
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को घोषित होंगे. 243 विधानसभा सीटों पर तीन चरणों में चुनाव हुआ था. इस चुनाव में किशनगंज सीट पर फिर रोचक लड़ाई देखने को मिल सकती है. मुस्लिम बहुल इस जिले में जनता की नब्ज टटोलना नेताओं के लिए टेढ़ी खीर है क्योंकि 2019 में हुए उपचुनाव के परिणाम चौंकाने वाले थे. इस बार यहां 60.25% वोटिंग हुई है.
इस विधानसभा सीट पर पहले आम चुनाव से लेकर 2019 तक आठ बार कांग्रेस ने परचम लहराया है. 2015 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के डॉक्टर मोहम्मद जावेद आजाद विधायक चुने गए थे, लेकिन 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया था. इसमें उन्होंने जेडीयू उम्मीदवार महमूद अशरफ को मात दी थी. उसके बाद ये सीट खाली हो गई.
इन उम्मीदवारों पर रहेगी नजर
1- मो. कमरुल होदा (AIMIM)
2- इजहारुल हुसैन (कांग्रेस)
3- स्वीटी सिंह (भाजपा)
बदल गया था उपचुनाव में समीकरण
2019 में हुए विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद की मां साईदा बानो को मैदान में उतारा, लेकिन साईदा बोना चुनाव हार गईं. उन्हें AIMIM उम्मीदवार मो. कमरुल होदा ने पटखनी दी थी. इस उपचुनाव में सईदा बानो महज 25,285 वोट ही हासिल कर पाईं और तीसरे नंबर पर थीं. AIMIM के कमरुल होदा 70,469 वोट पाकर विजयी रहे. उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी की स्वीटी सिंह को 60,258 वोट मिले थे.
ऐसे में इस बार जहां कांग्रेस को अपनी सीट वापस लाने की चुनौती होगी, वहीं AIMIM को सीट बचाने के लिए दमखम के साथ उतरना पड़ेगा. इधर, एनडीए गठबंधन की बात करें तो इस बार बीजेपी या जेडीयू के सामने खाता खोलने की चुनौती होगी.
भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है
बांग्लादेश की सीमा से महज 25 किमी दूर और नेपाल की सीमा से सटा किशनगंज पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है. किशनगंज विधानसभा सीट का गठन 1951 में हुआ था. यहां के पहले विधायक रावतमल अग्रवाल थे. इस विधानसभा क्षेत्र में पूरे शहर के अलावा मोतिहारा तालुका, सिंधिया कुलामणि, हालामाला व किशनगंज, पोठिया ब्लॉक शामिल हैं.
2015 में क्या था
वोटरों की संख्या- 257258
पुरुष मतदाता- 51.67%
महिला मतदाता- 48.33%
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