
बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में उतरे महागठबंधन ने सभी 243 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है. एनडीए की तरह ही महागठबंधन में शामिल दलों ने टिकट वितरण के जरिए अपने-अपने राजनीतिक और जातीय समीकरण साधने की कवायद की है. आरजेडी ने पिछड़े और अति पिछड़े समुदाय को तवज्जो दी है तो कांग्रेस ने अगड़ों पर भरोसा जताया है. आरजेडी ने अपने कोटे की 80 फीसदी सीटें ओबीसी को दी हैं जबकि कांग्रेस ने आधी सीटें सवर्ण समुदाय के तहत आने वाली जातियों को दी है.
महागठबंधन में सीट शेयरिंग फॉर्मूला
बिहार में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस के अलावा वामपंथी दल भी शामिल हैं. महागठबंधन में सीट शेयरिंग के तहत बिहार की कुल 243 सीटों में से आरजेडी 144, कांग्रेस 70, सीपीआई 6, सीपीएम 4 और सीपीआई माले 19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस ने अपनी जीती हुई सीट नहीं छोड़ी है जबकि आरजेडी ने छह सीटिंग सीटें वामपंथी दलों को दे दी है.
महागठबंधन में शामिल तीनों दलों ने गुरुवार को संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सभी 243 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम की सूची जारी की. इन सभी दलों ने टिकट बंटवारे के जरिए सामाजिक समीकरण के जरिए जातीय गणित बैठाने की कवायद की है. आरजेडी ने पुराने और अनुभवी चेहरे को प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने अपने पुराने नेताओं के बेटे-बेटियों के साथ-साथ युवा नेताओं को अच्छा खासा टिकट दिया है.
आरजेडी का यादव और ओबीसी पर दांव
महागठबंधन में प्रमुख रूप से आरजेडी सबसे ज्यादा 144 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. आरजेडी ने टिकट बंटवारे में अपने कोर वोटबैंक पिछड़े और अति पिछड़े का खास ख्याल रखा है. आरजेडी ने सबसे ज्यादा 58 टिकट यादव समुदाय को दिए हैं, जो पार्टी का मूल वोट माना जाता है. कुशवाहा समाज को आठ सीटें दी गई हैं जबकि सात सीट पर वैश्य समुदाय से आने वाली जाती को टिकट दिया है.
इसके अलावा 23 टिकट ओबसी समुदाय के तहत आने वाली बाकी जातियों को दिया है, जिनमें नोनिया जाति के चार, धानुक चार, मल्लाह के तीन, चौरसिया के दो, चंद्रवंशी, ततमा और लोहार जाति से एक-एक अन्य अति पिछड़ी जातियों से पांच प्रत्याशी बनाये गए हैं. आरजेडी का बिहार में मुस्लिम कोर वोटबैंक माना जाता है.
ऐसे में आरजेडी ने 15 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं. बिहार में पहली बार मुस्लिम समाज के तहत आने वाली राइन जाति से किसी को उम्मीदवार बनाया गया है. ऐसे ही 14 सीटों पर दलित और 2 अनुसूचित जनजाति के प्रत्याशी उतारे हैं. चार पासवान, दो मुसहर, दो आदिवासी, सात रविदास को टिकट देकर पार्टी ने दलित और महादलित को साधने की कोशिश की है.
पिछली बार से ज्यादा ब्राह्मण को टिकट
आरजेडी ने अपने कोटे की 13 सीट पर सवर्ण को टिकट दिया है, जिनमें आठ राजपूत, चार ब्राह्मण और एक भूमिहार हैं. पिछले चुनाव में आरजेडी ने महज एक ब्राह्मण राहुल तिवारी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन भूमिहार समुदाय से किसी को टिकट नहीं दिया था. इस बार आरजेडी ने भूमिहार को टिकट न देने की प्रथा को तोड़ने का काम किया है.
कांग्रेस ने आधी सीटों पर अगड़ों को उतारा
महागठबंधन में दूसरे प्रमुख दल के तौर पर शामिल कांग्रेस ने अपने हिस्से की 70 सीटों में सबसे अधिक 34 सीटों पर सवर्ण उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जो कि करीब 50 फीसदी होता है. इनमें 11 भूमिहार, 10 राजपूत, 9 ब्राह्मण और 4 कायस्थ समुदाय के प्रत्याशी शामिल हैं. कांग्रेस ने टिकट बंवटारे में 10 मुस्लिम प्रत्याशी बनाए हैं. ऐसे ही कांग्रेस ने 13 सीटों पर दलित समुदाय के प्रत्याशी उतारे हैं. इसके अलावा 10 ओबीसी समुदाय से प्रत्याशी बनाया है, जिसमें 5 यादव, दो कुर्मी, दो वैश्य और एक कुशवाहा समुदाय से शामिल हैं. साथ ही तीन अति पिछड़े समुदाय से भी जगह दी गई है.
वामपंथी दलों ने साधा जातीय समीकरण
वहीं, महागठबंधन में शामिल वाम दलों को मिली 29 सीटों में चार अगड़ी जाति के प्रत्याशी बनाए गए हैं जबकि बाकी सीटों में से तीन मुस्लिम, तीन यादव और बाकी दलित और अति पिछड़े समुदाय के प्रत्याशी हैं. महागठबंधन ने दो दर्जन सीटों पर महिला प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें से 7 कांग्रेस और 15 आरजेडी ने टिकट दिए हैं. कांग्रेस ने अपने नेताओं के बेटे-बेटियों को भी टिकट में अच्छी खासी जगह देकर उन्हें साधकर रखने की कोशिश की है.