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BSP की सिकुड़ती सियासी जमीन, BJP की 'बी-टीम' हैं मायावती या 2024 में बदली अपनी छवि?

एग्जिट पोल में मायावती की बहुजन समाज पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं मिले हैं. उत्तर प्रदेश में पार्टी को अपना पिछला परफोर्मेंस भी बरकरार रख पाना मुश्किल है, जब आरएलडी-सपा के साथ गठबंधन में पार्टी ने 10 सीटें हासिल की थी. आइए समझते हैं कि इस चुनाव में आखिर मायावती ने कैसा रुख अपनाया?

मायावती मायावती
श्रेया सिन्हा
  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2024,
  • अपडेटेड 11:59 PM IST

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती का रुख 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले स्पष्ट नहीं था और कई लोग आश्चर्य में थे कि आखिर बहन जी क्या कदम उठाएंगी? उनके विरोधियों के बीच यह सवाल घूम रहा था कि क्या मायावती बीजेपी की 'बी टीम' की भूमिका निभाने की कोशिश में हैं, या एनडीए और इंडिया गठबंधन को चुनौती देते हुए वह उत्तर प्रदेश में तीसरा मोर्चा बनाने की तैयारी कर रही हैं?

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एग्जिट पोल से पता चलता है कि मायावती अपने ऊपर लगे बीजेपी की 'बी टीम' के टैग को खत्म करने में कामयाब रही हैं, लेकिन चुनाव के बीच भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटाने और कई सीटों पर उम्मीदवार बदलने के उनके फैसले ने सवाल खड़े किए हैं.

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2024 के एग्जिट पोल में किसको, कितनी सीटें?

मायावती के दिल की बात को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल में यूपी में बीएसपी की करारी हार की भविष्यवाणी की गई है, जिसमें उनकी पार्टी को सिर्फ एक सीट मिलने का अनुमान है. हालांकि, उनकी पार्टी ने 2019 के चुनाव में राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में 10 सीटें हासिल की थीं.

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2024 के चुनाव में एनडीए को 67 से 72 सीटें मिलने का अनुमान है, जो पिछली बार की तुलना में बेहतर है. वहीं इंडिया ब्लॉक को 8 से 12 सीटें मिलने का अनुमान है. एनडीए के वोट शेयर में मामूली गिरावट के साथ 49 फीसदी और इंडिया ब्लॉक को 15 फीसदी वोट शेयर मिल सकते हैं, जबकि बीएसपी का वोट शेयर 8 फीसदी तक कम होने की संभावना है.

बीएसपी को कहां हुआ नुकसान?

एग्जिट पोल ने मायावती की एक अलग छवि पेश की है, जबकि उनकी अपनी पार्टी का भाग्य अधर में लटका हुआ है, उनके चुनावी फैसले इंडिया गठबंधन के पक्ष में काम करते दिख रहे हैं. बीएसपी के जाटव (8%), गैर-जाटव अनुसूचित जाति (4%) और मुस्लिम (34%) वोटों का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में जाता नजर आ रहा है. सर्वे की मानें तो मायावती को अन्य पिछड़ा वर्ग के वोट का भी नुकसान हो सकता है.

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यादवों के मामले में, बीएसपी को 28 फीसदी वोटों का नुकसान होने वाला है, जो संभावित रूप से इंडिया ब्लॉक के पाले में जा सकता है. इनके अलावा मायावती को ओबीसी वर्ग के वोट के नुकसान का भी अनुमान है, जिसमें कुर्मी सात फीसदी, लोध एक फीसदी और तीन फीसदी जाट वोट शामिल हैं.

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दिलचस्प बात यह है कि बीएसपी अपने ब्राह्मण और राजपूत वोटों को बरकरार रख सकती है, जो 5 और 6 फीसदी है. एग्जिट पोल की मानें तो बीएसपी के मुख्य जाटव मतदाताओं ने भी इंडिया गठबंधन को मतदान किया है, जबकि यादव वोट सपा को मिल सकते हैं. 

वोटों के इस नुकसान को मायावती द्वारा विपक्ष के साथ गठबंधन न करने और प्रमुख सीटों पर उम्मीदवारों में फेरबदल करने के फैसले के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. इंडिया टुडे ने चुनाव से पहले 14 सीटों पर उम्मीदवार बदलने के उनके कदम और इससे बनी धारणा का विश्लेषण किया था, जिससे सवाल उठता है कि क्या बहनजी दबाव में काम कर रही थीं?

14 सीटें जहां बीएसपी के उम्मीदवार बदले गए

जौनपुर: जौनपुर से बीएसपी के पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी को पहले पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया गया था, लेकिन उनकी जगह दूसरे सांसद श्याम सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया गया.

वाराणसी: बीएसपी ने वाराणसी से दो बार अपना उम्मीदवार बदला. पहले अतहर जमाल लारी को उम्मीदवार घोषित किया गया था, लेकिन एक हफ्ते बाद पार्टी ने सैयद नियाज अली को उम्मीदवार बनाया. बाद में उनकी जगह अतहर जमाल लारी को ही उम्मीदवार बनाया गया.

आजमगढ़: बीएसपी ने इस सीट से भीम राजभर को पहले उम्मीदवार बनाया था. हालांकि, बाद में पार्टी ने इस सीट से सबीहा अंसारी को टिकट दिया, लेकिन पार्टी ने फिर अपना उम्मीदवार बदला और मसूद अहमद को टिकट दिया.

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अलीगढ़: बीएसपी ने इस सीट से पहले गुफरान नूर को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में पार्टी ने हितेंद्र उपाध्याय को टिकट दे दिया.

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मथुरा: मायावती ने पहले कमल कांत उपमन्यु को मथुरा से उम्मीदवार बनाया था. बाद में उन्होंने उम्मीदवार बदलकर चौधरी सुरेश सिंह को टिकट दिया.

फिरोजाबाद: बहुजन समाज पार्टी ने पहले सत्येंद्र जैन सोली को फिरोजाबाद सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में चौधरी बशीर को उम्मीदवार बनाया गया.

झांसी: वकील राकेश कुशवाह को पहले उम्मीदवार घोषित किया गया था, लेकिन बाद में उनकी जगह रवि कुशवाह को उम्मीदवार बनाया गया.

बीएसपी का सिकुड़ता पॉलिटिकल ग्राउंड

लोकसभा चुनाव में देखा गया है कि क्षेत्रीय पार्टियों का कद सिकुड़ रहा है, जिसमें मायावती की पार्टी बीएसपी भी शामिल है. भारत में लोकसभा चुनाव लगातार अमेरिका की तरह टू-पार्टी सिस्टम का रूप लेते जा रहे हैं. बसपा के वोट शेयर में जहां 8 फीसदी की गिरावट आने की उम्मीद है, वहीं आंध्र प्रदेश की वाईएसआरसीपी को भी 41 फीसदी वोट शेयर के नुकसान का अनुमान है.

ओडिशा के बीजू जनता दल को 33 फीसदी, केरल के लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को 29 फीसदी, तमिलनाडु में एआईडीएमके को 19 फीसदी और तेलंगाना की बीआरएस को 13 फीसदी वोटों के नुकसान का अनुमान है.

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अगर एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो क्या उत्तर प्रदेश में बीएसपी का पैठ खत्म हो जाएगा? या क्या मायावती को इंडिया ब्लॉक से गठबंधन नहीं करने के फैसले पर पछतावा होगा? उनका अगला कदम क्या होगा? यह तो समय ही बताएगा.

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