यह फैसला लिया कि जल्द 'बिहार फस्ट, बिहारी फस्ट' विजन डॉक्युमेंट की बैठक होगी. इसके बाद केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक होगी, जिसमें आखिरी फैसला लिया जाएगा. इस तरह से एलजेपी ने दो बैठक और भी तय कर ली है, जिसके बाद कहीं जाकर गठबंधन पर किसी तरह का कोई निर्णय हो सकेगा.
एलजेपी लगातार सीटों की मांग करने के साथ ही बिहार की 143 सीटों पर चुनाव लड़ने के संकेत दे रही है. पार्टी के अंदर कई राउंड की वार्ता हो चुकी है, जिसमें सभी ने चिराग पासवान को अंतिम फैसला लेने के लिए अधिकृत किया है. पार्टी की कोशिश है कि सीटों के बंटवारे को लेकर अभी से ही दबाव बनाया जाए ताकि खाते में अधिक से अधिक सीटें आएं, क्योंकि इस बार पिछली बार के चुनाव की तरह 42 सीटें मिलती नजर नहीं आ रही हैं.
दरअसल, 2015 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की सीट शेयरिंग में एलजेपी को 42 सीटें मिली थीं. चिराग पासवान इस बार भी इतनी ही सीटों पर चुनावी दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन नीतीश कुमार इस पर राजी नहीं हैं. बिहार की 243 सीटों में से बीजेपी 100 सीटों से कम पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है तो जेडीयू भी 110 से 120 सीटों पर अपनी दावेदारी कर रही है. ऐसे में एनडीए में जीतनराम मांझी और चिराग पासवान की पार्टी बचती है.
जीतनराम मांझी को नीतीश लेकर आए हैं तो उन्हें साधकर रखने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. माना जा रहा है कि वो अपने कोटे से ही मांझी को सीटें देंगे. वहीं, एलजेपी को लेकर मामला उलझा हुआ है. माना जा रहा है कि इस बार एलजेपी को महज दो दर्जन सीटों पर ही चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है. सूत्रों के मुताबिक एनडीए में एक फॉर्मूला बन रहा है कि बीजेपी 100, जेडीयू 119 और 24 सीटें एलजेपी को दी सकती है. ऐसे में चिराग पासवान ने रणनीति बनाई है कि दबाव बनाकर ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल की जाए. इसीलिए वो एक बाद एक बैठक कर प्रेशर पॉलिटिक्स बनाते नजर आ रहे हैं.