
लोकसभा चुनाव के साथ अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव भी होंगे. लेकिन इन दोनों प्रदेशों की मतगणना की तारीखों में बदलाव किया गया है. अब वोटों की गिनती 2 जून को होगी. जबकि दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 19 अप्रैल को होगा. अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम, दोनों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 02 जून 2024 को समाप्त हो रहा है.
बता दें कि चुनाव आयोग ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान किया था. सभी 60 सीटों के लिए एक ही चरण में 19 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, मतों की गिनती पहले 4 जून को होनी थी लेकिन अब इसमें फेरबदल किया गया है. यहां काउंटिंग 2 जून को होगी.
भाजपा अरुणाचल प्रदेश की सभी 60 विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है.
इस बार पार्टी ने 16 नए चेहरों को मौका दिया है जबकि तीन मौजूदा मंत्रियों के टिकट काट दिए गए. मुख्यमंत्री पेमा खांडू मुक्तो सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जिसका वह वर्तमान सदन में प्रतिनिधित्व करते हैं.
बात सिक्किम की करें तो चुनाव आयोग यहां भी आम चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम जारी किया था. यहां एक ही चरण में 19 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे और 2 जून को मतगणना होगी. वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 2 जून, 2024 को समाप्त होने वाला है. 32 सीटों वाली विधानसभा में फिलहाल सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) के प्रेम सिंह तमांग मुख्यमंत्री हैं.
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा की है सूबे में सरकार
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) वर्तमान में राज्य में सत्तारूढ़ दल है, जो मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व में सिक्किम विधानसभा में उनके विधायकों की संख्या 17 है. सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने कुछ दिन पहले ही 6 सीट के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी. पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग रिकॉर्ड नौवीं बार विधायक बनने के लिए नामची-सिंघिथांग से चुनाव लड़ेंगे.
सिक्किम में कैसे थे पिछले चुनावों ने नतीजे
2019 में लोकसभा चुनाव के साथ यहां एक चरण में 11 अप्रैल, 2019 को वोट डाले गए थे. इसमें सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के बीच मुकाबला देखने को मिला था. चुनाव के बाद 25 वर्षों तक सिक्किम में प्रमुख पार्टी होने के बावजूद एसडीएफ ने 15 सीटें हासिल की थी. जबकि एसकेएफ ने 17 सीटें जीतीं, जो विधानसभा में साधारण बहुमत के लिए पर्याप्त थीं, जिसके बाद एसकेएम के प्रेम सिंह तमांग (पी.एस. गोले) ने सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.