
गुजरात चुनाव में आणंद विधानसभा सीट कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण है. अमूल दूध डेयरी की वजह से आणंद जिला विश्व विख्यात है. यह मूल रूप से खेड़ा जिले का हिस्सा था, जिससे अलग होकर साल 1997 में अस्तित्व में आया. पिछले चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. इससे पहले इस सीट पर बीजेपी का कब्जा था.
क्या है मतदाता समीकरण
इस सीट पर 1 लाख 60 हजार 612 पुरुष और 1 लाख 55 हजार 458 महिला व 4 अन्य मतदाता हैं. साल 2011 की जनगणना के अनुसार, कुल 3 लाख 52 हजार 873 की जनसंख्या में से 14.32 प्रतिशत ग्रामीण और 85.68 प्रतिशत शहरी हैं. कुल जनसंख्या में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का अनुपात क्रमशः 4.35 और 3.35 है. इस सीट पर ओबीसी, क्षत्रिय और पाटीदार समुदायों का प्रभाव है. मुस्लिम और ईसाई वोट भी काफी निर्णायक माने जाते हैं.
क्या है सियासी समीकरण
साल 2017 में बीजेपी ने कांग्रेस से आए योगेश पटेल को टिकट दिया था. इससे संगठन में काफी आक्रोश था. जिसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ा और यह सीट हारनी पड़ी. आणंद विधानसभा सीट पर अब तक 14 बार चुनाव हुआ है. इसमें 2014 का उपचुनाव भी शामिल है. इसमे 6 बार बीजेपी और 6 बार कांग्रेस की जीत हुई है.
क्या हैं लोगों की समस्याएं
साल 1995 में आणंद जिला खेड़ा जिले से अलग होकर बन गया. आणंद जिले में अभी भी सरकारी अस्पताल का अभाव है. स्वास्थ्य सेवाओं, सड़कों, स्वच्छता, उद्योग और सिंचाई से जुड़े मुद्दे यहां की मुख्य समस्याएं हैं. राजनीति के जानकारों का कहना है कि मुख्य मुद्दों के साथ सत्ताधारी बीजेपी को इस चुनाव में भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों का भी सामना करना पड़ेगा.
पिछले चुनाव का परिणाम
कांग्रेस: कांतिभाई परमार को 98 हजार 168 वोट मिले
बीजेपी: योगेश पटेल को 92 हजार 882 वोट मिले