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जमुई सीट: महागठबंधन से लड़ाई में चिराग पाासवान कैसे बचाएंगे अपनी सीट?

बिहार की जमुई संसदीय सीट पर इस बार सीधी टक्कर लोक जन शक्ति पार्टी के चिराग पासवान और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के भूदेव सिंह के बीच है. दोनों प्रत्याशियों के पास पर्याप्त जनाधार है. अन्य उम्मीदवारों में सोशियलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया(कम्युनिस्ट) से पंकज कुमार, भारतीय दलित पार्टी से अजय कुमार, और बहुजन समाज पार्टी से उपेंद्र रविदास सामने हैं. विष्णु प्रिया बहुजन मुक्ति पार्टी से, हिंदुस्तान निर्माण दल से वाल्मीकि पासवान चुनाव लड़ रहे हैं.

(फाइल फोटो- राम विलास पासवान के साथ चिराग पासवान) (फाइल फोटो- राम विलास पासवान के साथ चिराग पासवान)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

बिहार की जमुई संसदीय क्षेत्र इस बार भी आरक्षित अनुसूचित जाति के लिए है. यहां से लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान चुनाव लड़ रहे हैं. अगर राजनीतिक हैसियत की बात करें तो यहां सीधी लड़ाई महागठबंधन के समर्थन वाली पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूदेव सिंह और चिराग पासवान की है. दोनों नेताओं के पास पर्याप्त जनाधार है. चिराग पासवान युवाओं में खासे लोकप्रिय माने जाते हैं. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) और महागठबंधन के बीच यह लड़ाई दिलचस्प होने वाली है.

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अन्य उम्मीदवारों में सोशियलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया(कम्युनिस्ट) से पंकज कुमार, भारतीय दलित पार्टी से अजय कुमार, और बहुजन समाज पार्टी से उपेंद्र रविदास चुनाव लड़ रहे हैं. विष्णु प्रिया बहुजन मुक्ति पार्टी से, हिंदुस्तान निर्माण दल से वाल्मीकि पासवान चुनाव लड़ रहे हैं. निर्दलीय विरेंद्र कुमार और सुभाष पासवान चुनाव लड़ रहे हैं. कुल मिलाकर इस संसदीय क्षेत्र से 12 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. जमुई में पहले चरण में 11 अप्रैल को वोटिंग होगी.

जमुई लोकसभा सीट सुरक्षित सीट है. 2014 में यहां से लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी चिराग पासवान चुनाव लड़े थे. चिराग पासवान ने अभिनय की दुनिया में भी काम किया है, लेकिन 2014 में सांसद बनने के बाद उन्हें फिल्म जगत को अलविदा कह दिया.

जमुई सीट पर पहली बार 1962 में चुनाव हुआ था. 1962 और 1967 के चुनाव में जमुई सीट पर कांग्रेस जीती. इसके बाद 1971 में सीपीआई के भोला मांझी को यहां से जीत मिली थी. फिर इस सीट के इलाके अलग-अलग सीटों में शामिल कर लिए गए.  2002 के परिसीमन के बाद 2008 में जमुई सीट फिर से अस्तित्व में आई. 2009 के चुनाव में जेडीयू के भूदेव चौधरी ने आरजेडी के श्याम रजक को 30 हजार वोटों से हराया. 2014 के चुनाव में बीजेपी की सहयोगी एलजेपी के चिराग पासवान ने आरजेडी के सुधांशु शेखर भास्कर को हराया.

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जमुई संसदीय सीटों में वोटरों की कुल संख्या 1,404,016 है. इसमें से महिला मतदाता 651,501 हैं जबकि 752,515 पुरुष मतदाता हैं.

जमुई लोकसभा सीट तीन जिलों जमुई, मुंगेर और शेखपुरा के इलाकों को मिलाकर बना है. इसलिए समय-समय पर परिसीमन के साथ ही इस सीट का अस्तित्व भी बनता-बिगड़ता रहा है. जमुई संसदीय क्षेत्र में विधानसभा की 6 सीटें हैं. तारापुर, शेखपुरा, सिकंदरा, जमुई, झांझा और चकई. इनमें से 4 विधानसभा सीटें जमुई जिले में आती हैं. जबकि एक मुंगेर और एक शेखपुरा जिले में.

2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इन 6 सीटों में से 2-2 सीटें जेडीयू-आरजेडी के खाते में जबकि 1-1 सीट बीजेपी और कांग्रेस के खाते में गई थी.

2014 के लोकसभा चुनाव में जमुई (सुरक्षित) सीट से एलजेपी उम्मीदवार और रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और आरजेडी उम्मीदवार सुधांशु शेखर भास्कर को 85,947 मतों से पराजित किया था. चिराग पासवान को 2,85,352 वोट मिले, जबकि आरजेडी के सुधांशु शेखर भास्कर को 1,99,407 वोट. वहीं जेडीयू उम्मीदवार तथा बिहार के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी 1,98,599 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे. 16वीं लोकसभा के दौरान चिराग पासवान ने 18 बहसों में हिस्सा लिया. विभिन्न मुद्दों से जुड़े 81 सवाल उन्होंने संसद के पटल पर पूछे.

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