
बिहार में विधानसभा चुनाव के तीनों चरण की प्रक्रिया खत्म हो गई है. अब हर किसी को 10 नवंबर को आने वाले नतीजों का इंतजार है. कोरोना संकट के बीच देश में हुआ ये पहला विधानसभा चुनाव है, जो कई तरह की परिस्थितियों में लड़ा गया. इंडिया टुडे के लिए एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में इस दौरान कोरोना संकट को लेकर सवाल पूछा गया और जनता के मन को टटोला गया.
एग्जिट पोल की मानें तो बिहार में कोरोना संकट से निपटने का प्रबंधन चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया है. और ना ही बड़ी संख्या में लोगों ने प्रवासी मजदूरों के मसले को ध्यान में रखते हुए वोट किया है.
सर्वे में जब सवाल पूछा गया कि आप महागठबंधन की सरकार क्यों चाहते हैं, तो सिर्फ एक फीसदी लोगों ने नीतीश सरकार के कोविड प्रबंधन की नाकामी को बड़ा मुद्दा बताया. साथ ही प्रवासी मजदूरों का लॉकडाउन के वक्त देश के अलग-अलग हिस्सों से पैदल आना या मुश्किलों का सामना करना भी बड़ा मुद्दा नहीं बन सका. सिर्फ तीन फीसदी लोगों का मानना है कि प्रवासी मजदूरों की नाराजगी एक मुद्दा बन सकी.
कोरोना संकट के बीच केंद्र सरकार की ओर से गरीब कल्याण योजना की शुरुआत की गई, जिसके तहत लोगों को राशन दिया गया. एग्जिट पोल में जब इस मसले पर सवाल पूछा गया तो सिर्फ एक फीसदी लोगों ने इसे वोट देने का कारण माना.
गौरतलब है कि प्रचार के दौरान राजद नेता तेजस्वी यादव ने लगातार प्रवासी मजदूरों को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधा. साथ ही राहुल गांधी ने भी आरोप लगाया कि लॉकडाउन के वक्त केंद्र और राज्य सरकार ने प्रवासी मजदूरों की मदद नहीं की और अब चुनाव के वक्त वोट मांगने आ गए हैं.
बता दें कि बिहार में इस बार कुल 3 चरणों में विधानसभा चुनाव हुआ है. पहले चरण के लिए 28 अक्टूबर को 71 सीट, दूसरे चरण के लिए 3 नवंबर को 94 सीट और तीसरे चरण के लिए 7 नवंबर को 78 सीटों पर मतदान हुआ. इंडिया टुडे-एक्सिस-माय-इंडिया के एग्जिट पोल में कुल 243 विधानसभा क्षेत्रों में सर्वे किया गया है. जबकि सर्वे का सैंपल साइज 63081 रहा.