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बिहार: चुनाव निशान और पार्टी के नाम के लिए हाई कोर्ट पहुंची भीम आर्मी, चुनाव आयोग से जवाब तलब

चंद्रशेखर आजाद ने अपनी याचिका में कोर्ट से मांग की है कि उनकी राजनीतिक पार्टी को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नाम से पंजीकृत किया जाए,  साथ ही आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में लड़ने के लिए पार्टी को एक प्रतीक भी आवंटित किया जाए.

भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद (फाइल फोटो) भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद (फाइल फोटो)
पूनम शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 7:37 AM IST
  • बिहार विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं भीम आर्मी के चीफ
  • चंद्रशेखर आजाद की याचिका पर हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
  • 20 अक्टूबर को होगी कोर्ट में अगली सुनवाई

भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पार्टी को रजिस्टर कराने के लिए  दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसपर अदालत ने चुनाव आयोग से जवाब दाखिल करने को कहा है. चंद्रशेखर ने अपनी याचिका में कोर्ट से मांग की है कि उनकी राजनीतिक पार्टी को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नाम से पंजीकृत किया जाए,  साथ ही आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में लड़ने के लिए पार्टी को एक प्रतीक भी आवंटित किया जाए.

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चंद्रशेखर ने अपनी अर्जी में कोर्ट से कहा है उनकी पार्टी को पंजीकृत करने के लिए आपत्ति आमंत्रित करने के वक्त को 30 दिन से घटाकर 7 दिन का कर दिया जाए. कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में चुनाव आयोग से कहा है कि वह चंद्रशेखर की अर्जी में की गई मांगों को लेकर अपना जवाब दाखिल करें. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी है.

चंद्रशेखर ने अपनी याचिका में कोर्ट को बताया है कि वो और उनके पार्टी कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में बिहार चुनावों और उपचुनावों में भाग लेने के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अगर आपत्ति दर्ज करने के लिए 30 दिनों की प्रक्रिया की अवधि कम नहीं की जाती है, तो याचिकाकर्ता पार्टी के नाम और प्रतीक के तहत बिहार के विधानसभा चुनावों में भाग लेने से वंचित हो जाएंगे. इसलिए किसी से आपत्ति आमंत्रित करने के लिए 30 दिन की सेवा अवधि को घटाकर 7 दिन कर दिया जाए.

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हालांकि, हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आयोग द्वारा खारिज की गई आपत्तियों को आमंत्रित करने के लिए सेवा अवधि को कम करने के लिए अन्य राजनीतिक दलों द्वारा भी इसी तरह का अनुरोध किया गया था. 2019 के आम चुनावों में एक बार इस तरह की छूट दी भी गई थी, लेकिन अब ऐसा नहीं किया जा सकता.

याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने 16 मार्च को चुनाव आयोग के समक्ष एक आवेदन दायर किया था और कुछ आपत्तियों को दूर करने के लिए 4 अगस्त के पत्र के अनुसार, उन्होंने 13 अगस्त को अधिकारियों द्वारा बताए गए दस्तावेज समेत सभी आवश्यकताओं को पूरा किया. लेकिन उनकी पार्टी के पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग ने पत्र जारी नहीं किया तो उन्हें हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. अर्जी में यह भी बताया गया है कि सुनवाई से 1 दिन पहले उन्हें संचार माध्यम से चुनाव आयोग ने सूचित किया कि उनकी पार्टी के नाम को मंजूरी दे दी गई है.

चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार, उन्होंने 25 और 25 सितंबर को दो राष्ट्रीय और दो स्थानीय समाचार पत्रों (हिंदी और अंग्रेजी) में अपनी पार्टी के नाम पर आपत्तियों को आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित भी कर दिया, लेकिन आयोग ने बिहार के लिए विधानसभा चुनाव की घोषणा  25 सितंबर को ही कर दी. बिहार में चुनाव का पहला चरण 28 अक्टूबर से शुरू होगा और 7 नवंबर को समाप्त होगा. पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 अक्टूबर है.

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