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Gujarat Election 2022: लगातार 6 जीत के बाद जूनागढ़ सीट से हारी थी बीजेपी, क्या कांग्रेस रख पाएगी जीत बरकरार?

जूनागढ़ सीट पर 24 साल तक काबिज रहने वाले बीजेपी के महेंद्र मशरू को साल 2017 में हार का सामना करना पड़ा था. उन्हें कांग्रेस के भीखा गला जोशी ने 6 हजार वोटों से हराया था.

सांकेतिक तस्वीर. सांकेतिक तस्वीर.
भार्गवी जोशी/गोपी घांघर
  • जूनागढ़,
  • 23 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST
  • 24 सालों तक जूनागढ़ के विधायक रहे बीजेपी के महेंद्र मशरू
  • 2017 में कांग्रेस के भीखा गला जोशी ने 6 हजार वोटों से हराया

जूनागढ़ शहर गुजरात का सातवां सबसे बड़ा शहर है. 1998 से भाजपा लगातार यह सीट जीतती आ रही थी. लेकिन साल 2017 में बीजेपी के महेंद्र मशरू को हराकर कांग्रेस के भीखा गला जोशी ने जीत हासिल की थी. उन्होंने मशरू के 6 हजार वोटों से हराया. भीखा गला जोशी 49.60% जबकि महेंद्र मशरू को 45.67% वोट मिले थे.

यहां 1962 में पहला चुनाव हुआ था. तब से कोई जाति या पक्ष आधारित नहीं बल्कि व्यक्ति को उसकी छवि ओर पहचान पर वोट मिले थे. जूनागढ़ सीट जो कि बीजेपी का गढ़ मानी जाती थी उसका कारण था महेंद्र मशरू, जो 1998 में बीजेपी में जुड़े ओर यहां के विधायक बने. 2012 तक लगातार छह बार साफ सुथरे प्रमाणिक छवि के कारण महेंद्र मशरू ही जीतते आ रहे थे. सरकारी बस या साइकल पर सवार होकर विधानसभा पहुंचने वाले मशरू लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं.

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24 साल तक लगातार जीतने के बाद साल 2017 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस के भीखा गला जोशी फिलहाल यहां के विधायक हैं. 24 साल विधायक रहने के बावजूद जूनागढ़ का विकास करने में मशरू नाकाम साबित रहे. जिससे लोगों की नाराजगी 2017 के परिणामों में दिखी.

भौगोलिक स्थिति
गुजरात के पश्चिमि क्षेत्र में अरबसागर के तट पर स्थित है जूनागढ़. 9 नवम्बर 1947 को आजाद हुए जूनागढ़ की खुद की एक अलग पहचान है. आज भी पाकिस्तान जूनागढ़ को उनके नक्शे में दिखाता है. जूनागढ अहमदाबाद से 300 किमी, राजकोट से 100 किमी और सोमनाथ से 90 किमी की दूरी पर है.

सामाजिक तानाबाना / चुनावी मुद्दा
यहां उद्योग या फैक्ट्री जैसा कोई बड़ा उद्योग नहीं है. ज्यादातर लोग खेती करते हैं या गृहउद्योग चलाते हैं. टूरिज्म भी यहां एक अच्छी आमदनी का साधन है. किसानों की समस्या ही राजनीतिक चुनाव का मुद्दा रहती है. यहां तूफान ओर मौसम की मार से किसान परेशान रहते हैं. यहां राजनीति में किसान, बिजली और पानी जैसे मुद्दों पर विधायक की जीत या हार तय होती है.

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पहले जूनागढ़ जिले में 9 सीटें हुआ करती थीं पर पोरबंदर ओर गिर सोमनाथ जिले घोषित होने के बाद अब पांच सीटें ही रह गई हैं. सौराष्ट्र में राजकोट के बाद की अहम बैठक जूनागढ़ मानी जाती है. जहां बीजेपी फिर से जीत हासिल करने के लिए महेनत कर रही है.

मतदाताओं की संख्या
जूनागढ़ सीट में कुल 255571 मतदाता हैं. जिनमें से 132393 पुरुष मतदाता, 123168 महिला मतदाता और 10 अन्य मतदाता हैं. साल 2017 में 59.63% वोटिंग की गई थी.

विधायक का परिचय
74 साल के भीखा गला जोशी ने बीजेपी के विधायक को 2017 में हराया. 79 साल के भीखा गला आज भी सक्रिय होकर कार्य करते हैं. पिछले पांच सालों में विधानसभा में जूनागढ़ के प्रश्नों को लेकर कई बार आवाज उठाई पर कोई ठोस योजना या उद्योग जूनागढ़ को नहीं दिलवा पाए.
'दादा' के नाम से जाने जाते भीखा गला जोशी सामान्य व्यक्तित्व रखते हैं. कोरोना काल में उन्होंने आम जनता की काफी मदद की है.

सामाजिक स्थिति
जूनागढ़ की बैठक में 32% मतदाता पटेल हैं. बाकी 40% में ब्राह्मण, लोहाणा, बनिया शामिल हैं. इसके अलावा इस्लाम, सिंधी ओर अन्य जाति के मतदाता भी हैं. 88% लोग यहां शिक्षित हैं.

 

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