
बिहार की मधेपुरा लोकसभा सीट पर 13 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है. बिहार की मधेपुरा लोकसभा सीट पर इस बार जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन और जेडीयू के दिनेश चंद्र यादव के बीच कांटे का मुकाबला है. कभी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे शरद यादव इस बार आरजेडी से चुनावी मैदान में हैं. बहुजन मुक्ति पार्टी, राष्ट्रवादी जनता पार्टी, आम अधिकार मोर्चा, बलिराजा पार्टी, असली देशी पार्टी और 5 निर्दलीय भी ताल ठोंक कर चुनावी मैदान में हैं.
लोकसभा चुनाव अपडेट्स
- बिहार की वीआईपी लोकसभा सीट मधेपुरा पर 2019 के लोकसभा चुनाव में 59.14 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया. हालांकि बिहार में मतदान का प्रतिशत 59.97 रहा है. 2014 में इस सीट पर 58.74 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था.
- 3 बजे तक बिहार में 46.94 फीसदी मतदान हो चुका है.
- दोपहर 1 बजे तक मधेपुरा में 36.31 फीसदी मतदान हो चुका है. वहीं देश में तीसरे चरण में कराए जा रहे मतदान में 117 संसदीय सीटों पर अब तक 37.89 फीसदी मतदान हो चुका है.
-सुबह 9 बजे तक मधेपुरा में 8.75 फीसदी मतदान हो चुका है.
प्रचार के दौरान ऐसा रहा माहौल
28 मार्च को इस सीट पर नॉमिनेशन भरने के बाद से इलाके में राजनीतिक दलों का प्रचार शुरू हो गया था. अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने रैली और सभाओं को आयोजन किया. मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार थमा तो प्रत्याशियों ने घर-घर जाकर संपर्क किया. प्रत्याशियों की मेहनत क्या रंग लाती है, ये तो 23 मई को पता लगेगा.
उम्मीदवारों के प्रोफाइल के बारे में पढ़ें- मधेपुरा: पप्पू यादव और दिनेश यादव में निर्णायक जंग, शरद यादव को दल बदल कर जीत की तलाश
देश में 17वीं लोकसभा के लिए 543 लोकसभा सीटों पर 7 चरणों में मतदान कराए जा रहे हैं. 10 मार्च को लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा हुई थी. 28 मार्च को इस सीट के लिए नोटिफिकेशन निकला, 4 अप्रैल को नॉमिनेशन की अंतिम तारीख और 5 अप्रैल को उम्मीदवारों द्वारा दिए गए शपथपत्रों की स्क्रूटनी हुई. नाम वापसी की अंतिम तारीख 8 अप्रैल थी. लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण में 14 राज्यों की 117 लोकसभा सीटों पर मतदान कराया गया.
इस लोकसभा सीट के बारे में और जानने के लिए पढ़ें- मधेपुरा लोकसभा सीट: शरद यादव और पप्पू यादव की दावेदारी से स्थिति रोचक
बिहार की मधेपुरा लोकसभा सीट हाईप्रोफाइल सीट मानी जाती है. आरजेडी चीफ लालू प्रसाद का ये गढ़ रहा है तो बाहुबली पप्पू यादव और शरद यादव के बीच की सियासी जंग भी यहां के वोटरों के लिए हमेशा रुचि का विषय रहता है. मधेपुरा जिला उत्तर में अररिया और सुपौल, दक्षिण में खगड़िया और भागलपुर जिला, पूर्व में पूर्णिया तथा पश्चिम में सहरसा जिले से घिरा हुआ है. मधेपुरा की आबादी है 1,508,361. राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मधेपुरा से सांसद हैं. ये जिला मंडल आयोग के अध्यक्ष रहे बी. पी. मंडल का पैतृक जिला है. जो द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भी रहे जिसे मंडल आयोग के नाम से जाना जाता है और जिनकी रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी वर्ग को देश में आरक्षण मिला.
शरद यादव और पप्पू यादव की उपस्थिति से स्थिति रोचक
मधेपुरा लालू यादव का मजबूत गढ़ माना जाता है. आरजेडी चीफ लालू यादव दो बार मधेपुरा सीट से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. मधेपुरा से 2014 में पप्पू यादव ने आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीते थे. अब पप्पू यादव अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं. तब शरद यादव जेडीयू के नेता थे अब वे भी आरजेडी में जा चुके हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
1967 के चुनाव में मधेपुरा सीट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल ने चुनाव जीता. 1968 के उपचुनाव में भी जीत उन्हीं के हाथ लगी. 1971 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के चौधरी राजेंद्र प्रसाद यादव ने चुनाव जीता. 1977 के चुनाव में फिर भारतीय लोक दल के टिकट पर बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल ने चुनाव जीता. 1980 के चुनाव में फिर इस सीट को चौधरी राजेंद्र प्रसाद यादव ने छीन लिया. 1984 के चुनाव में मधेपुरा सीट पर कांग्रेस के चौधरी महावीर प्रसाद यादव विजयी रहे. 1989 में जनता दल ने इस सीट से चौधरी रमेंद्र कुमार यादव रवि को उतारा और उन्होंने जीत का परचम लहराया.
इसके बाद जेपी आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले शरद यादव ने मधेपुरा को अपनी सियासी कर्मभूमि के रूप में चुना. 1991 और 1996 के चुनाव में जनता दल के टिकट पर यहां से जीतकर शरद यादव लोकसभा पहुंचे. 1998 में आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने यहां से चुनाव जीता. 1999 में फिर शरद यादव जेडीयू के टिकट पर यहां से चुनाव जीते. 2004 में फिर लालू प्रसाद यादव ने इस सीट से विजय पताका फहराई. लालू ने इस चुनाव में छपरा और मधेपुरा दो सीटों से लोकसभा का चुनाव जीता. हालांकि, मधेपुरा से उन्होंने इस्तीफा दे दिया और इसके बाद फिर उपचुनाव हुए. इस बार आरजेडी के टिकट पर राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव जीतकर लोकसभा पहुंचे. 2009 में यहां से जेडीयू के शरद यादव फिर जीतने में कामयाब रहे. लेकिन 2014 में यहां से पप्पू यादव की चुनावी किस्मत एक बार फिर खुली और वे आरजेडी के टिकट पर जीतकर लोकसभा पहुंचे. हालांकि बाद में उन्होंने आरजेडी से नाता तोड़ लिया और अपनी अलग पार्टी बना ली.
विधानसभा सीटों का समीकरण
2008 के परिसीमन के बाद मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- आलमनगर, बिहारीगंज, मधेपुरा, सोनबरसा, सहरसा और महिषी. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इन 6 सीटों में से 3 पर जेडीयू और 3 पर आरजेडी की जीत हुई थी.
2014 चुनाव का जनादेश
16वीं लोकसभा के लिए 2014 में हुए चुनाव में मधेपुरा सीट से पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन ने आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा. हालांकि, बाद में पप्पू यादव आरजेडी से अलग हो गए और उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली. पप्पू यादव को 368937 वोट मिले. तब जेडीयू के टिकट पर शरद यादव उनके सामने थे. शरद यादव को 312728 वोट मिले. बीजेपी के विजय कुमार सिंह 2,52,534 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे. इससे पहले 2009 के चुनाव में यहां से जेडीयू के टिकट पर शरद यादव जीते थे. शरद यादव को 370585 वोट मिले थे. तब उनके सामने थे आरजेडी उम्मीदवार प्रो. रविन्द्र चरण यादव जिन्हें 192964 वोट हासिल हुए थे.
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