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Chhattisgarh Result: डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव हारे, अंबिकापुर से नहीं लगा पाए जीत का चौका

अंबिकापुर के अगर जातिगत समीकरण की बात की जाए तो यहां करीब 50 फीसद एसटी वर्ग की आबादी है. यहां उरांव, कंवर और गोंड समाज का दबदबा है. साल 2018 में यहां कुल 2 लाख 25 हजार 830 मतदाता थे. अंबिकापुर विधानसभा सीट अनारक्षित है, लेकिन यहां आज भी जीत और हार में ग्रामीण और आदिवासी मतदाता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

टीएस सिंह देव अंबिकापुर से हैं चुनाव प्रत्याशी टीएस सिंह देव अंबिकापुर से हैं चुनाव प्रत्याशी
aajtak.in
  • अंबिकापुर,
  • 03 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 6:12 PM IST

Ambikapur Election Result: छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुआ था. इसमें छत्तीसगढ़ चुनाव में बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सभी को चौंका दिया है. कांग्रेस के कई दिग्गज अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं. सरगुजा क्षेत्र की अंबिकापुर विधानसभा सीट को काफी हाई प्रोफाइल माना जा रहा था. इसकी वजह ये थी कि यहां से खुद कांग्रेस के कद्दावर नेता और मौजूदा सरकार में डिप्टी सीएम टीएस सिंह देव चुनाव लड़ रहे थे. हालांकि उन्हें 157 वोटों से हार का सामना करना पड़ा है. 

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अंबिकापुर और सरगुजा को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. इसलिए इस सीट को जिताने का दारोमदार टीएस सिंह देव पर ही था. सरगुजा में उन्हें लोग प्यार से टीएस बाबा कहकर भी बुलाते हैं. पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव इस सीट से विधायक चुने गए.

सरगुजा के महाराजा के रूप में जाने जाने वाले टीएस सिंह देव का इस क्षेत्र में 14 सीटों पर गहरा प्रभाव है. टीएस बाबा को छत्तीसगढ़ का सबसे अमीर विधायक भी माना जाता है. इस बार फिर उनके सामने बीजेपी की तरफ से राजेश अग्रवाल थे. 

जातिगत समीकरण

अंबिकापुर के अगर जातिगत समीकरण की बात की जाए तो यहां करीब 50 फीसद एसटी वर्ग की आबादी है. इसमें भी उरांव, कंवर और गोंड समाज का दबदबा है. साल 2018 में यहां कुल 2 लाख 25 हजार 830 मतदाता थे. अंबिकापुर विधानसभा सीट अनारक्षित है, लेकिन यहां आज भी जीत और हार में ग्रामीण और आदिवासी मतदाता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. समीकरण के हिसाब से गोंड, कंवर, उरांव और रजवार समाज के मतदाता ही यहां सबसे अहम भूमिका में होते हैं.

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टीएस सिंह देव ने पांच राज्यों में 2018 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. जीत के बाद उनका नाम मुख्यमंत्री की रेस में था. हालांकि, उन्हें इस भूमिका के लिए नहीं चुना गया खा जिससे उस वक्त सरगुजा संभाग के लोगों काफी निराश हुए थे.

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