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मालदा के SP का आयोग ने किया ट्रांसफर, चुनावी ड्यूटी पर न लगाने के निर्देश

चुनाव आयोग की ओर से जारी आदेश में पश्चिम बंगाल सरकार को अर्नब घोष की जगह पुलिस सेवा के अधिकारी अजय प्रसाद को मालदा के पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात करने को कहा गया है. अजय प्रसाद, राज्य सशस्त्र पुलिस बल के भी चीफ हैं.

पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर में ममता बनर्जी की पदयात्रा (फोटो-twitter/AITCofficial) पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर में ममता बनर्जी की पदयात्रा (फोटो-twitter/AITCofficial)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 11:12 PM IST

चुनाव आयोग ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के पुलिस अधीक्षक अर्नब घोष का ट्रांसफर कर दिया है. इस बावत चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को आदेश दिया है. मालदा में 23 अप्रैल को मतदान होना है. चुनाव आयोग द्वारा ये कार्रवाई बीजेपी की ओर से कई बार की गई शिकायतों के बाद की गई है.

चुनाव आयोग की ओर से जारी आदेश में पश्चिम बंगाल सरकार को अर्नब घोष की जगह पुलिस सेवा के अधिकारी अजय प्रसाद को मालदा के पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात करने को कहा गया है. अजय प्रसाद, राज्य सशस्त्र पुलिस बल के भी चीफ हैं.

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बता दें मालदा में लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में 23 अप्रैल को मतदान होना है. चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को यह भी स्पष्ट किया है कि अर्नब घोष को राज्य में कहीं भी चुनाव ड्यूटी पर तैनात नहीं किया जाए.

चुनाव आयोग ने हाल ही में राज्य के कुछ दूसरे सीनियर पुलिस ऑफिसर का भी तबादला किया था. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया था और कहा था कि चुनाव आयोग पर बीजेपी के इशारे पर काम कर रही है. हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ये कार्रवाई उसके अपने संवैधानिक अधिकार के दायरे में ही किया है.

वहीं ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल के विशेष पर्यवेक्षक अजय वी नायक को हटाने की मांग की है. टीएमसी का आरोप है कि अजय वी नायक ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में अभी हालात वैसे ही हैं जैसे 10 साल पहले बिहार में हुआ करते थे. टीएमसी ने कहा कि अजय वी नायक ने यह भी कहा था कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र में सब कुछ ठीक नहीं है.

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चुनाव आयोग को लिखे पत्र में टीएमसी ने कहा है कि विशेष पर्यवेक्षक का ये बयान आपत्तिजनक है. टीएमसी का कहना है कि अजय वी नायक रिटॉयर्ड अधिकारी है उन्हें किसी राज्य सरकार ने भी फिर से नियुक्त नहीं किया है, ऐसे अधिकारी की नियुक्ति कानूनन वैध नहीं है. टीएमसी ने चुनाव आयोग इस अधिकारी को हटाने की मांग की है.

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