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नालंदा विधानसभा सीट: JDU के गढ़ में जारी रहेगा श्रवण कुमार की जीत का सफर?

बिहार की नालंदा विधानसभा सीट का गठन साल 1977 में हुआ. पहले चुनाव में कांग्रेस के श्याम सुंदर प्रसाद जीते. इसके बाद 1980 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार रामनरेश सिंह ने श्याम सुंदर प्रसाद को 12503 वोट से पराजित कर दिया.

बिहार के सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो) बिहार के सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
देवांग दुबे गौतम
  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST
  • नालंदा विधानसभा सीट का गठन साल 1977 में हुआ
  • पिछले 6 चुनावों में जेडीयू को मिली जीत
  • श्रवण कुमार हैं यहां के विधायक

बिहार की नालंदा विधानसभा सीट का गठन साल 1977 में हुआ.  नालंदा में चाहें लोकसभा चुनाव हों या विधानसभा चुनाव, कहा जाता है कि यहां JDU का उम्मीदवार कोई भी हो, लेकिन चुनाव खुद नीतीश कुमार ही लड़ते हैं. यहां पर पिछले 6 चुनावों से जेडीयू को जीत मिलती आ रही है. सभी 6 चुनाव में श्रवण कुमार ने बाजी मारी. इस बार सातवीं बार विधानसभा पहुंचने के लिए वो चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. 

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सामाजिक ताना-बाना

नालंदा विधानसभा सीट नालंदा जिले में आती है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 422135 है. अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का अनुपात कुल जनसंख्या में से क्रमशः 24.32 और 0.03 है. नालंदा विधानसभा क्षेत्र कुर्मी बहुल क्षेत्र है. इसके अलावा यहां एससी-एसटी, अति पिछड़ा,अल्पसंख्यक समुदाय का भी अच्छी खासी आबादी है. नालंदा सीट पर जीत-हार कुशवाहा और घमयला कुर्मी वोटर्स तय करते हैं. 

विधानसभा चुनाव में नालंदा जिले का नाम खास बन जाता है. ये क्षेत्र सूबे के मुखिया नीतीश कुमार का है. और जब किसी राज्य का सीएम उस क्षेत्र से जुड़ा हो तो वो वैसे भी हाईप्रोफाइल जिला होता. नालंदा में चाहें लोकसभा चुनाव हों या विधानसभा चुनाव, कहा जाता है कि यहां JDU का उम्मीदवार कोई भी हो, लेकिन चुनाव खुद नीतीश ही लड़ते हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला होने के कारण मुद्दा कुछ खास नहीं. किसी किसी गांव में सड़कें मुद्दा बनती हैं. कई ऐसे गांव है जहां अब तक सड़कों का निर्माण नहीं हुआ है. पूरे चुनाव में तो रोजगार अहम मुद्दा रहता है. 

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2015 का जनादेश

2015 के विधानसभा चुनाव में नालंदा में 283514 मतदाता थे. इसमें से 53.08 फीसदी पुरुष और 46.91 महिला वोटर्स थीं. नालंदा में 162186 लोगों ने वोट डाला था. यहां पर 57 फीसदी मतदान हुआ था. इस चुनाव में जेडीयू के श्रवण कुमार ने बीजेपी के कौशलेंद्र कुमार को मात दी थी. श्रवण कुमार को 72596 (44.78 फीसदी) वोट मिले थे तो कौशलेंद कुमार के खाते में 69600 (42.93 फीसदी ) वोट पड़े थे. श्रवण कुमार ने 2 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी. नालंदा विधानसभा सीट पर नीतीश सरकार में वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार छह बार से चुनाव जीत रहे हैं. इस बार सातवीं बार विधानसभा पहुंचने के लिए वो चुनाव मैदान में उतरेंगे.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

बिहार की नालंदा विधानसभा सीट का गठन साल 1977 में हुआ. पहले चुनाव में कांग्रेस के श्याम सुंदर प्रसाद जीते. 1980 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार रामनरेश सिंह ने श्याम सुंदर प्रसाद को 12503 वोट से पराजित कर दिया. लेकिन साल 1985 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी श्याम सुंदर प्रसाद ने निर्दलीय प्रत्याशी रामनरेश सिंह को पराजित कर अपनी सीट वापस पा ली. साल 1990 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर रामनरेश सिंह ने जीत दर्ज की.

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साल 1995 के चुनाव में नालंदा सीट पर नीतीश कुमार का जादू चला. समता पार्टी के टिकट पर श्रवण कुमार ने रामनरेश सिंह को मात देकर विजय हासिल की. जिसके बाद से वे लगातार यहां से चुनाव जीतते रहे हैं. हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में श्रवण कुमार को मात्र ढाई हजार वोट से जीत हासिल हुई. क्योंकि पिछले चुनाव में जेडीयू और बीजेपी अलग चुनाव लड़े थे.

ये प्रत्याशी हैं मैदान में

नालंदा विधानसभा सीट पर 20 उम्मीदवार मैदान में हैं. यहां से कांग्रेस के गुंजन पटेल, एलजेपी के राम केश्वर प्रसाद और जेडीयू के श्रवण कुमार प्रत्याशी हैं.

कितनी हुई वोटिंग

नालंदा में दूसरे चरण के तहत मतदान हुआ. यहां पर 3 नवंबर को वोटिंग हुई. नालंदा में 54.61 फीसदी मतदान हुआ. मतगणना 10 नवंबर को की जाएगी.

 
 

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