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बिहार के सियासी किंगमेकर बनने की चाह लेकर महागठबंधन से नाता तोड़कर एनडीए में जीतनराम मांझी के लिए बिहार के पहले चरण का चुनाव काफी अहम है. जेडीयू ने अपने कोटे से जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को सात विधानसभा सीटें दी हैं, जिनमें से छह सीटों पर पहले चरण में ही चुनाव होने हैं. इनमें उनकी खुद की और समधिन व दमाद की सीटें भी शामिल हैं, जिसके चलते पहले चरण में जीतनराम मांझी की साख दांव पर लगी है और उनके लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है.
बिहार में सीट शेयरिंग में जीतनराम मांझी की हिदुस्तान आवाम मोर्चा को सात सीटें मिली है. इनमें टिकारी, इमामगंज, बाराचट्टी, मखदुमपुर, सिकंदरा, कसबा और कुटुंबा सीटें शामिल हैं, जिनमें से 5 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित जबकि टिकारी और कुटुंबा सामान्य जातिय के लिए है. इतना ही नहीं इसमें से कुटुंबा को छोड़कर बाकी सभी 6 सीटों पर पहले चरण में यानी 28 अक्टूबर को वोटिंग होनी है.
नीतीश कुमार के कोटो से मिली सात सीटों में जीतनराम मांझी एकलौते विधायक हैं. 2015 में मांझी ने इमामगंज सीट से जीत दर्ज की थी और एक बार फिर इसी सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं. वहीं, बाराचट्टी सीट से उनकी समधिन ज्योति देवी और मखदुमपुर सीट से उनके दामाद देवेंद्र कुमार उम्मीदवार हैं. टेकारी से पूर्व मंत्री अनिल कुमार किस्मत आजमा रहे हैं.
मांझी के सामने चार बार के विधायक
गया जिले की इमामगंज (सुरक्षित) सीट पर जीतनराम मांझी ने बुधवार को नामांकन दाखिल किया. मांझी यहां से दूसरी बार चुनावी मैदान में उतरे हैं. मांझी के खिलाफ आरजेडी से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ताल ठोक रहे हैं. यहां से उदय नारायण चौधरी जेडीयू के टिकट पर 2000 से 2015 तक लगातार चार बार विधायक रहे हैं. पिछले चुनाव में मांझी और चौधरी के बीच मुकाबला हुआ था. मांझी को 79389 वोट मिले थे जबकि चौधरी 49981 वोट हासिल हुए थे.
मांझी के दमाद-समधिन की अग्नि परीक्षा
मखदुमपुर सीट से जीतनराम मांझी के दमाम देवेंद्र कुमार मांझी ने हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के उम्मीदवार के रूप में बुधवार को नामांकन किया. देवेंद्र कुमार के खिलाफ आरजेडी से सतीश दास चुनावी मैदान में उतरे हैं. इस सीट पर आरजेडी का अच्छा खासा जनाधार है, जिसके चलते 2015 में आरजेडी के सुबेदार दास ने जीतनराम को 48777 वोटों से हराया था.
ऐसे ही बाराचट्टी सीट से जीतनराम मांझी की समधिन ज्योति देवी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा से मैदान में उतरी हैं, उनके खिलाफ आरजेडी ने समता देवी को उतारा है. समता देवी मौजूदा समय में यहां से विधायक हैं जबकि 2010 में ज्योति देवी जेडीयू से विधायक चुनी गई थी. ऐसे में मांझी के दमाद और समधिन को जीत के लिए कड़ी चुनौतियों का समाना करना पड़ेगा.
टिकारी सीट पर अनिल कुमार 2015 में भी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन जेडीयू के अभय कुमार से चुनाव हार गए थे. इस बार यह सीट जेडीयू ने मांझी की पार्टी को दे दी है. ऐसे में जीतनराम मांझी को केवल अपनी ही सीट नहीं जीतनी बल्कि उन्हें कंधों पर अपने नेताओं को भी जीत दिलाने की जिम्मेदारी है, क्योंकि उनकी हार-जीत भी उनके सियासी कद को प्रभावित करेगा.