
गुजरात में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव (gujarat vidhan sabha election) होने हैं, जिसके लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कमर कस ली है. जानकारी के मुताबिक, बीजेपी ने 150 सीटें (कुल 182 में से) जीतने का टारगेट रखा है. इसके लिए उसकी नजर ओबीसी, दलित और आदिवासी वोटर पर है. बीजेपी अपने पांरपारिक शहरी वोटर के साथ साथ गांव के ओबीसी, दलित और आदिवासी वोटर पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है.
जानकारी के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री बी एल संतोष ने बीजेपी के नेता और संगठन के साथ साथ आरएसएस के साथ भी मीटिंग की है.
सूत्र बताते हैं कि गुजरात में जल्द चुनाव की फिलहाल ज्यादा संभावना नहीं है, लेकिन वक्त पर चुनाव होते हैं तो बीजेपी 150 सीटों के अपने टारगेट को कैसे पूरा कर सकती है, इसपर चर्चा हुई.
कांग्रेस के वोटबैंक में सेंधमारी की तैयारी
माना जाता है कि गांव का ओबीसी, दलित और आदिवासी वोटर कांग्रेस का पांरपारिक वोट बैंक है. कहा जाता है कि अगर कांग्रेस विधायक कोई भी काम ना करें तब भी उनको 40-50 सीट इन इलाकों से मिल जाएगी.
गुजरात में इसबार मुख्य टक्कर बीजेपी और कांग्रेस में ही नहीं है. यहां आम आदमी पार्टी (आप) भी मैदान में है. अगर AAP शहरी इलाकों में पकड़ बनाएगी तो बीजेपी के वोट बंटने का अनुमान है.
फिलहाल बीजेपी के महामंत्री ने RSS पदाधिकारियों संग 182 सीटों में से 100 से ज्यादा सीटों के लिए विस्तारक नियुक्त किये हैं. इनपर बूथ मैनेजमेंट की जिम्मेदारी है, ताकि इलाके के ज्यादा से ज्यादा वोट कमल को पड़ें.
बीजेपी करेगी नये प्रयोग
बीजेपी इस बार गुजरात में कुछ नये प्रयोग भी कर सकती है. हो सकता है कि इसबार 65 साल से ज्यादा और तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके लोगों को टिकट नहीं मिले. चर्चा इस बात की भी हुई है कि जिन सीटों पर बीजेपी कई सालों से नहीं जीती है वहां से महिला उम्मीदवार को टिकट दिया जाए.