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बिहार चुनाव: पहले चरण की वोटिंग कल, जानें किस पार्टी का क्या-क्या लगा है दांव पर?

बिहार में पहले चरण में 16 जिलों की 71 सीटों पर बुधवार को वोट डाले जाएंगे. इन 71 सीटों पर 1,066 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 114 महिलाओं की किस्मत दांव पर लगी है. इस इलाके से अगर महागठबंधन की उम्मीद टिकी हुई है, तो एनडीए की साख दांव पर है. यही तय करेगा कि बिहार की राजनीति किस ओर जा रही है. माना जा रहा इस चरण में जिस पार्टी की नाव पार लग गई, उसके लिए आगे की लड़ाई आसान हो जाएगी. 

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 27 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 12:31 PM IST
  • पहले चरण की 71 सीटों पर 28 अक्टूबर को मतदान
  • पहले चरण में आरजेडी 42 और जेडीयू 35 सीटों पर मैदान में
  • एलजेपी ने जेडीयू के खिलाफ उतारे हैं अपने प्रत्याशी

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की सीटों पर चुनाव प्रचार सोमवार को शाम पांच बजे थम गया है. बिहार में पहले चरण में 16 जिलों की 71 सीटों पर बुधवार को वोट डाले जाएंगे. इन 71 सीटों पर 1,066 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 114 महिलाओं की किस्मत दांव पर लगी है. पहले चरण की 54 सीटों पर एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा और बाकी 17 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना नजर आ रही है. 

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पहले चरण की सियासी लड़ाई में भावी बिहार की कप्तानी के लिए असल टीम यहीं से बनने-बिगड़ने वाली है. पहले चरण का चुनाव बहुत कुछ तय करने वाला माना जा रहा है. इन इलाके से अगर महागठबंधन की उम्मीद टिकी हुई है, तो एनडीए की साख दांव पर है. यही तय करेगा कि बिहार की राजनीति किस ओर जा रही है. माना जा रहा इस चरण में जिस पार्टी की नाव पार लग गई, उसके लिए आगे की लड़ाई आसान हो जाएगी. 

पहले चरण में कितने सीटों पर कौन लड़ रहा चुनाव

बिहार चुनाव के पहले चरण की 71 सीटों में से तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन की ओर से आरजेडी 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि उसके सहयोगी कांग्रेस 21 और सीपीआई माले 8 सीटों पर चुनावी मैदान में है. वहीं, नीतीश की अगुवाई वाले एनडीए की ओर से जेडीयू 35 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी है जबकि उसकी सहयोगी बीजेपी 29, जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा 6 और वीआईपी एक सीट पर चुनाव लड़ रही है. 

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पहले चरण में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी 43 सीटों पर मैदान में है और उसकी सहयोगी बसपा 27 सीटों पर किस्मत आजमा रही है. एनडीए से अलग होकर बिहार की सियासी रण में अकेले चुनाव लड़ने वाले चिराग पासवान की एलजेपी पहले चरण की महज 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें एलजेपी ने जेडीयू के खिलाफ 35 प्रत्याशी उतारे हैं जबकि छह हम और एक वीआईपी के प्रत्याशी को चुनौती दे रहे हैं.

वहीं, बिहार के पहले चरण की 71 सीटों के 2015 के विधानसभा चुनाव के नतीजों और वोट फीसदी के लिहाज से देखें तो मौजूदा एनडीए और महागठबंधन के बीच करीब 10 फीसदी वोटों का अंतर है. पिछले चुनाव में आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस ने मिलकर 54 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि बीजेपी महज 13 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी थी. हालांकि, इस बार समीकरण बदल गए जेडीयू और बीजेपी एक साथ मिलकर चुनाव मैदान में हैं. 

11% वोटो का अंतर के सियासी मायने

पहले दौर का मतदान जिन विधानसभा क्षेत्रों में होने जा रहा है, वहां अगर मौजूदा एनडीए के 2015 के वोट फीसदी को देखें तो बीजेपी 20.88 फीसदी वोटों के साथ 13 सीटें जीती थी जबकि जेडीयू 15.65 फीसदी के साथ 18 सीटें और हम को 4.38 फीसदी वोट के साथ एक सीट मिली थी. इस तरह से एनडीए का कुल वोट 40.91 फीसदी और सीटें 32 होती हैं. वहीं, अगर मौजूदा महागठबंधन के वोट फीसदी को देखें तो आरजेडी को 18.12 फीसदी के साथ 27 सीटें, कांग्रेस 7.09 फीसदी के साथ 9 सीटें, सीपीआई 1.26 फीसदी, सीपीएम 0.21 और सीपीआई माले 2.75 फीसदी वोट व एक सीट मिली थी, जिन्हें मिलाकर 29.4 फीसदी वोट और 37 सीटें होती है. हालांकि, 3.56 फीसदी वोट एलजेपी को मिला था जबकि अन्य को 26 फीसदी वोट और दो सीटें मिली थीं. 

