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बिहार चुनाव में बड़ा मुद्दा बना ‘रोजगार’, तेजस्वी के दांव पर नीतीश-सुशील का पलटवार

तेजस्वी यादव ने बिहार की बेरोजगारी को चुनावी मुद्दे में तब्दील कर दिया है और अपनी हर एक रैली में 10 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा कर नीतीश कुमार की सरकार को घेरने में जुटे हैं. ऐसे में अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर डिप्टी सीएम सुशील मोदी तक सत्ता में आने पर रोजगार देने का वादा कर रहे हैं.

नीतीश कुमार नीतीश कुमार
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 16 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 4:21 PM IST
  • बिहार में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका में
  • तेजस्वी का 10 लाख नौकरी देने का वादा
  • नीतीश ने बताया कैसे देंगे युवाओं को रोजगार

बिहार चुनाव में महागठबंधन की अगुवाई कर रहे आरजेडी नेता तेजस्वी यादव युवाओं को लुभाने की हर कोशिश कर रहे हैं. तेजस्वी ने बेरोजगारी को बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है. वे अपनी हर रैली में 10 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा कर रहे हैं. एनडीए भी मामले की गंभीरता को समझ रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर डिप्टी सीएम सुशील मोदी तक दोबारा सत्ता मिलने पर नौकरियों का वादा कर रहे हैं.   

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जेडीयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को बरबीघा में एक चुनावी सभा में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का भरोसा दिलाया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा ही हमारा धर्म है. राज्य के साथ केंद्र सरकार भी हर वर्ग के विकास के लिए कार्य कर रही है. बिहार को आगे बढ़ाने में हर कोशिश की गई और नतीजा हुआ कि बिहार में प्रति व्यक्ति आमदनी में साढ़े दस प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई. अबकी बार मौका मिलेगा तो हर व्यक्ति को समर्थ बनाएंगे. कोई गरीब और वंचित नहीं रहेगा. हम फिर बिहार को एक साथ मिलकर पुनः उसी ऊंचाई पर ले जाएंगे. 

नीतीश ने बताया कैसे देंगे रोजगार? 

सीएम नीतीश ने कहा कि बिहार से जंगलराज का खात्मा हुआ है और अब राज्य तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. युवा हाथों को रोजगार मिले, इसके लिए उन्हें हुनरमंद किया जा रहा है. बिहार के हर जिले में मेगा स्किल ट्रेनिंग सेंटर बनाकर युवाओं को नई तकनीक का प्रशिक्षण देंगे ताकि उनको रोजगार मिले और वे दूसरों को भी रोजगार दें. अब बाहर से कुछ मंगवाना नहीं पड़ेगा, बल्कि यहां के बने सामान अब बाहर जाएंगे. युवाओं के रोजगार के लिए ज्यादा से ज्यादा उद्योग लगाए जाएंगे. 

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वहीं, बीजेपी नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि अगर सरकार में आएंगे तो रोजगार देने का काम करेंगे. गुरुवार को एक रैली को संबोधित करते हुए भी उन्होंने कहा, 'बिहार में नए उद्योग लगाए जाएंगे, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा. उन्हें काम के लिए अब दूसरे राज्य जाना नहीं पड़ेगा. इसके साथ ही साथ 1.5 लाख नए शिक्षकों की बहाली का भी सुशील मोदी ने वादा किया. 

तेजस्वी का 10 लाख नौकरी का वादा

दरअसल, तेजस्वी यादव बिहार में युवा मतदाताओं की संख्या को देखते हुए बेरोजगारी के मुद्दे पर नीतीश कुमार सरकार को घेरने में जुटे हैं. तेजस्वी लगातार वादा कर रहे हैं कि अगर उनकी सरकार बनती है तो पहली ही कैबिनेट मीटिंग में 10 लाख नौजवानों को रोजगार देने का काम करेंगे. यह नौकरी पूरी तरह से स्थायी तौर पर होगी. तेजस्वी ने कहा कि बिहार में नई सोच की सरकार चाहिए, जो प्रदेश में विकास की नई इबारत लिख सके.

आरजेडी के इस दावे पर सुशील मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा था कि लालू-राबड़ी सरकार ने युवाओं को नौकरी दिलाने की नहीं, केवल गरीबों के वोट हथियाने का जाल बुनने की चिंता की. चरवाहा विद्यालय खुलवाना उनका राजनीतिक स्टंट था, रोजगार देने वाली शिक्षा से उसका कोई वास्ता नहीं था. सुशील मोदी ने आरजेडी पर नौकरी से लेकर हर काम के पैसे लेने या जमीन अपने नाम लिखवाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जो आज पहली मंत्रिमंडल बैठक में 10 लाख लोगों को नौकरी देने का झूठा वादा कर रहे हैं, वे पहली कैबिनेट बैठक में अपराधियों से मुकदमे वापस लेने का काम करेंगे. 

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बिहार में युवा मतदाता निर्णायक

बता दें कि बिहार में चुनाव अयोग के मुताबिक 20 से 29 आयु वर्ग के 1 करोड़ 60 लाख मतदाता हैं. 18 से 19 साल के 7 लाख 14 हजार वोटर हैं, जो पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. वहीं, 30 से 39 साल के एक करोड़ 98 लाख से ज्यादा वोटर हैं. इन्हीं आंकड़ों को ध्यान में रखकर तेजस्वी यादव बिहार की नीतीश सरकार को रोजगार के मुद्दे पर घेर रहे हैं. वहीं, एनडीए और नीतीश कुमार भी युवाओं को अपने पाले में करने के लिए रोजगार देने का वादा कर रहे हैं. देखना ये है कि बिहार का युवा मतदाता नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव में से किस पर अपना भरोसा जताता है.


 

 

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