
सुपौल सीट पर जेडीयू उम्मीदवार दिलेश्वर कामत जीत गई हैं. दिलेश्वर काम ने 2,66,853 वोटों से जीत दर्ज की है. कामत को कुल 5,97,377 वोट हासिल हुए हैं. दूसरे नंबर पर कांग्रेस उम्मीदवार रंजीत रंजन को 3,30,524 मत प्राप्त हुए हैं.
सुपौल बिहार की हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है क्योंकि यहां से बाहुबली पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन सांसद हैं. सुपौल सहरसा जिले से 14 मार्च 1991 को विभाजित होकर अलग जिले के रूप में अस्तित्व में आया. सुपौल सहरसा फारबिसगंज रेलखंड पर स्थित है.
कब और कितनी हुई वोटिंग
सुपौल लोकसभा सीट पर 23 अप्रैल को तीसरे चरण में वोट डाले गए थे. इस सीट पर 1689273 पंजीकृत मतदाता (चुनाव आयोग के मुताबिक) हैं, जिसमें से 1109509 ने वोट डाला. इस सीट पर 65.68 प्रतिशत वोटिंग हुई.
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प्रमुख उम्मीदवार
कांग्रेस ने मौजूदा सांसद रंजीत रंजन को दोबारा टिकट दिया था, जिनका सामना जेडीयू के दिलेश्वर कैमत से था. वहीं बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रवादी जनता पार्टी, जय हिंद पार्टी, बिहार लोक निर्माण दल, वंचित समाज पार्टी, जम्मू एंड कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी, लोक सेवा दल, शिवसेना, आम जनता पार्टी राष्ट्रीय, जन अधिकार पार्टी, हिंद साम्राज्य पार्टी जैसे दलों के साथ 7 निर्दलीय भी चुनाव मैदान में थे.
2014 का चुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में विजयी उम्मीदवार कांग्रेस की रंजीत रंजन को 332927 वोट हासिल हुए. नंबर दो पर रहे जेडीयू के दिलेश्वर कमैत जिन्हें 273255 वोट मिले. तीसरे स्थान पर रहे बीजेपी के उम्मीदवार कामेश्वर चौपाल को 249693 वोट मिले.
सामाजिक ताना-बाना
सुपौल उत्तर में नेपाल, दक्षिण में मधेपुरा, पश्चिम में मधुबनी और पूर्व में अररिया जिले से घिरा हुआ है. यह इलाका कोसी नदी के पानी से हर साल आने वाले बाढ़ से प्रभावित होता रहता है. इस इलाके में बाढ़ और रोजगार के लिए पलायन सबसे बड़ी समस्या है. क्षेत्रफल के आधार पर यह कोसी प्रमंडल का सबसे बड़ा जिला है. वीरपुर, त्रिवेणीगंज, निर्मली, सुपौल इसके अनुमंडल हैं.
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सीट का इतिहास
परिसीमन के बाद 2008 में सुपौल लोकसभा सीट अलग से अस्तित्व में आई. 2009 के चुनाव में यहां से जेडीयू के विश्व मोहन कुमार सांसद बने. 2009 के चुनाव में रंजीत रंजन ने सुपौल सीट से अपनी किस्मत आजमाई थीं. लेकिन तब रंजीत रंजन जेडीयू के विश्व मोहन कुमार से डेढ़ लाख वोटों से हार गई थीं. लेकिन 2014 का चुनाव रंजीत रंजन ने कांग्रेस के टिकट पर सुपौल सीट से लड़ा. मोदी लहर के बावजूद रंजीत रंजन ने 60000 वोटों से जेडीयू के उम्मीदवार दिलेश्वर कमैत को हरा दिया और लोकसभा पहुंचीं.
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