
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों एवं रुझानों के आकड़ों में INDIA गठबंधन बीजेपी के नेतृत्व वाली NDA को कड़ी टक्कर देता नजर आ रहा है. चुनाव परिणाम ने न सिर्फ सबको हैरत में डाला बल्कि कई सीटें ऐसी रहीं जहां बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. इन्हीं सीटों में शामिल है उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट. कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट को 2019 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने बीजेपी के झोली में डाल डिया था. तब स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर सबको न सिर्फ सबको चौंका दिया था, बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास में एक ऐसी मिसाल कायम की जिसपर बरसों तक बात की जाती रहेगी. लेकिन, अब कांग्रेस अमेठी लोकसभा सीट वापस जीतती नजर आ रही है. इस चुनाव में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को कांग्रेस के पुराने कार्यकर्त्ता एवं गांधी परिवार के करीबी रहे किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार का समाना करना पड़ रहा है.
2024 अमेठी सीट का परिणाम
अमेठी लोकसभा सीट पर किशोरी लाल शर्मा बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी से करीब एक लाख 64 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं. इस सीट पर शुरू से ही कांग्रेस को लगातार मिल रही बढ़त के बीच प्रियंका गांधी ने किशोरी लाल के लिए ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, 'किशोरी भैया, मुझे कभी कोई शक नहीं था, मुझे शुरू से यकीन था कि आप जीतोगे. आपको और अमेठी के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई.'
किशोरी लाल ने प्रियंका को दिया जीत का श्रेय
किशोरी लाल शर्मा ने चुनाव परिणामों के बीच आजतक से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा, 'गांधी परिवार का साथ मिला. साथ ही गठबंधन के लोगों ने भी पूरा साथ दिया. सपा और कांग्रेस के लोगों ने खूब साथ दिया.' उन्होंने कहा, सारा श्रेय प्रियंका गांधी को जाता है. किशोरी लाल शर्मा ने कहा, मैं गांधी परिवार को भी श्रेय देना चाहता हूं, यह गांधी परिवार की भूमि है, मेरी नहीं. उन्होंने कहा कि अमेठी में विनम्रता चलेगी. यहां अहंकार नहीं चलेगा. उन्होंने राजीव गांधी को याद करते हुए कहा, 'जब भी राजीव जी यहां होते थे, तो हमेशा विनम्रता दिखाते थे. सपा और कांग्रेस के लोगों ने खूब साथ दिया.
कैसे रहे थे 2019 के नतीजे?
2019 के लोकसभा चुनाव में लगातार तीन बार के सांसद राहुल गांधी चौथी बार अमेठी सीट से मैदान में थे. राहुल के सामने बीजेपी ने 2014 चुनाव में दूसरे नंबर पर रहीं स्मृति ईरानी को उम्मीदवार बनाया था. स्मृति ईरानी को तब 4 लाख 68 हजार 514 वोट मिले थे. राहुल गांधी 4 लाख 13 हजार 394 वोट ही हासिल कर सके. स्मृति ईरानी ने अमेठी के कांग्रेसी दुर्ग में तब कमल खिला दिया था.
प्रियंका ने खुद संभाल रखा था अमेठी जीतने का जिम्मा
अमेठी सीट पर उम्मीदवार के नाम के ऐलान के साथ ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अमेठी सीट पर मोर्चा संभाल लिया था. उन्होंने लगातार इस सीट पर चुनाव प्रचार किया. साथ ही प्रियंका ने कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओं तक के साथ बैठकों में लगातार फीडबैक लेना जारी रखा. 9 मई, गुरुवार को प्रियंका गांधी ने अमेठी में पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरा वह चर्चा का विषय बन गया था. तब प्रियंका ने कहा था, 'मैं ये चुनाव जीतकर ही वापस जाऊंगी. मैं अमेठी की इस पवित्र धरती पर सही राजनीति वापस लेकर आऊंगी.' इसके अलावा कांग्रेस ने अपने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को अमेठी और रायबरेली के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया था. रायबरेली सीट से भूपेश बघेल तो अमेठी से अशोक गहलोत को कांग्रेस पार्टी की ओर से पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था.
