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जेडीयू की लिस्ट में कोर वोटबैंक पर फोकस, पढ़िए टिकटों का जातीय गुणा-गणित

नीतीश कुमार ने टिकट वितरण के जरिए अपने कोर वोटबैंक पिछड़ा और अतिपिछड़ा को साधकर रखने का दांव चला है. साथ ही जेडीयू ने ढाई दर्जन सीटों पर मुस्लिम-यादव कैंडिडेट उतारकर आरजेडी के एम-वाई समीकरण में सेंध लगाने की कवायद की है. इतना ही नहीं आरजेडी छोड़कर आए नेताओं को भी नीतीश कुमार ने निराश नहीं किया है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 9:19 AM IST
  • जेडीयू ने जारी की अपने 115 प्रत्याशियों की लिस्ट
  • JDU ने सबसे ज्यादा OBM समुदाय को दिया टिकट
  • नीतीश की नजर RJD के यादव-मुस्लिम वोटबैंक पर

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू ने अपने सभी 115 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है. नीतीश कुमार ने टिकट वितरण के जरिए अपने कोर वोटबैंक पिछड़ा और अतिपिछड़ा को साधकर रखने का दांव चला है. साथ ही जेडीयू ने ढाई दर्जन सीटों पर मुस्लिम-यादव कैंडिडेट उतारकर आरजेडी के एम-वाई समीकरण में सेंध लगाने की कवायद की है. इतना ही नहीं आरजेडी छोड़कर आए नेताओं को भी नीतीश कुमार ने निराश नहीं किया है. ऐसे में देखना है कि नीतीश कुमार अपने इन सिपहसलारों के जरिए बिहार की सियासी जंग फतह कर पाएंगे? 

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बिहार की राजनीति हमेशा से अलग रही है. यहां की राजनीति में जाति का गणित काफी अहम है और एक कड़वी सच्चाई है कि चुनाव के अंतिम दिन विकास पर जाति का समीकरण भारी पड़ता है. इसालिए नीतीश कुमार ने बिहार के जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर उम्मीदवार उतारे हैं. बिहार में सबसे अहम भूमिका में पिछड़े और अति पिछड़े समुदाय में आनी वाली जातियां हैं, जिनके सहारे नीतीश कुमार पिछले 15 सालों से राज कर रहे हैं. ऐसे में जेडीयू ने अपनी आधी से ज्यादा सीटों पर पिछड़ा-अतिपिछड़ा को उतारा है.

जेडीयू का पिछड़ा-अति पिछड़ा दांव

जेडीयू ने 115 सीटों में से सबसे अधिक 67 प्रत्याशी पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग से उतारे हैं. पिछड़ा वर्ग से नीतीश ने 40 प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 19 यादव,12 कुर्मी और तीन वैश्य समुदाय के लोगों को टिकट दिया है. वहीं, अति पिछड़ा समुदाय से 27 प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें 8 धानुक और 15 कुशवाहा शामिल हैं. इस तरह से नीतीश कुमार ने अपने कोइरी और कुर्मी मूल वोटबैंक को मजबूती से जोड़े रखने का दांव चला है. 

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नीतीश ने बिहार के अगड़ों पर जताया भरोसा

नीतीश कुमार ने पिछड़ा-अति पिछड़ा के साथ-साथ बिहार के अगड़ों को भी साधकर रखने की कवायद की है. यही वजह है कि जेडीयू ने अपने कोटे की 115 सीटों में से 19 सीटें सवर्ण समुदाय के लोगों को दी है, जिनमें सबसे ज्यादा 8 भूमिहार, सात राजूपत और दो ब्राह्मण प्रत्याशियों को टिकट दिया है. बिहार में एक बड़ा तबका अगड़ों का नीतीश कुमार के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है. यही वजह है कि टिकटों के वितरण में खास तवज्जो दी है. 

जेडीयू ने यादव-मुस्लिम का चला दांव 

जेडीयू ने बिहार के अनुसूचित जाति समुदाय के उम्मीदवारों को 17 टिकट दिए हैं और अनुसूचित जनजाति को एक टिकट दिया है. इसके अलावा नीतीश कुमार ने अपने कोटे की पांच अनुसूचित जाति वाली सीटें जीतनराम मांझी की पार्टी को दे रखी है. यही नहीं जेडीयू ने बिहार की 11 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं. इस तरह से नीतीश कुमार ने मुस्लिम और यादवों को करीब 30 सीटों पर टिकट देकर आरजेडी के कोर वोटबैंक M-Y समीकरण को साधने की कवायद की है. जेडीयू नेता अपने टिकट बंटवारे को समावेशी विकास और समावेशी समाज की राजनीति बता रहे हैं. 

आरजेडी से आने वालों को नहीं किया निराशा

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जेडीयू ने इस बार के चुनाव में अपने मौजूदा 10 विधायकों का टिकट काट दिया है. इसके अलावा करीब डेढ़ दर्जन नए प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं. साथ ही आरजेडी छोड़कर जेडीयू में आने वाले सभी विधायकों को नीतीश ने निराश नहीं किया है. आरजेडी छोड़ जेडीयू में आए फराज फातमी, महेश्वर यादव दिलीप राय और लालू-राबड़ी के समधी चंद्रिका राय को भी उम्मीदवार बनाया है. ऐसे में देखना है कि नीतीश का ये समाजिक समीकरण चुनावी जंग में क्या गुल खिलाता है. 

 

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