
खगड़िया पहले मुंगेर जिले का हिस्सा था. 1943-44 में खगड़िया को अलग से अनुमंडल बनाया गया. 10 मई 1981 को इसे स्वतंत्र जिले का दर्जा मिला. आजादी से पहले मुंगेर जिले में खगड़िया, मुंगेर सदर, बेगुसराय और जमुई आते थे. गंगा नदी खगड़िया जिले की उत्तरी सीमा बनाती हुई बहती है.
खगड़िया क्षेत्र में पांच बड़ी नदियों गंगा, गंडक, वागमती, कमला और कोसी की बाढ़ आती थी. तीन धाराओं बागमती, कमला और घाघरी (कोसी की मुख्य धारा) और मरिया और मैथा नदियों के बीच के इलाके में दलदली जमीन थी. कहा जाता है कि बाढ़ की वजह से यहां की पुरानी धरोहरें नष्ट हो गईं. खगड़िया का मौजूदा हिस्सा जो मुंगेर जिले का ही अंग था पहले मध्य देश या मध्य भूमि कहलाता था.
मुंगेर का हिस्सा रहा है खगड़िया
मुंगेर के पुराने जिले का पहला ऐतिहासिक उल्लेख ह्वेनसांग की यात्रा में दिखाई देता है. नौवीं शताब्दी में इस क्षेत्र के पाल राजाओं के हाथों में जाने के समय का इतिहास मुख्य रूप से शिलालेखों के जरिए मिलता है. सन 1762 में मुंगेर तब चर्चा में आया जब कासिम अली खां ने राजधानी को मुर्शिदाबाद से हटाकर मुंगेर को अपनी राजधानी में तब्दील किया. यहां वह खजाना, हाथी-घोड़े और इमामबाड़े को सजाने के लिए सोने और चांदी का काफी मात्रा में सजावटी समान लाए. उन्होंने आलीशान महल और किला बनवाया. किले के सामने 30 तोपें भी लगाई थीं. कासिम अली खां के मुख्य जनरल गुरधीन खां ने यहां मुंगेर में एक आयुध कारखाना भी स्थापित किया. यह मौजूदा समय में भी चालू अवस्था में है.
सनौली के मंदिर में कई राज्यों से आते हैं श्रद्धालु
सन 1763 में मीर कासिम अली खां और अंग्रेजों के बीच युद्ध के बाद यह क्षेत्र अंग्रेजों के अधीन हो गया. ब्रिटिश काल में 1812 में मुंगेर एक अलग प्रशासनिक केंद्र के रूप में सामने आया. 1870 में बेगूसराय अनुमंडल और 1943-44 में खगड़िया अनुमंडल अस्तित्व में आया और खगड़िया अनुमंडल का मुख्यालय खगड़िया ही बना. खगड़िया के सनौली में देवी दुर्गा का प्रसिद्ध मंदिर है. यहां पर असम, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड आदि राज्यों से श्रद्धालु आते हैं.
खगड़िया को बनाती-उजाड़ती है बाढ़
खगड़िया की बड़ी समस्या यहां हर साल आने वाली बाढ़ से तबाही है. इससे यहां हर बार जान-माल को काफी नुकसान पहुंचता है. हालांकि बाढ़ की वजह से यहां पर जमीन भी काफी उपजाऊ है. जिले में अधिकांश लोगों की आय का साधन खेती है. यहां पर गेहूं और मक्के की खेती पूरे जिले में होती है. पिछले दो दशकों में नगदी फसल के तौर पर केले की खेती भी होने लगी है. इसके अलावा आम और लीची के बाग भी जिले में देखने को मिलते हैं. इन बागों का जिक्र पुराने राजकीय दस्तावेजों में भी मिलता है. खगड़िया में खनिज तत्व नहीं हैं. 2015 में तत्कालीन खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर ने मानसी ब्लॉक में मेगा फूड पार्क की नींव रखी थी. अनुमान है कि इससे करीब 6 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और 30 हजार लोगों को इस पार्क से सीधे फायदा पहुंचेगा.
खगड़िया का सामाजिक तानाबाना
2011 की जनगणना के मुताबिक खगड़िया की आबादी करीब 16.67 लाख है. पुरुषों की संख्या करीब 8.84 लाख है तो महिलाओं की संख्या 7.83 लाख है. खगड़िया जिले में लिंग अनुपात काफी असमान है. यहां प्रति 1000 पुरुषों पर केवल 886 महिलाएं ही हैं. यह बिहार में सबसे खराब लिंगानुपात वाले जिलों में शुमार है. जिले में साक्षरता की दर 57.92 फीसदी है. इसमें पुरुषों का अनुपात 65.25 फीसदी है तो महिलाओं की शिक्षा का अनुपात 49.56 फीसदी है. जिले में करीब 89 फीसदी हिंदू आबादी रहती है तो 10 फीसदी आबादी मुस्लिम है.
खगड़िया की राजनीतिक तस्वीर
खगड़िया जिले में खगड़िया लोकसभा सीट आती है. इस सीट पर अब तक हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को चार बार जीत मिली है तो तीन बार जनता दल जीती है. जेडीयू और एलजेपी यहां से दो-दो बार जीतने में सफल रही हैं. आरजेडी को एक बार जीत मिली है. पिछले दो बार से यहां से एलजेपी ही जीतती आ रही है. खगड़िया जिले में चार विधानसभा सीटें आती हैं- अलौली (अनुसूचित जाति), खगड़िया, बेलदौर, परबत्ता. इनमें से 3 सीटें जेडीयू के पास हैं तो एक सीट आरजेडी के पास है.
जिले के प्रमुख अधिकारी
खगड़िया जिले में आलोक रंजन घोष डीएम हैं. उनसे टेलीफोन नंबर- 06244-222135 पर संपर्क किया जा सकता है. उनकी ई-मेल आईडी dm-khagaria.bih@nic.in है. जिले के एसपी अमितेश कुमार हैं. उनका टेलीफोन नंबर 06244-222086 है. उनकी ई-मेल आईडी sp.khagaria.bih@nic.in है.