
चुनाव आयोग ने जब बिहार में विधानसभा चुनावों की घोषणा की तब बहुत सारे लोग चौंक पड़े थे. देश ही नहीं, दुनिया के कई देशों की निगाहें अब भारत की ओर है. अमेरिका जैसे देश, जहां जल्द ही चुनाव होने हैं, वो भी बिहार के चुनाव के तौर तरीकों पर नजरें गड़ाए हुए हैं. इस बार के चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि कैसे कोरोना संक्रमण को रोकते हुए सुरक्षित ढंग से इसको संपन्न कराया जाए. संक्रमण के मद्देनजर ही चुनाव आयोग इस बार बहुत कुछ ऐसा करने जा रहा है जो दुनिया भर के चुनावी इतिहास में पहली दफा होगा.
परंपरागत चुनाव प्रचार नहीं
चुनाव आयोग ने कोरोना संक्रमण के मद्देनजर चुनाव प्रचार के पारंपरिक तरीकों पर रोक लगा रखी है.
- बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियों को इस चुनाव में मंजूरी नहीं है.
- सेलिब्रिटी सरीखे नेताओं, फिल्मी व खेल जगत के सितारों के रोड शो पर भी रोक है.
- डोर टू डोर चुनाव प्रचार में भी प्रत्याशी भीड़ लेकर नहीं निकल सकेंगे. सीमित संख्या में इसके लिए अनुमति होगी.
डिजिटल प्रचार होगा बड़ा विकल्प
बिहार के चुनाव में इस बार फिजिकली प्रचार के तौर तरीकों से ज्यादा डिजिटल प्रचार पर जोर देना मजबूरी होगी.
- व्हाट्सअप, फेसबुक, सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म के जरिए प्रत्याशियों को अपने वोटर्स से जुड़ना होगा.
- बिहार में पहली बार राजनीतिक पार्टियां बड़े स्तर पर निजी कंपनियों और प्रोफेशनल्स का इस्तेमाल डिजिटल प्रचार के लिए करेंगी.
- इस बार प्रत्याशियों को मल्टीमीडिया मैटेरियल जैसे ऑडियो, वीडियो, पिक्चर्स, मीम्स के जरिये अपनी बातें जनता तक पहुंचानी पड़ेंगी.
धन और बल डालेगा मुसीबत में
चुनाव आयोग ने जिस तरह से कोरोना प्रोटोकॉल के लिए शर्तें रखी हैं, उसमें प्रत्याशियों को धन और बल दिखाने का मौका शायद ही मिले.
नामांकन में प्रत्याशियों के साथ दो अन्य प्रस्तावक और समर्थक ही साथ रह सकेंगे.
- अधिकतम दो गाड़ियों के इस्तेमाल की अनुमति होगी. क्षेत्र में प्रचार के दौरान अधिकतम 5 समर्थक साथ रह सकेंगे.
- नामांकन जुलूस पर पूरी तरह से रोक है और प्रत्याशियों के पास ऑनलाइन नॉमिनेशन का भी विकल्प है.
मास्क, ग्लब्स, फेस शील्ड भी होगा चुनाव में इस्तेमाल
देश में पहली बार किसी चुनाव में ईवीएम, अमिट स्याही, वीवीपैट मशीन के साथ बड़े पैमान पर सैनिटाइजर, मास्क, ग्लब्स, फेसशील्ड का भी इस्तेमाल होगा.
- चुनाव आयोग के मुताबिक बिहार में मतदान के लिए 7 लाख यूनिट सैनिटाइजर, 46 लाख मास्क, 6 लाख फेस शील्ड, 23 लाख हैंड ग्लब्स इस्तेमाल किए जाएंगे.
संक्रमण रोकने के लिए इतना कुछ
चुनाव में मतदान के दौरान संक्रमण की संभावनाओं को न्यूनतम करने के लिए भी काफी कुछ किया जाएगा.
- प्रत्येक पोलिंग स्टेशन पर औसत वोटर्स संख्या 1500 की जगह 1000 कर दी गयी है.
- इसकी वजह से इस बार एक लाख छह हजार पांच सौ पोलिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं जो पिछले चुनाव की तुलना में डेढ़ गुना ज्यादा हैं.
बिहार के इस बार के चुनाव में पिछले चुनाव की तुलना में कहीं ज्यादा मतदान कर्मियों और पीठासीध अधकिारियों की ड्यूटी लगाई गई है.
- मतदान का समय भी सुबह 7 से शाम 5 की जगह सुबह 7 से शाम 6 बजे तक बढ़ाया गया है.
मतदान के आखिरी एक घंटे में कोरोना संक्रमितों एवं कोरोना के संदिग्ध मरीजों के साथ कंटेनमेंट जोन के लोगों को मौका दिया जाएगा. हॉस्पिटल में आइसोलेट मरीजों, कोरोना वारियर के तौर पर काम करने वाले डॉक्टर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ के लिए पेपर बैलेट से मतदान का विकल्प भी दिया जाएगा.
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