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इस तरह से देखें तो दोनों गठबंधनों के बीच करीब 11 फीसदी वोटों का अंतर है. इस बार के चुनाव में एनडीए अपने वोट फीसदी को बनाए रखने में सफल रहता है तो सीटों में बड़ा फेरबदल हो सकता है. इसका सीधा असर महागठबंधन की सीटों पर पड़ेगा. वहीं, तेजस्वी यादव अगर वोट के अंतर के गैप को खत्म करने में सफल रहते हैं तो निश्चित तौर पर अपने दुर्ग को बचाए रखने में सफल रहेंगे. हालांकि, जिस तरह से एलजेपी ने जेडीयू के खिलाफ प्रत्याशी उतारे हैं, उससे करीब 35 सीटों पर चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है. इनमें 17 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय बना हुआ है. 

सबसे ज्यादा यादव MLA
पहले फेज की 71 में से 22 सीटों पर यादव समुदाय के विधायकों का फिलहाल कब्जा है. 2015 के चुनाव में यहां पर सबसे ज्यादा यादव समुदाय के विधायक जीतने में सफल रहे थे. इन 71 सीटों में से 22 यादव जीते हैं जबकि राजपूत, भूमिहार और कुशवाहा समुदाय के सात-सात विधायक जीते थे. वहीं, तीन सीटों पर कुर्मी समुदाय के विधायक का कब्जा है जबकि 13 सुरक्षित सीटों पर एससी-एसटी समुदाय के विधायक जीते हैं. 

इन दिग्गजों की साख दांव पर 

पहले चरण में जिन बड़े नामों की तकदीर का फैसला होना है, उनमें जहानाबाद से शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, दिनारा से विज्ञान एवं  प्रौद्योगिकी मंत्री जय कुमार सिंह, लखीसराय से श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा, चैनपुर से खनन मंत्री बृजकिशोर बिंद, बांका से राजस्व मंत्री रामनारायण मंडल, जमालपुर से ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार, गया से कृषि मंत्री प्रेम कुमार और राजपुर से परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला मुख्य हैं.

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इसके अलावा, प्रमुख प्रत्याशियों में हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी इमामगंज विधानसभा क्षेत्र से मैदान में खड़े हैं. इसी क्षेत्र से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी आरजेडी के टिकट पर उनसे लोहा ले रहे हैं. एलजेपी के दिग्गजों उम्मीदवारों में दिनारा से राजेंद्र सिंह, सासाराम से रामेश्वर चौरसिया और जगदीशपुर से भगवान सिंह कुशवाहा ने ताल ठोका है. उधर जमुई से पूर्व मंत्री और राजद के नेता विजय प्रकाश और तीरंदाज श्रेयसी सिंह भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं. 

पहले चरण की इन सीटों पर चुनाव

बिहार चुनाव के पहले चरण की 71 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी. जिनमें कहलगांव, सुल्तानगंज, अमरपुर, धोरैया (एससी), बांका, कटोरिया (एसटी), बेलहर, तारापुर, मुंगेर, जमालपुर, सूर्यगढ़, लखीसराय, शेखपुरा, बारबीघा, मोकामा, बाढ़, मसौढ़ी (एससी), पालीगंज, बिक्रम, संदेश, बराहरा, आरा, अगियांव (एससी), तरारी, जगदीशपुर, शाहपुर, ब्रह्मपुर, बक्सर, दुमरांव, रायपुर (एससी), मोहनिया (एससी), भाबुआ, चैनपुर, चेनारी (एससी), सासाराम, करगहर, दिनारा, नोखा, देहरी, कराकट, अरवल, कुर्था, जेहानाबाद, घोसी, मखदूमपुर (एससी), गोह, ओबरा, नबी नगर, कुटुम्बा (एससी), औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, शेरघाटी, इमामगंज, (एससी), बाराचट्टी (एससी), बोध गया (एससी), गया टाउन, टीकरी, बेलागंज, अतरी, वजीरगंज, राजौली (एससी), हिसुआ, नवादा, गोबिंदपुर, वरसालीगंज, सिकंदरा (एससी), जमुई, झाझा, चकाई सीटें शामिल हैं. 

 

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