
गुजरात में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है. 27 साल से राज्य में बीजेपी का शासन है. इस बार कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी भी दमखम के साथ मैदान में हैं. ऐसे में ये चुनाव काफी रोचक हो गया है. बीजेपी के लिए सत्ता में वापसी की चुनौती है तो विपक्ष के सामने खुद को साबित करने की. गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के चुनावी मैदान छोड़ देने से मेहसाणा जिले की सात विधानसभा सीटों के लिए मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. जानिए क्या कहते हैं लोग...
मेहसाणा में स्थानीय स्तर पर बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं को कहना है कि नितिन पटेल के चुनाव नहीं लड़ने से जिले में पार्टी को नुकसान होने की संभावना है. बता दें कि 68 वर्षीय नितिन पटेल दो बार मेहसाणा शहर से भाजपा के विधायक रह चुके हैं. इससे पहले वे तीन बार अन्य सीटों से चुनाव लड़ चुके हैं. अब तक कुल पांच बार भाजपा विधायक रह चुके हैं. अपने पॉलिटिकल करियर में पटेल मुख्यमंत्री बनने के करीब तक आ गए थे. हालांकि, पार्टी ने विजय रूपाणी को तरजीह दी और मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया था.
नितिन को नहीं उतारने से पार्टी को उठाना पड़ेगा खामियाजा?
इस बार नितिन पटेल, विजय रूपाणी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने एक दिन पहले ही विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है, जिसके बाद पार्टी ने इन नेताओं को टिकट नहीं दिया है. अब कहा जा रहा है कि नितिन पटेल को चुनाव में नहीं उतारने का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि नितिन पटेल ने खुद मैदान नहीं छोड़ा, बल्कि के कहने पर चुनाव ना लड़ने का फैसला लिया होगा. बीजेपी नेता चिराग भरत कहते हैं कि नितिन भाई पटेल ने मेहसाणा के लिए बहुत काम किया है. यहां पर 7 सीटें जीतने के लिए पार्टी को उनके सहयोग की जरूरत है. उनके बिना सहयोग के पार्टी नहीं जीतेगी.
इसी तरह बीजेपी नेता हिरेन मकवाना ने कहा- पार्टी नए लोगों को लोगों का प्रतिनिधित्व करने का मौका देना चाहती है और इसीलिए वरिष्ठ नेताओं को बाहर निकलने के लिए कहा गया है. इसमें कुछ भी गलत नहीं है.
विष्णु पटेल कहते हैं कि बीजेपी ने नितिन पटेल को धोखा दिया है. पार्टी को उन्हें टिकट देना चाहिए था. एक स्थानीय कहते हैं कि अगर कांग्रेस नितिन भाई पटेल को शामिल करती है तो उसे फायदा हो सकता है. पटेल के कांग्रेस में शामिल होने पर भाजपा सभी सीटें गंवा देगी.
'नितिन ने काफी काम किया, टिकट देना चाहिए था'
वहीं, मेहसाणा शहर में कांग्रेस के अध्यक्ष भौटिक भट्ट विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी पर हमलावर दिखे. भट्ट कहते हैं कि बीजेपी के 27 साल के शासन के दौरान लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है. यहां पर महंगाई समेत कई बड़े मुद्दे रहे हैं. सिलेंडर की कीमत आसमान छू रही है और लोग परिवर्तन चाहते हैं जो आने वाले चुनावों में देखने को मिलेगा.
बताते चलें कि मेहसाणा में मतदाताओं के एक वर्ग में यह कहा जा रहा है कि पटेल को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के कारण भाजपा को नुकसान हो सकता है. लोग कहते हैं कि मेहसाणा में नितिन भाई पटेल ने काफी काम किया है. उन्हें पिछली बार मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था, लेकिन बीजेपी ने विजय रूपाणी को तरजीह दी. पार्टी को उन्हें टिकट देना चाहिए था.
आलोचना की वजह से तो नहीं कटा टिकट?
कई लोगों का मानना है कि नितिन पटेल को मोरबी त्रासदी में मुखर आलोचना के कारण बलि का बकरा बनाया गया है. पहले भी उन्हें मुख्यमंत्री ना बनाए जाने से नाखुश माना जाता था लेकिन उस समय उन्हें शांत किया गया था. आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता जयदीप सिंह ने कहा कि नितिन भाई पटेल भाजपा की अंदरूनी राजनीति के शिकार हो गए हैं. मेहसाणा चुनाव में आम आदमी पार्टी जिले की सभी 7 सीटों पर जीत हासिल करेगी.
सीएम, डिप्टी सीएम समेत 8 मंत्रियों के टिकट कटे
बता दें कि गुजरात चुनाव से पहले पूर्व सीएम विजय रुपाणी और पूर्व डिप्टी सीएम नितिन पटेल ने इलेक्शन नहीं लड़ने का ऐलान किया है. पूर्व सीएम रुपाणी ने ऐलान किया है कि वे इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे. वहीं नितिन पटेल ने सीआर पाटिल (बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष) को खत लिखा है. इसमें कहा गया है कि वह भी चुनाव नहीं लड़ना चाहते. इन दोनों के अलावा कुछ अन्य भी नाम सामने आए हैं जिन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है. रुपाणी सरकार के कुल 8 मंत्रियों ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है.
गुजरात के ये पूर्व मंत्री नहीं लड़ेंगे चुनाव
गुजरात में कब हैं चुनाव?
गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान कराया जाना है. गुजरात में 1 और 5 दिसंबर को दो चरणों में वोटिंग होगी. 8 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश के चुनावी नतीजों के साथ रिजल्ट घोषित किए जाएंगे.