
बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे. लेकिन अंतिम परिणामों से पहले बिहार का मूड आजतक के एग्जिट पोल से सामने आ चुका है.
अनुमान के मुताबिक, बिहार की जनता ने तेजस्वी को गद्दी सौंपने के लिए एकतरफा वोट किया है. महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल होता नजर आ रहा है. सत्तारूढ़ दल दहाई अंकों में सिमटता हुआ दिखाई दे रहा है. इसमें अगर पार्टी के हसाब से आंकड़े देखें तो ऐसा लग रहा है कि नीतीश की पार्टी कांग्रेस से भी कमजोर साबित हो रही है.
इंडिया टुडे-एक्सिस-माय-इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक 70 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी कांग्रेस को 29 से 35 सीटें हासिल होती दिखाई दे रही हैं. वहीं राज्य में सबसे ज्यादा 115 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही जेडीयू को सिर्फ 26 से 34 सीटें मिलती नजर आ रही है. अगर चुनाव परिणाम एग्जिट पोल की तरह ही रहे तो स्पष्ट है कि बिहार की सत्ता चला रही जेडीयू बिहार में अपना वजूद तलाश रही कांग्रेस से भी कम सीटें जीत कर विधानसभा पहुंचने वाली है. यानी बिहार की अगली विधानसभा में नीतीश का कद कांग्रेस से भी छोटा होने वाला है.
ये है दोनों पार्टी का स्ट्राइक रेट
महागठबंधन की सहयोगी कांग्रेस ने 70 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. उसे 29 से 35 सीटें मिलती दिख रही हैं. इस तरह से कांग्रेस का बिहार में स्ट्राइक रेट 50 फीसदी के करीब आने की संभावना है. 2015 के चुनाव के आंकड़े देखें तो कांग्रेस 41 सीटों में से 27 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.
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नीतीश कुमार की अगुवाई वाली जेडीयू ने बिहार में 115 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें से उसे 26 से 34 सीटें मिलती दिख रही हैं. इस लिहाज से जेडीयू का स्ट्राइक रेट करीब 35 फीसदी है. 2015 में जेडीयू 101 सीटों पर चुनाव लड़कर 71 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.
ये हैं एग्जिट पोल के आंकड़े
इंडिया टुडे-एक्सिस-माय-इंडिया के एग्जिट पोल के आंकड़े बताते हैं कि महागठबंधन को चुनावों में 139 से 161 सीटों पर जीत मिल सकती है. जबकि एनडीए सिर्फ 69 से 91 सीटों पर सिमटती ही नजर आ रही है. वहीं एलजेपी को 3 से 5 सीटें मिलने का अनुमान है.
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चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में बनी ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट (GDSF) को 3 से 5 सीटें मिल सकती हैं. जबकि पप्पू यादव के प्रयासों से बनी प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (PDA)को एक भी सीट मिलती नजर नहीं आ रही है. वहीं अन्य के हिस्से में 3 से 5 सीटें जा सकती हैं.