
एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी नेता चिराग पासवान के तेवर ढीले पड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं. लोक जनशक्ति पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए 42 सीटें मिले, इसको लेकर चिराग पासवान अभी भी अड़े हुए हैं. ऐसा नहीं होने पर चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने के भी संकेत दे दिए हैं.
चिराग पासवान ने सोमवार को बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात की. जिसके बाद उनकी पार्टी को 27 विधानसभा सीट का ऑफर दिया गया. साथ ही लोक जनशक्ति पार्टी को दो एमएलसी का भी ऑफर दिया गया. मगर इसके बावजूद भी चिराग मानने को तैयार नहीं हैं.
चिराग पासवान की मांग है उनकी पार्टी 42 सीटों से कम पर समझौता नहीं करेगी. चिराग ने एक अन्य फार्मूला भी बीजेपी को समझाया है. जिसके तहत वह 27 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार हो सकते हैं. बशर्ते एनडीए अगर सत्ता में आती है तो लोक जनशक्ति पार्टी से एक उपमुख्यमंत्री बनाया जाए. अभी फिलहाल चिराग पासवान की मांग और ऑफर, दोनों को लेकर असमंजस है. मगर इस वक्त एनडीए में ही केवल सीट बंटवारे को लेकर छोटे दलों के जरिए रस्साकशी देखने को नहीं मिल रही है.
उपेंद्र कुशवाहा ने बनाया नया फ्रंट
दूसरी तरफ सीटों के तालमेल पर बात नहीं बनने के बाद मंगलवार को महागठबंधन से उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी भी अलग हो गई. महागठबंधन से अलग होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने मायावती की बहुजन समाज पार्टी और जनवादी सोशलिस्ट पार्टी के साथ मिलकर एक नए फ्रंट की घोषणा की. उपेंद्र कुशवाहा ने नए फ्रंट की घोषणा के साथ ही ऐलान किया कि यह नया गठबंधन सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगा. बहुजन समाज पार्टी ने भी घोषणा की कि इस नए फ्रंट का नेतृत्व उपेंद्र कुशवाहा करेंगे.
महागठबंधन में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री उम्मीदवार स्वीकार कर देने से इनकार करने वाले उपेंद्र कुशवाहा चाहते थे कि महागठबंधन उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करे. मगर राष्ट्रीय जनता दल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 10 सीटों से ज्यादा देने को तैयार तक नहीं थी. इसी बीच एनडीए में वापस जाने के लिए भी उपेंद्र कुशवाहा ने काफी जुगत लगाई, मगर सब फेल रहा.
जनता दल यूनाइटेड प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, 'उपेंद्र कुशवाहा कहीं के नहीं रहे. जब एनडीए में थे तो वहां से भी निकल गए और अब महागठबंधन से भी बाहर हो गए हैं. आज उन्होंने एक नया मोर्चा तैयार किया है. मगर बिहार में कोई तीसरे या चौथे मोर्चे की जगह नहीं है. उपेंद्र कुशवाहा की हालत आज इसीलिए ऐसी है क्योंकि वह हमेशा एक गठबंधन से दूसरे गठबंधन में जाते रहे हैं.'
कई छोटे दल मौजूद
बिहार चुनाव में एनडीए और महागठबंधन को टक्कर देने के लिए राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने जो नया मोर्चा तैयार किया है, इसके अलावा भी बिहार में अन्य कई ऐसे छोटे-छोटे गठबंधन हैं जो चुनावी मैदान में हैं. जन अधिकार पार्टी के संरक्षक और पूर्व सांसद पप्पू यादव ने भी प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन का गठन किया है. जिसमें तीन छोटे दल चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी, सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी और बहुजन मुक्ति पार्टी शामिल है.
इसके साथ-साथ असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र यादव की समाजवादी जनता दल (लोकतांत्रिक) के साथ चुनावी गठबंधन किया है. बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव 3 चरणों में होना है. पहला चरण 28 अक्टूबर, दूसरा चरण 3 नवंबर और तीसरा चरण 7 नवंबर को होगा. वोटों की गिनती 10 नवंबर को होगी.