
संसद में कृषि संबंधी विधेयकों पर चर्चा के दौरान हंगामा करने वाले राज्यसभा से निलंबित किए गए विपक्ष के सभी आठ सांसदों ने मंगलवार को धरना खत्म कर दिया. लेकिन साथ ही पूरे विपक्ष ने मॉनसून सत्र के बहिष्कार का ऐलान भी साथ में ही कर दिया.राज्यसभा उपसभापति हरिवंश सिंह धरने पर बैठे सांसदों के लिए सुबह-सुबह चाय लेकर पहुंचे, जिसे निलंबित सांसदों ने पीने से मना कर दिया. इसी के कुछ देर बाद हरिवंश ने राज्यसभा के सभापति को चिट्ठी लिखकर अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि वो एक दिन का उपवास करेंगे. वहीं, हरिवंश सिंह के पीछे एनडीए मजबूती से खड़ा हुआ है. यह बताने की कोशिश कर रहा है कि विपक्ष ने उन्हें अपमानित करने का काम किया है. ऐसे में हरिवंश सिंह के चाय, चिट्ठी और उपवास के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं.
बता दें कि कृषि संबंधी विधेयकों को लेकर राज्यसभा में रविवार को जोरदार हंगामा हुआ था. सदन में विधेयक पर विपक्ष चर्चा के लिए अगले दिन तक कार्यवाही बढ़ाने की मांग कर रहा था, लेकिन सत्तापक्ष हर हाल में इसे उसी दिन पास कराना चाहता था. इसे लेकर विपक्ष के कई सदस्यों ने सदन में जमकर हंगामा किया. टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सदन में उपसभापति हरिवंश सिंह के चेयर के सामने आकर रूल बुक फाड़ दी थी. इसी के बाद उपसभापति ने बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया था.
सोमवार को संसद में हंगामा करने के चलते विपक्ष के आठ सांसदों को सभापति ने निलंबित कर दिया, जिसके बाद संसद भवन में निलंबित सांसद धरने पर बैठ गए और पूरी रात संसद परिसर में गुजार दी. ऐसे में धरने पर बैठे सांसदों के लिए मंगलवार को सुबह हरिवंश सिंह अपने घर से चाय लेकर पहुंचे. हरिवंश ने सभी सांसदों के लिए चाय परोसी, लेकिन धरने पर बैठे राज्यसभा सदस्यों ने चाय पीने से इनकार कर दिया. हरिवंश के चाय लेकर पहुंचने पर पीएम मोदी ने उनके इस व्यवहार की ट्वीट करके तारीफ की.
वहीं, निलंबित सांसदों ने हरिवंश सिंह की चाय नहीं पी जबकि वो कहते रहे कि हम सदन में उपसभापति हैं, यहां दोस्त है. इस पर टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, 'उस दिन रूल्स फॉलो नहीं किए गए. बीजेपी इसे बिहार चुनाव के लिए मुद्दा बना रही है.' वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा, 'हम यहां रिश्ते बनाने के लिए नहीं बैठे हैं. उस दिन उप सभापति ने संविधान को ताक पर रखकर बिल पास कराया. आज यहां आने का क्या मतलब है. हम यहां किसानो के लिए बैठे हैं.'
पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा कि जिन्होंने कुछ दिन पहले उनका अपमान किया, अब हरिवंश जी उनके लिए ही चाय लेकर पहुंचे हैं. बिहार सदियों से देश को लोकतंत्र की ताकत का एहसास कराते आया है. आज सुबह राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश जी ने जिस तरह का व्यवहार किया है, वह लोकतंत्र के चाहने वालों को गर्व महसूस कराएगा. पीएम ने कहा कि जिन सांसदों ने उनपर हमला किया और अपमान किया और अब धरने पर बैठ गए हैं, उनको ही हरिवंश जी चाय देने के लिए पहुंच गए. ये उनके बड़े दिल को दर्शाता है. पीएम मोदी बोले कि ये उनकी महानता को दिखाता है, पूरे देश के साथ मैं भी उन्हें बधाई देता हूं.
हरिवंश सिंह एक तरफ चाय लेकर गए थे और दूसरी तरफ उन्होंने संसदों के व्यवहार से दुखी होकर सभापति को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा भी बयां करते हुए एक दिन का उपवास करेंगे. उन्होंने पत्र में कहा कि 20 सितंबर को राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ, उससे मैं पिछले दो दिनों से आत्मपीड़ा, आत्म तनाव और मानसिक वेदना में हूं. मैं पूरी रात सो नहीं पाया. भगवान बुद्ध मेरे जीवन के प्रेरणास्रोत रहे हैं. उच्च सदन के मर्यादित पीठ पर मेरे साथ जो अपमानजनक व्यवहार हुआ, उसके लिए मुझे एक दिन का उपवास करना चाहिए. शायद मेरे इस उपवास से सदन में इस तरह का आचरण करने वाले सदस्यों के अंदर आत्मशुद्धि का भाव जागृत हो जाए. बिहार की धरती पर पैदा हुए राष्ट्रकवि दिनकर दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे.
बता दें कि हरिवंश सिंह के पीछे एनडीए पूरी मजबूती के साथ खड़ा है. हरिवंश सिंह ने अपने पत्र में बिहार का जिक्र किया. बीजेपी के तमाम नेता हरिवंश के प्रकरण को बिहार अस्मिता का मुद्दा बना रहे हैं. ऐसे में बिहार विधानसभा चुनाव के समीकरण को साधने की कवायद हो रही है. वहीं, हरिवंश ने चिट्ठी लिखकर अपनी पीड़ा भी बयां कर दी है, जिससे एनडीए को और भी आधार मिल गया है. साथ ही उपवास कर अपनी छवि को और भी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिसके जरिए विपक्ष के आरोपो पर अपने उपवास को भारी करना चाहते हैं.
वहीं, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को कांग्रेस और आरजेडी सदस्यों का उपसभापित के साथ व्यवहार का जिक्र किया, लेकिन टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और वामपंथी सदस्यों की चर्चा नहीं की. जबकि उच्चसदन में हंगामे में डेरेक ओ ब्राउन और संजय सिंह ही सबसे आगे-आगे नजर आ रहे थे. इसके बाद इन दोनों पार्टियों का नाम नहीं लिया, क्योंकि बिहार चुनाव में एनडीए का मुकाबला कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन से है. इसीलिए एनडीए हरिवंश के बहाने बिहार की राजनीतिक समीकरण को साधने की कोशिश की.