
कांग्रेस ने सभी कयासों पर विराम लगाते हुए लोकसभा चुनाव 2019 के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया है. इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ऐसी 'अफवाहें' हैं कि कांग्रेस का भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ 'गुप्त समझौता' है. उनकी आम आदमी पार्टी इस नापाक गठबंधन से लड़ने को तैयार है.
आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला कांग्रेस की दिल्ली इकाई की बैठक में लिया गया. यह बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के आवास पर हुई जिसमें शीला दीक्षित भी मौजूद थीं. शीला दीक्षित ने कहा, "कांग्रेस ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि AAP के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा. यह निर्णय राहुल गांधी की उपस्थिति में लिया गया और यह अंतिम है."
आम आदमी पार्टी ने 2 मार्च को यह दावा करते हुए दिल्ली की 7 में से 6 लोकसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए थे कि कांग्रेस ने पहले ही गठबंधन के लिए इनकार कर दिया है. जहां कांग्रेस की दिल्ली इकाई शुरुआत से ही AAP के साथ गठबंधन नहीं करने के लिए दृढ़ रही है, वहीं केंद्रीय नेतृत्व बीजेपी के खिलाफ सभी विपक्षी पार्टियों को साथ लाने की जरूरत की बात करते हुए इसकी संभावना तलाश रहा था.
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 6 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है. पार्टी ने नई दिल्ली संसदीय सीट से बृजेश गोयल, पूर्वी दिल्ली से आतिशी, उत्तर पूर्वी दिल्ली से दिलीप पांडेय, दक्षिणी दिल्ली से राघव चड्ढा, चांदनी चौक से पंकज गुप्ता और उत्तर पश्चिम दिल्ली से गुगन सिंह को उम्मीदवार बनाया है.
शीला दीक्षित की घोषणा के बाद अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, ''ऐसे समय जब पूरा देश मोदी-शाह को हराना चाहता है, कांग्रेस विरोधी वोटों को बांटकर बीजेपी की मदद कर रही है. ऐसी अफवाहें हैं कि कांग्रेस का बीजेपी के साथ गुप्त समझौता है.'' उन्होंने कहा, ''दिल्ली कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन के खिलाफ लड़ने को तैयार है. जनता इस नापाक गठबंधन को हराएगी.''
आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली में गठबंधन को लेकर कांग्रेस जिस तरह लुका छिपी खेल रही थी, उस खेल का आज राहुल गांधी और शीला दीक्षित की बैठक के बाद स्पष्ट है कि देश और कांग्रेस की भावना अलग अलग है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस गठबंधन नहीं चाहती है. लेकिन उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल में जिस तरह कांग्रेस स्वतंत्र उम्मीदवार उतारने की ज़िद पर अड़ी है, ऐसा लगता है कि कांग्रेस और बीजेपी का अघोषित गठबंधन हो गया है.