अब परिणामों के बाद साफ है कि प्रियंका ने जो तब कहा था, वो अब कर के दिया है. चुनाव प्रचार की उस शाम प्रियंका गांधी के शब्द थे- 'मन बनाओ तो कोई नहीं हरा पाएगा. मैं इस चुनाव को जीतकर यहां से जाऊंगी. मैं आपके बीच आऊंगी और आपके साथ लड़ूंगी. मैं अमेठी की इस पवित्र धरती पर सही राजनीति, सत्य की राजनीति वापस लाने के लिए लड़ूंगी. कोई हमें हरा नहीं पाएगा. ये वचन मैं आपको देकर जा रही हूं.'
गांधी परिवार का खोया गढ़ वापस पाने की थी चुनौती
2019 में मिली हार के बाद कांग्रेस और उसके चुनाव मैनेजमेंट से जुड़े रहे किशोरी लाल शर्मा के सामने गांधी परिवार का खोया गढ़ वापस पाने की चुनौती थी. जब अमेठी से किशोरी लाल को उम्मीदवार बनाया गया था तब प्रियंका गांधी ने कहा था कि उनके साथ हमारे परिवार का वर्षों का नाता है. वह अमेठी, रायबरेली के लोगों की सेवा में हमेशा मन-प्राण से लगे रहे. केएल शर्मा 1999 से ही अमेठी की गली-गली, गांव-गांव को जानते हैं. उनकी निष्ठा और कर्तव्य के प्रति उनका समर्पण अवश्य ही इस चुनाव में सफलता दिलाएगा.
अमेठी सीट का चुनावी अतीत
साल 1967 के आम चुनाव से अस्तित्व में आई अमेठी सीट से 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने चुनाव लड़ा. इमरजेंसी विरोधी लहर में संजय गांधी हार गए थे. कांग्रेस के संजय को जनता पार्टी के रवींद्र प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने हरा दिया था. संजय गांधी 1980 में इस सीट से फिर मैदान में उतरे और रवींद्र को हराकर संसद पहुंचे. संजय गांधी की मौत के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में राजीव गांधी कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और जीते. 1984 में इस सीट पर गांधी परिवार के दो सदस्य आमने-सामने थे- राजीव गांधी और मेनका गांधी. राजीव ने बड़ी जीत के साथ सीट बरकरार रखी.
1998 में भी अमेठी में खिला था कमल
साल 1989 के चुनाव में भी राजीव गांधी इसी सीट से संसद पहुंचे. राजीव गांधी की हत्या के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के टिकट पर कैप्टन सतीश शर्मा सांसद निर्वाचित हुए और 1996 के चुनाव में भी सीट बरकरार रखी. साल 1998 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट पर कमल खिला. बीजेपी के डॉक्टर संजय सिंह ने कांग्रेस के कैप्टन सतीश को 23 हजार वोट से अधिक के अंतर से हरा दिया था. बाद में 1999 में इस सीट से कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चुनावी डेब्यू किया और जीतकर पहली बार संसद पहुंचीं. उसके बाद से यह सीट लगातार कांग्रेस के पास रही. लेकिन 2019 में एक बार फिर तस्वीर बदल गई. तब बीजेपी की स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के राहुल गांधी को हराकर अमेठी में दूसरी बार कमल खिला दिया.
स्मृति ईरानी नहीं तोड़ सकीं ट्रेंड?
स्मृति ईरानी की नजर 1998 का ट्रेंड तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार संसद पहुंचने वाली अमेठी से बीजेपी की पहली सांसद बनने पर थी. वहीं, कांग्रेस का फोकस 1999 के नतीजे दोहराने पर टिकी हुई थी. कांग्रेस ने 1998 में हारे उम्मीदवार की जगह नए चेहरे पर दांव लगाया था. उसी लाईन पर चलते हुए पार्टी ने इस बार यहां से किशोरी लाल शर्मा को मैदान में उतारा. और वो उम्मीदों पर खरे उतरते हुए गांधी परिवार का खोया गढ़ एक बार फिर से पार्टी की झोली में डाल दिया.
कौन हैं केएल शर्मा
किशोरी लाल शर्मा (केएल शर्मा) गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं. वह पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं. शर्मा ने 1983 में राजीव गांधी के साथ रायबरेली और अमेठी में कदम रखा था. तब से वह गांधी परिवार के करीबी हैं. पहली बार जब सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति में उतरीं और अमेठी से चुनाव लड़ीं तो केएल शर्मा उनके साथ अमेठी में सक्रिए हुए. जब सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के लिए अमेठी सीट छोड़ दी और खुद रायबरेली आ गईं तो केएल शर्मा ने रायबरेली और अमेठी दोनों ही सीटों की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली थी.