
पूर्णिया सदर विधानसभा पर सबकी नजरें हैं. इस हाई प्रोफाइल सीट पर साल 2000 से बीजेपी जमी हुई है और उसे कड़ी टक्कर कांग्रेस देती आई है, लेकिन 1969 के बाद से कांग्रेस यहां से जीत नहीं पाई है. इस बार यहां तीसरे चरण के तक 58.91% वोटिंग हुई है. उम्मीदवारों की किस्तम का फैसला 10 नवंबर को होगा.
पूर्णिया विधानसभा सीट पर अब तक 18 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें 3 उपचुनाव शामिल हैं. यहां से सबसे अधिक 6 बार बीजेपी जीती है. वहीं, 5 बार कांग्रेस, 4 बार सीपीएम, एक बार एलजेपी, जनता पार्टी और एनसीओ ने जीत दर्ज की है. 2015 के चुनाव में बीजेपी के विजय कुमार खेमका ने कांग्रेस की इंदु सिन्हा को 32,815 वोटों के अंतर से हराया था.
पूर्णिया सदर विधानसभा क्षेत्र पर 1980 से लेकर 1995 तक सीपीएम के अजीत सरकार का दबदबा रहा था. जून 1998 को सरकार की पूर्णिया में हत्या हो गई. उनकी हत्या के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी माधवी सरकार जीती थीं. 2000 से 2010 तक बीजेपी के राज किशोर केसरी यहां से जीतते रहे, लेकिन जनवरी 2011 में उनकी भी हत्या हो गई. उसके बाद हुए उपचुनाव में किरण देवी बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतीं थी. फिलहाल, इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है.
विधायक- विजय कुमार खेमका
पार्टी- बीजेपी
वोटरों की संख्या-2,82,122
वोटर टर्नआउट-66.2%
हार का अंतर-32,815
पोलिंग स्टेशन-265
इन उम्मीदवारों पर रहेगी नजर
इस सीट से 43 नामांकन दाखिल हुए. इसमें 38 स्वीकार किया गया, जबकि 3 रिजेक्ट और 2 उम्मीदवारों ने नामांकन वापस ले लिया था.
1- विजय कुमार खेमका(भाजपा)
2- इंदु सिन्हा(कांग्रेस)
कृषि पूर्णिया का मुख्य व्यवसाय है
पूर्णिया पूर्वोत्तर बिहार का सबसे बड़ा शहर है. कृषि पूर्णिया के लोगों का मुख्य व्यवसाय है. इस क्षेत्र में उगाए जाने वाले फसल धान, जूट, गेहूं, मक्का, मूंग, मसूर, गन्ना और आलू हैं. पूर्णिया जिले की जूट प्रमुख नकदी फसल है. नारियल, केला, आम, अमरूद, नींबू, जैक फलों, अनानस और केले जैसे फल पौधे यहां भी उगाए जाते हैं.
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