
बिहार का शिवहर जिला राज्य के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल है. बाढ़ इस जिले में हर साल एक बड़ी त्रासदी बनता है. तिरहुत प्रमंडल का यह एक जिला है. शिवहर पहले मुजफ्फरपुर फिर हाल तक सीतामढ़ी जिले का अंग रहा है. 6 अक्टूबर 1994 में यह सीतामढ़ी से अलग होकर बिहार का एक नया जिला बना.
इस जिले के पूर्व एवं उत्तर में सीतामढ़ी, पश्चिम में पूर्वी चंपारण तथा दक्षिण में मुजफ्फरपुर जिला स्थित है. शिवहर बिहार का सबसे छोटा एवं आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यंत ही पिछड़ा जिला है. बारिश एवं बाढ़ के दिनों में इसका संपर्क पड़ोसी जिलों से भी पूरी तरह कट जाता है. बज्जिका और हिन्दी यहां की मुख्य भाषाएं हैं.
सामाजिक तानाबाना
शिवहर क्षेत्र राजपूत बहुल सीट माना जाता है. यहां की सियासत पर राजपूत समाज का खासा प्रभाव है और चुनावी नतीजों में इसका साफ असर दिखता है. शिवहर जिला 442.99 वर्गकिलोमीटर में फैला है. यहां की आबादी 6 लाख 56 हजार 246 है. शिवहर की साक्षरता दर महज 37 फीसदी है. यहां खेती ही आय का प्रमुख साधन है. जिले में धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, गन्ना और तंबाकू प्रमुख खेती है.
देकुली मंदिर आस्था का केंद्र
जिले में देकुली शिव मंदिर आस्था का केंद्र है. यहां का बाबा भुवनेश्वर नाथ मंदिर बेहद प्राचीन है. इस मंदिर का धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व है. कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण द्वापर काल में किया गया था. एक ही पत्थर को तराश कर इस मंदिर का निर्माण किया गया है.
2015 का जनादेश
शिवहर जिले के लोग दो जिलों के विधायकों को चुनते हैं. पहला शिवहर और दूसरा शिवहर संसदीय सीट में आने वाला बेलसंड. परिसीमन में कोई बदलाव न होने के चलते पांच प्रखंड वाले शिवहर जिले के शिवहर, पिपराही, डुमरी कटसरी और पुरनहिया के लोग शिवहर विधानसभा से विधायक चुनते हैं. वहीं जिले के तरियानी के लोग सीतामढ़ी के बेलसंड विधानसभा से विधायक चुनते हैं.
शिवहर विधानसभा सीट की बात करें तो यहां से पिछले चुनाव में जेडीयू के शर्फुद्दीन ने जीत दर्ज की थी. उन्हें कुल 44576 वोट मिले थे. उन्हें हम प्रत्याशी की ओर से कड़ी टक्कर मिली थी. शर्फुद्दीन महज 461 वोटों से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए थे. वहीं बेलसंड विधानसभा सीट की बात करें तो वहां भी जेडीयू की सुनीता सिंह चौहान ने एलजेपी प्रत्याशी मोहम्मद नासिर को 5575 वोटों से मात दी थी.