Advertisement

तेजप्रताप का नामांकन, जानें-महुआ सीट छोड़ क्यों आ गए हसनपुर

बिहार में राजनीतिक समीकरण क्या बदले आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ मंत्री तेज प्रताप यादव ने अपनी सीट ही बदल ली है. तेज प्रताप इस बार के चुनाव में अपनी पुरानी महुआ सीट छोड़कर समस्तीपुर की हसनपुर सीट को चुना है. तेज प्रताप हसनपुर सीट से मंगलवार को नामांकन दाखिल करेंगे, जहां उनका मुकाबला जेडीयू के मौजूदा विधायक राजकुमार राय से होगा. 

राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 13 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 2:05 PM IST
  • तेज प्रताप यादव हसनपुर सीट पर करेंगे नामांकन
  • हसनपुर सीट पर 1967 के बाद से यादवों का कब्जा
  • महुआ सीट पर जेडीयू ने मुस्लिम प्रत्याशी पर खेला दांव

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार गठबंधन और राजनीतिक समीकरण बदला तो नेता अपना क्षेत्र भी बदलने को मजूबर हो रहे हैं. ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ मंत्री तेज प्रताप यादव की है, जिन्होंने इस बार के चुनाव में अपनी पुरानी महुआ सीट छोड़कर समस्तीपुर की हसनपुर सीट को चुना है. तेज प्रताप हसनपुर सीट से मंगलवार को नामांकन दाखिल करेंगे और उनका मुकाबला जेडीयू के मौजूदा विधायक राजकुमार राय से होगा. जानिए, उनके अपनी सीट बदलने के क्या सियासी मायने हैं. 

Advertisement

तेज प्रताप यादव के नामांकन के साथ ही आरजेडी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव अपने चुनाव प्रचार का शंखनाद भी भाई के विधान सभा क्षेत्र से ही कर रहे है. यहां से रैली करके तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई के पक्ष में माहौल बनाने से लेकर बिहार को राजनीतिक संदेश भी देना चाहते हैं. हालांकि, यह अहम सवाल है कि तेज प्रताप यादव के आखिर महुआ सीट छोड़कर हसनपुर सीट से चुनावी मैदान में उतरने के पीछे क्या सियासी गणित है. 

बता दें कि तेजप्रताप यादव ने 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर महुआ सीट से जीतकर सदन पहुंचे थे, लेकिन इस बार समीकरण बदल गए हैं. नीतीश कुमार एनडीए के साथ हैं और महुआ सीट से ऐश्‍वर्या राय के महुआ से चुनाव लड़ने की चर्चाएं थी. चंद्रिका यादव ने भी संकेत दिए थे कि ऐश्‍वर्या महुआ सीट से चुनावी मैदान में उतर सकती हैं, ऐसे में तेज प्रताप ने यादव बहुल हसनपुर सीट से चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया. 

Advertisement

हालांकि, जेडीयू ने महुआ सीट से ऐश्‍वर्या राय को मैदान में तो नहीं उतारा बल्कि आरजेडी के कोर वोटबैंक मुस्लिम समुदाय से महिला प्रत्याशी को उतार दिया. आरजेडी के पूर्व मंत्री मो. इलियास हुसैन की बेटी आस्मा परवीन को जेडीयू ने अपना प्रत्याशी बनाया है. महुआ सीट यादव और मुस्लिम बहुल मानी जाती है.

ऐसे में जेडीयू ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर आरजेडी के मुस्लिम वोटबैंक को अपने पक्ष में करने की कवायद की है. इतना ही नही बीजेपी का परंपरागत वोट भी जेडीयू के साथ है. ऐसे में तेज प्रताप यादव का यहां से चुनावी मैदान में उतरना जोखिम भरा होता. इसीलिए तेज प्रताप ने हसनपुर सीट से किस्मत आजमाने का फैसला किया है. 

वहीं, हसनपुर सीट यादव बाहुल्य सीट माना जाती है और कुशवाहा वोटर भी अच्छी खासी संख्या में हैं. हसनपुर सीट का इतिहास देखें तो इस सीट पर 1967 के बाद से हमेशा यादव समाज का ही झंडा बुलंद रहा है. यादव समाज से आने वाले गजेंद्र प्रसाद हिमांशु ने इस सीट को 8 बार जीतकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है. हिमांशु स्थानीय होने के साथ-साथ समाजवादी धारा के प्रतिबद्ध नेता रहे हैं.

सुनील कुमार पुष्पम भी हसनपुर सीट से प्रतिनिधित्व दो बार कर चुके हैं. राजेंद्र प्रसाद यादव साल 1985 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं. 2010 में परिसीमन के बाद इस सीट पर लगातार दो बार से जेडीयू का कब्जा है. इस सीट से जेडीयू के राजकुमार राय दो बार जीते हैं, जो यादव जाति से ही आते हैं. 

Advertisement

हसनपुर सीट पर वोटरों की कुल संख्या 2 लाख 40 हजार 948 है, जिसमें यादव मतदाताओं की संख्या ज्यादा है. ऐसे में तेज प्रताप यादव अपने लिए इसे सुरक्षित सीट मानकर मैदान में उतर रहे हैं, जिनका मुकाबला उन्हीं के यादव समाज के राजकुमार राय से है. देखना है कि हसनपुर सीट पर तेज प्रताप क्या सियासी गुल खिलाते हैं.

 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement