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Munger: प्लूरल्स पार्टी की प्रत्याशी शालिनी बोलीं- राजनीति में आई तो 5 दिन तक रोए थे ससुर

बिहार विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं. सभी पार्टियों के नेता अपने अपने क्षेत्र में वोटरों को लुभाने में लगे हैं. मुंगेर विधानसभा सीट से इस बार प्लूरल्स पार्टी की उम्मीदवार शालिनी कुमारी चुनावी मैदान में हैं. उन्होंने बातचीत के दौरान विपक्ष पर जमकर हमला बोला वहीं अपनी लाइफ से जुड़े कुछ खास पलों को शेयर किया.

पुष्पम प्रिया की पार्टी से चुनाव लड़ रही हैं शालिनी पुष्पम प्रिया की पार्टी से चुनाव लड़ रही हैं शालिनी
गोविंद कुमार
  • मुंगेर,
  • 21 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 4:27 PM IST
  • शालिनी कुमारी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला
  • अपनी लाइफ से जुड़े कुछ खास पलों को शेयर किया
  • प्लूरल्स पार्टी की उम्मीदवार शालिनी ने की चुनाव जिताने की अपील

बिहार विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं. सभी पार्टियों के नेता अपने अपने क्षेत्र में वोटरों को लुभाने में लगे हैं. मुंगेर विधानसभा सीट से इस बार प्लूरल्स पार्टी के उम्मीदवार शालिनी कुमारी चुनावी मैदान में हैं. उन्होंने बातचीत के दौरान विपक्ष पर जमकर हमला बोला वहीं अपनी लाइफ से जुड़े कुछ खास पलों को शेयर किया.

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शालिनी कुमारी से बातचीत के अंश....

सवाल : जब आपने राजनीति में आने की बात कही तो परिवार का क्या रिएक्शन था?
जवाब : जब हमने यह बात अपने परिवार को बताया कि हम राजनीति में आना चाहते हैं तो मेरे पापा (ससुर) 5 दिन तक रोए क्योंकि उनका कहना था बेटा हम लोग बहुत इज्जतदार लोग हैं राजनीति अच्छी जगह नहीं है. आप मेरी घर की बहू हैं पिछले साल आपकी शादी हुई है. आप जानती हैं आप कहीं निकलिए तो मेरे घर की इज्जत हैं. मेरे पापा बहुत रोए. मैंने अपने पापा को एक ही बात कही कि पापा आज मेरी अंतरात्मा बोल रही है कि यह चीजें बहुत अच्छी हैं और मुझे यहां बोलना चाहिए इसलिए पापा अगर आप अबकी बार नहीं सुने तो शायद जीवन भर हम अपने आप को माफ नहीं कर पाएंगे.

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सवाल : प्लूरल्स स्थापित राजनीतिक दलों के खिलाफ क्यों खड़ी हुई?
जवाब : हम सभी स्थापित राजनीतिक दल के खिलाफ हैं क्योंकि इनकी नीतियां बिल्कुल विकास के मार्ग में नहीं हैं. इनकी नीतियां भ्रष्टाचार के मार्ग में हैं. इसे तोड़ने के लिए ही हमारी पार्टी बनी है.

सवाल : बिहारवासी जाति के आधार पर वोटिंग के सामान्य मानदंडों के खिलाफ जाएंगे?
जवाब : जी बिल्कुल अपनाएंगे, बिहारी काफी सजग और बहुत बुद्धिमान है. सभी इसको समझ रहे हैं. जाति और धर्म की राजनीति करके लोग या पार्टी जो भी हैं यह सभी अपनी पिछली नाकामी को छुपाने का काम करती हैं. 

सवाल : बिहार अभी भी जाति के आधार पर ध्रुवीकृत है या आदर्श बदल रहा है?
जवाब : हां बिहार में हैं ऐसी चीजें, लोग कुछ नहीं देखते हैं, जाति को ज्यादा प्रधानता देते हैं. लेकिन यह बिहारी लोगों की मानसिकता नहीं है. इनकी मानसिकता ऐसी बनाई गई है कि आप ऐसे कीजिए यह आपके जाति के हैं. लोग यहां नेता के नाम से नफरत करते हैं. कितने लोग तो घर में घुसने नहीं देते हैं. प्रणाम नहीं करने देते हैं. कैसे चटक के चले जाते हैं. मुझे वह थप्पड़ ही नहीं लगाते बाकी सब कुछ कह देते हैं. उनकी इतनी बुरी हालत है कि लोग नेता के नाम से नफरत करते हैं.  

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सवाल : क्या आपकी पार्टी टिकट देते समय जाति के मैट्रिक्स और समीकरणों पर ध्यान दे रही है?
जवाब : नहीं, मेरी पार्टी बिल्कुल इन सब चीजों को नहीं देख रही है, यह देखने लायक चीजें भी नहीं है. अगर यह देखती तो शायद मैं इस पार्टी में नहीं होती. 

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सवाल : आपके विचार से बिहार की राजनीति में क्या बदलाव आएंगे?
जवाब : मेरे विचार से नहीं मेरी पार्टी इस चीज का दावा करती है कि हम आएंगे तो बिहार का संपूर्ण बदलाव होगा क्योंकि बिहार का कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें हम यह कह दें इस क्षेत्र में बिहार को बदलाव करने की जरूरत नहीं. इसलिए बिहार को संपूर्ण बदलाव की जरूरत है और मेरी पार्टी इस पर काम कर रही है. 

सवाल : इससे पहले आपके परिवार से कोई राजनीति में था?
जवाब : मेरे परिवार से कोई भी राजनीति में नहीं है. मेरे पति एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. दोनों भाई, भाभी और देवर भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. मेरे पापा और मां (सास-ससुर) मुखिया रह चुकी हैं. आज मेरे पापा के क्षेत्र में चले जाइए वहां की जो व्यवस्था है आप देख लीजिए. अपने घर तक सड़क ले जाने के लिए उन्होंने संघर्ष किया. इसलिए पापा को आज भी लोग सम्मान से देखते हैं. कहते हैं कि कोई नेता किसी के लिए हो उन लोगों के लिए मेरे पापा ही हैं. 

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सवाल : पार्टियां तो बहुत बड़ी-बड़ी हैं तो आपने प्लूरल्स को ही क्यों चुना?
जवाब : बिल्कुल पार्टियां हैं लेकिन कोई काम की पार्टियां नहीं हैं. वह जो भी है सिर्फ पार्टी ही है, काम नहीं करते हैं. प्लूरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट बहुत अच्छी महिला हैं. उन्होंने लड़कियों और औरतों को एक बहुत अच्छा सम्मानपूर्ण प्लेटफार्म दिया है. उनको लगता है की नैतिक मूल्यों और नैतिकता को समाज में बनाए रखने के लिए महिलाओं को भी पॉलिटिक्स में आने की बहुत ज्यादा जरूरत है. 

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